राम मंदिर के शुभ मुहूर्त का क्या है महत्व?

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राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का सभी को बेसब्री से इंतजार है। इसके शुभ मुहूर्त का समय 22 जनवरी को 12 बजकर 29 मिनट 8 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट 32 सेकंड का तय है। सनातन धर्म में शुभ मुहूर्त का खास महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि शुभ मुहूर्त के दौरान किए गए काम से विशेष लाभ मिलता है। ये परंपरा पौराणिक काल से चली आ रही है।

शुभ मुहूर्त क्यों जरूरी है? 

शुभ मुहूर्त के विषय में वैदिक शास्त्र कहते हैं कि शुभ मुहूर्त वो विशेष समय होता है, जब सौरमंडल में ग्रह और नक्षत्र की स्थिति कार्य के लिए शुभ होती है। किसी बाधा से बचने और आगे कोई समस्या न आए, इसके लिए शुभ मुहूर्त का पालन किया जाता है।

शुभ मुहूर्त कैसे देखा जाता है ?

शुभ मुहूर्त जानने के लिए ज्योतिष के जानकार या पंडितों की मदद ली जाती है, ताकि ज्योतिष गणना के द्वारा बताए गए शुभ मुहूर्त से कार्य सिद्ध हो सकें।  शास्त्रों में ये भी बताया गया है कि अगर कोई अशुभ समय में मंगल कार्य करता है, तो उसे जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वैदिक पंचांग में 5 विशेष अंग,नक्षत्र, तिथि, योग, करण और वार का वर्णन किया गया है। इन 5 अंगों के सहयोग से निकाला गया समय शुभ मुहूर्त कहा जाता है। जिसे किसी भी मांगलिक कार्य के लिए विशेष माना जाता है।

नक्षत्र

पंचांग में पहला नक्षत्र है। ज्योतिष विद्वानों की मानें, तो नक्षत्र 27 प्रकार के होते हैं और मुहूर्त निकालते समय 28वां नक्षत्र भी गिना जाता है, जिसे अभिजीत नक्षत्र कहते हैं। किसी भी विशेष कार्य को करते समय इन नक्षत्रों को विशेष रूप से देखा जाता है।

तिथि

पंचांग का दूसरा विशेष अंग तिथि है, जिसके 16 प्रकार होते हैं। इनमें पूर्णिमा और अमावस्या दो प्रमुख तिथियां हैं। ये शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष को बांटती हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक, अमावस्या-पूर्णिमा के बीच की अवधि को शुक्ल पक्ष, और पूर्णिमा-अमावस्या के बीच की अवधि को कृष्ण पक्ष कहा जाता है। मान्यता तो ये भी है कि किसी भी विशेष काम के लिए कृष्ण पक्ष का समय अच्छा नहीं होता है। इसलिए ज्योतिष के विद्वान ज्यादातर शुभ मुहूर्त शुक्ल पक्ष के समय के दौरान ही निकालते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है कि क्योंकि कृष्ण पक्ष के दौरान चंद्रमा की शक्तियां कमजोर हो जाती हैं। जो किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अच्छी नहीं मानी जाती है।

योग

पंचांग का तीसरा अंग योग है। बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में 27 प्रकार के योग का वर्णन किया गया है। ये सभी योग व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। साथ ही ज्योतिष में बताए गए शुभ योग के निर्माण से व्यक्ति को कई प्रकार की सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं। 

करण

पंचांग का चौथा महत्वपूर्ण अंग करण है। ये तिथि के आधे भाग को कहा जाता है। ये मुख्य रूप से 11 प्रकार के करण होते हैं। इनमें से 4 स्थिर होते हैं और 7 अपनी चाल बदलते रहते हैं। 

वार

पंचांग का 5वां और महत्वपूर्ण अंग वार को कहा गया है। एक सूर्यादय से दूसरे सूर्यादय के बीच की अवधि को वार कहते है। रविवार, सोमवार, मंगलवार आदि, ये सभी 7 प्रकार के वार होते हैं। जिनमें से सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को सबसे शुभ माना जाता है। जैसे 22 जनवरी यानी प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन सोमवार है। 

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