भगवान श्रीराम को अपने दिल में बसाए थे राज कपूर

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एक्टर राज कपूर को गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का हर प्रसंग कंठस्थ था। उनके मन में प्रभु श्रीराम बसते थे। यही वजह थी कि उनकी कई फिल्मों की पृष्ठभूमि में श्रीरामकथा की मूल भावना दिखती थी।

'जुल्म सहे भारी जनक दुलारी..'

जज रघुनाथ यानी पृथ्वीराज कपूर की पत्नी लीला यानी लीला चिटनेस अपहरण के बाद घर आती हैं। रघुनाथ को पता चलता है कि वो गर्भवती हैसमाज की बातों में पड़कर वो अपनी पत्नी को निकाल देते हैं। इन दुखभरे हालात में लीला एक बच्चे को जन्म देती हैं। फिर इस सीन के बैकग्राउंड में म्यूजिक डायरेक्टर शंकर-जयकिशन की धुन और गीतकार शैलेंद्र की कलम से सजा एक गीत सुनाई देता है –

'पतिव्रता सीतामाई को तूने दिया वनवास ।

क्यों न फटा धरती का कलेजा, क्यों न फटा आकाश।।

जुल्म सहे भारी जनक दुलारी...'

ये फिल्मी सीन साल 1951 की फिल्म 'आवाराका हैं। जिसमें 'श्रीरामकथाकी पृष्ठभूमि दिखती है। 'श्रीरामकथाके सुखांत में भगवान श्रीराम अपने दोनों बेटे लवकुश को अपनाते हैंपर माता सीता धरती की गोद में समा जाती हैं।फिल्म 'आवारामें भी जज रघुनाथ अपने बेटे को अपनाते हैं पर पत्नी लीला से मिलन अधूरा ही रह जाता है।

समाज के सत्य और विसंगतियों को इस तरह फिल्मों में पेश करने की कला राज कपूर के पास थी। फिल्म 'आवारामें राज कपूर बतौर एक्टर और डायरेक्टर काम कर रहे थे। फिल्म के स्टोरी राइटर ख्वाजा अहमद अब्बास थे।

फिल्मों से सामाज को संदेश देने की कोशिश 

'लव स्टोरी', 'बेताब', 'अर्जुन' और 'अंजाम' जैसी कई फिल्मों के डायरेक्ट रहे राहुल रवेल अपने एक लेख में लिखते हैं कि 'गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का हर प्रसंग राज कपूर को कंठस्थ था। उनके मन में प्रभु श्रीराम बसते थे। यही वजह थी कि उनकी कई फिल्मों की पृष्ठभूमि में श्रीरामकथा की मूल भावना दिखती थी। वो हमेशा कोशिश करते कि फिल्मों के जरिए सामाज को कोई न कोई संदेश दिया जाए।' राहुल रवेल आगे लिखते हैं कि 'राजकपूर मानते थे जो बात सहज और सरल शब्दों में कही जाएउसका प्रभाव अलग होता है। इसलिए वो अपनी फिल्म की कहानियों को मौजूदा वक्त के संदर्भ से जोड़ते थे।' राज कपूर ने इंडस्ट्री को 50 साल दिए। 70 से ज्यादा फिल्मों में बतौर एक्टरडायरेक्टर और प्रोड्यूसर काम कर लिया। लेकिन अभी तमन्ना रह गई एक ऐसी फिल्म बनाने की जो समाज के दोहरे चरित्र पर कटाक्ष करे। सभी को सोचने पर मजबूर कर दे।

पाप करने के बाद लगा दी गंगा में डुबकी  

लोग अपने पाप-पुण्य का विचार नहीं करते। व्यवस्था भी ऐसी है। पाप करने के बाद गंगा में डुबकी लगा दी तो ये माना जाता है की सारे पाप धुल जाएंगे। मां गंगा का आंचल उन पापों को समेट लेता है। 14 सालों के वनवास के लिए भगवान श्रीराम आयोध्या से निकले तो प्रयागराज भी ठहरे। वहां उन्होंने देखा गंगा स्नान के जरिए श्रद्धालु अपने पाप से मुक्त होते हैं।

'गोस्वामी तुलसीदास श्रीरामचरित मानस में लिखते हैं।

'को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ।

कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ॥

अस तीरथपति देखि सुहावा।

सुख सागर रघुबर सुखु पावा॥'

अर्थात- 'प्रयागराज की महिमा कौन कह सकता है भलायदि पापरूपी मदमस्त हाथियों का समूह सब कुछ नष्ट करते हो तो सिंहरूपी तीर्थराज प्रयाग उनका वध कर सकता है। ऐसे तीर्थराज का दर्शन कर स्वयं प्रभु श्रीरामचंद्रजी ने भी सुख पाया।'

रवींद्र जैन के गीत से मिली कहानी  

ये पूरा प्रसंग राज कपूर के मन में बसा था – दिक्कत थी इस विचार को सही तरीके से प्रजेंट करने के लिए उनके पास कोई कहानी नहीं थी। कहानी की तलाश जारी थी। इसी दौरान वो एक शादी में शरीक होने दिल्ली गए। शादी में म्यूजिक डायरेक्टर रवींद्र जैन अपनी परफॉर्मेंश के दौरान एक गीत गा रहे थे – जिसके बोल थे

'एक राधाएक मीरा

दोनों ने श्याम को चाहा।

अंतर क्यादोनों की चाह में बोलो

एक प्रेम दीवानीएक दरस दीवानी।'

ये गाना राज कपूर ने सुना तो सीधे स्टेज पर पहुंच गए। आर्केस्ट्रा रोक दिया। राज कपूररवींद्र जैन से बोले 'मैं श्रीरामचरितमानस के एक प्रसंग से काफी प्रभावित थापर कोई कहानी नहीं मिल रही थी। आज आपके इस गाने से मुझे अपनी फिल्म के लिए मजबूत आधार मिल गया।' राज कपूर ने उसी दौरान रवींद्र जैन को साइनिंग अमाउंट दिया और कहा' आप मेरी अगली फिल्म के लिए म्यूजिक दे रहे हैं।'

'राम तेरी गंगा मैली' तोड़ दिए थे सारे रिकॉर्ड

साल था - 1985 और फिल्म थी – 'राम तेरी गंगा मैली'। फिल्म सुपरहिट हुई, बॉक्स ऑफिस में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। फिल्म 'राम तेरी गंगा मैलीराज कपूर की जिंदगी का आखिरी नयाब काम था। वो फिल्म के डायरेक्टर स्टोरी राइटर और एडिटर थे। फिल्म के हीरो थे राजकपूर के बेटे - राजीव कपूर और हीरोइन - मंदाकिनी। 

आरके स्टूडियो में रखी थी भगवान शिव की प्रतिमा

राज कपूर ने आरके स्टूडियो की नींव रखी थी। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वहां पर भगवान शिव की प्रतिमा की स्थापना की गई थी। किसी भी फिल्म के मुहूर्त से पहले राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर शिव की आराधना करते। राज कपूर सहज भाव से उस पूजा-पाठ का हिस्सा बनते।

'राज कपूर का दिल हिंदुस्तानी था'

फिल्म डायरेक्टर राहुल रवेल अपने लेख में लिखते हैं कि 'साल 1955 की फिल्म 'श्री 420में 'मेरा जूता है जापानीगाना गाने वाले और पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले एक्टर राज कपूर का दिल हिंदुस्तानी था और इस हिंदुस्तानी दिल में भगवान श्रीराम बसते थे।'

2024 में राज कपूर की जन्मशती

संयोग देखिए...14 दिसंबर साल 1924 को जन्मे राज कपूर की साल 2024 में जन्मशती है। और साल 2024 में ही राम जन्मभूमि अयोध्या में 'भगवान श्रीरामका भव्य मंदिर बनकर तैयार हो रहा है।

'आज की फिल्में क्या सिखा रही?'

अगर सिनेमा की बात की जाए तो  भारतीय जनमानस में बसी श्रीरामकथा के नायक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने हमें धर्म और समाज के मूल कर्तव्यों का पालन करना सिखाते है। तो दूसरी तरफ आज का सिनेमा हमारे जो समाज को बेहद प्रभावित करता है। वो क्या सिखा रहा है? क्या इन फिल्मों में राज कपूर की फिल्मों की तरह श्रीरामकथा की पृष्ठभूमि दिखती है?

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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