Uphaar Cinema Fire Tragedy : पीड़ितों की लंबी और थका देने वाली कानूनी लड़ाई की असल कहानी 'ट्रायल बाई फायर'

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दिल्ली के उपहार सिनेमा अग्निकांड में 59 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के 25 साल बाद नेटफ्लिक्स ने इस त्रासदी के पीड़ितों की भावनाओं में लिपटी एक बेव सीरीज 'ट्रायल बाई फायररिलीज़ की है। इस वेब सीरीज पर रोक लगाने को याचिका भी दाखिल हुई लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। आज उपहार सिनेमा अग्निकांड की पूरी कहानी।

 

तारीख थी 13 जून और साल 1997। दिल्ली के उपहार सिनेमा में फिल्म बॉर्डर के शो चल रहे थे। फिल्म की रिलीज का पहला दिन होने से भीड़ ज्यादा थी। दोपहर के शो के लिए लोग टिकट ले रहे थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था आने वाले कुछ घंटे उनके जीवन को हमेशा-हमेशा के लिए दुख दे जाएंगे। शो के दौरान करीब पांच बजे सिनेमा हॉल की पार्किंग में आग लग गई। धीरे-धीरे धुआं हॉल में पहुंचा। जब लोगों को आग लगने की भनक लगी तो भगदड़ मच गई। हॉल से निकलने के लिए लोग एक-दूसरे को धक्का देने लगे। कई लोग डर के मारे खिड़कियों से ही कूद पड़े। जो अंदर ही फंस गए। उनको या तो आग ने आगोश में ले लिया या उनका धुएं से दम घुट गया। इस अग्निकांड में 59 लोगों की मौत हुई जिसमें 23 बच्चे थे। करीब सौ से ज्यादा लोग घायल हुए।

 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आग लगने की जानकारी लोगों को नहीं दी गई। चौकीदार भाग गया था। पुलिस जांच में सामने आया कि अग्निकांड के कुछ साल पहले ही हॉल में 50 से ज्यादा सीटें बढ़ाई गई थीं। जो जरूरत से ज्यादा थीं। इससे एग्जिट गेट की तरफ जाने का रास्ता पतला हो गया। सिनेमा हॉल  में न तो इमरजेंसी लाइट थी और न ही फ्लोर  लाइट। जांच में पता चला कि हॉल के बेसमेंट में लगा ट्रांसफॉर्मर में उसी दिन एक बार पहले भी आग लगी थी जिस पर काबू पा लिया गया थालेकिन रिपेयरिंग न होने से दोबारा आग लग गई और ये ही लापरवाही लोगों के लिए मौत के उपहार में बदल गई।

 

इस अग्निकांड में कई लोगों ने अपनों को खोया जिसमें से एक थे नीलम और शेखर कृष्णमूर्ति। उनके दो बच्चे 17 साल की उन्नति और 13 साल के उज्जवल की मौत हो गई थी। घटना के पीछे लापरवाही की बात सामने आते ही नीलम और शेखर कृष्णमूर्ति ने प्रभावशाली प्रॉपर्टी डेवलपर्स और सुस्त अदालतों के खिलाफ लंबी और थका देने वाली लड़ाई लड़ी। दोनों का कहना थाजब बच्चे जिंदा होते हैं तो मां-बाप उनके लिए कितना कुछ करते हैंलेकिन उनके चले जाने पर क्यों पीछे हटना चाहिए।

 

मामला कोर्ट पहुंचा। हॉल में काम करने वाले स्टाफसेफ्टी इंस्पेक्टर से लेकर मालिक अंसल ब्रदर्स समेत 16 लोग अभियुक्त बने। इसमें सबसे हाई प्रोफाइल नाम सिनेमा के मालिक सुशील और गोपाल अंसल थे। कोर्ट ने 10 साल बाद साल 2007 में सभी को दोषी पाया। लेकिन तब तक इनमें से चार लोगों की मौत हो चुकी थी। इनमें से कुछ को सात महीने तो कुछ को सात साल की सजा हुई। अंसल ब्रदर्स को मात्र दो साल की जेल हुई। नीलम और शेखर कृष्णमूर्ति ने दिल्ली हाई कोर्ट में फैसले को चुनौती दी तो सजा बढ़ाने की बजाय आधी हो गई। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और साल 2015 में आया यहां का फैसला और भी झटका देने वाला था। कोर्ट ने अंसल ब्रदर्स की सजा पूरी तरह से माफ कर दी।

 

दोनों ने हिम्मत नहीं हारी और फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटकटाया। इस बार कोर्ट ने गोपाल अंसल को एक साल की सजा सुनाई। और सुशील अंसल की उम्र 77 साल हो गई थी। उम्र को देखते हुए उन्हें रिहा कर दिया गया। उपहार अग्निकांड पर 13 जनवरी को नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘ट्रायल बाइ फायर’ रिलीज हुई है। ये वेब सीरीज नीलम और शेखर कृष्णमूर्ति की कहानी पर बेस्ड हैजिन्होंने लगभग 25 सालों तक चले कोर्ट ट्रायल पर इसी शीर्षक से किताब लिखी है। इस वेब सीरीज पर रोक लगाने के लिए सुशील अंसल ने कोई में याचिका दाखिल कीजिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। इस सीरीज में अभय देओल शेखर कृष्णमूर्ति और राजश्री देशपांडे नीलम कृष्णमूर्ति के रोल में हैंजो न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते हैं। ट्रायल बाइ फायर सालों लंबी कानूनी लड़ाई का दस्तावेज हैजिसमें भावनाओं का उतार-चढ़ाव है। इस वेब सीरीज का डायरेक्शन प्रशांत नायर और रणदीप झा का है।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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