Republic Day : जब 26 जनवरी को मनाया जाता था स्वतंत्रता दिवस

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अगर इतिहास के पन्ने पलटेंगे तो पाएंगे कि कभी 26 जनवरी के दिन गणतंत्र दिवस नहीं स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता था। वो भी एक दो साल नहीं, पूरे 17 सालों तक।

 

स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस की तारीखों की अपनी-अपनी कहानियां

15 अगस्तसाल 1947, भारत आजाद हुआ। इस दिन स्वतंत्रता दिवस पूरा देश मनाता है। 26 जनवरीसाल 1950, भारत का संविधान लागू हुआ। इन दिन को हम गणतंत्र दिवस के रूप में मानते हैं। लेकिन अगर इतिहास के पन्ने पलटेंगे तो पाएंगे कि कभी 26 जनवरी के दिन गणतंत्र दिवस नहीं स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता था। वो भी एक दो साल नहींपूरे 17 सालों तक। फिर इस तारीख को गणतंत्र दिवस के रूप में चुना गया। कैसे हुआ ये बदलाव। वहीं जब अंग्रेजों ने भारत को आजाद किया तो 15 अगस्त का दिन क्यों चुना। इन तारीखों की अपनी – अपनी कहानियां हैं और इसे समझने के लिए साल 1929 में जाना पड़ेगा।

जब 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' ने की 'पूर्ण स्वराज' की मांग

ये वो वक्त था जब पूरे देश में आजादी की मांग ने जोर पकड़ा था। नौजवान देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर रहे थे। पूर्ण स्वराज की मांग तेज हो रही थी। 19 दिसंबर साल 1929 को 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' ने 'पूर्ण स्वराज' की घोषणा की। लोगों ने शपथ ली कि ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ेंगे और 'अपना राजबनाने के लिए संघर्ष करेंगे। 12वें दिन यानी 31 दिसंबर साल 1929 को तत्कालीन पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में कांग्रेस ने वार्षिक अधिवेशन में रावी नदी के तट पर तिरंगा झंडा फहराया और 'पूर्ण स्वराज' का घोषणा-पत्र तैयार किया।

जवाहर लाल नेहरू के भाषण से लोगों में आया जोश

अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गए जवाहरलाल नेहरू। उन्होंने अपने भाषण में कहा 'विदेशी शासन से अपने देश को मुक्त कराने के लिए अब हमें खुला विद्रोह करना है और इसमें राष्ट्र के सभी नागरिक हाथ बढ़ाने के लिए सादर आमंत्रित हैं।'

लाहौर अधिवेशन में पास हुए ये प्रस्ताव 

  'गोलमेज सम्मेलन' का बहिष्कार किया जाएगा।
  'पूर्ण स्वराज्य' को कांग्रेस ने अपना मुख्य लक्ष्य घोषित किया।
  'कांग्रेस कार्यसमिति' को 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' शुरू करने का पूर्ण उत्तरदायित्व सौंपा गयाजिसमें करों का भुगतान नहीं करने जैसे मुद्दे शामिल थे।
  सभी कांग्रेस सदस्यों को भविष्य में काउंसिल के चुनावों में भाग नहीं लेने और काउंसिल के मौजूदा सदस्यों को अपने पदों से त्यागपत्र देने का आदेश दिया गया।
  26 जनवरी1930 के दिन पूरे देश में 'प्रथम स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाने का निश्चय किया गया।

आजादी के लिए आंदोलन और हुए तेज  

इस अधिवेशन का असर ये हुआ कि 26 जनवरीसाल 1930 को पूरे देश में जगह-जगह सभाएं हुईं। लोगों ने स्वतंत्रता प्राप्त करने की शपथ ली। 'भारत माता की जय' और 'इंकलाब जिंदाबाद' जैसे नारों के बीच भारतीय स्वतंत्रता का प्रतीक तिरंगा झंडा फहराया गया। इसके बाद आजादी के लिए आंदोलन और तेज हुए। इसके बाद से हर साल 26 जनवरी को स्वतंत्रता सेनानी पूरे जोश के साथ तिंरगा झंडा फहराकर प्रतीकात्मक तौर पर स्वतंत्रता दिवस मनाने लगे।

17 सालों तक चला सिलसिला

ये सिलसिला तब तक नहीं रुका जब तक देश आजाद नहीं हो गया। 17 साल बाद, 15 अगस्त, साल 1947 देश आजाद हुआ। तब से हर साल 15 अगस्त को पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मनाने लगा। अब बात ये कि अंग्रेजों ने 15 अगस्त को ही आजादी देने की तारीख क्यों चुनी।

दंगों के डर से तय वक्त के पहले दे दी गई आजादी

डॉमिनिक लैपियर और लैरी कॉलिंस की किताब 'आधी रात को आजादीके मुताबिक, सबसे पहले भारत की आजादी की तारीख 30 जून साल 1948 चुनी गई। लेकिन उसी वक्त जवाहर लाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना के बीच भारत और पाकिस्तान के बंटवारे का मुद्दा शुरू हुआ। जिन्ना ने पाकिस्तान की मांग की तो सांप्रदायिक झगड़े की संभावना देखकर आजादी की तारीख बदलकर उसे और पहले कर दिया गया। 15 अगस्त, साल 1947 को आजादी देने का फैसला किया। 04 जुलाई 1947 को लार्ड माउंटबेटन ने 'ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स' में 'इंडियन इंडिपेंडेंस' बिल पेश किया। इस बिल को ब्रिटिश संसद ने मंजूरी दी और 15 अगस्त 1947 के दिन भारत को आजादी देने की घोषणा कर दी गई।

15 अगस्त लार्ड माउंटबेटन की जिंदगी का खास दिन

दरअसल, भारत के अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटन की जिंदगी में 15 अगस्त का दिन बहुत ही खास था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 15 अगस्त1945 को ब्रिटिश आर्मी के सामने जापानी आर्मी ने आत्मसमर्पण किया था। उस वक्त लार्ड  माउंटबेटन ब्रिटिश फौज में अलाइड फोर्सेज के कमांडर थे। जापानी सेना के आत्मसमर्पण का पूरा श्रेय लार्ड माउंबेटन को मिला। लार्ड माउंटबेटन 15 अगस्त को जिंदगी का सबसे अच्छा दिन मानते थे और इसलिए उन्होंने 15 अगस्त का दिन भारत की आजादी के लिए चुना।

आजादी मिलने के बाद संविधान निर्माण में आई तेजी

06 दिसंबर साल 1946 को संविधान सभा का गठन हो चुका था। आजादी मिलने के बाद संविधान निर्माण के काम में तेजी आई। 26 नवंबर साल 1949 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारतीय संविधान का अंतिम मसौदा सौंपा। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की बैठक में भारतीय संविधान पर सभी सदस्य ने अपने हस्ताक्षर कर उसे मान्यता दी और दो दिन बाद 26 जनवरी, 1950 भारत का संविधान लागू हुआ। तब से हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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