गर्मी में हीट स्ट्रोक का रिस्क, जानिए इसके बचाव के तरीके

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देश के उत्तर भारत में भीषण गर्मी अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ रही है। दिल्ली, यूपी समेत मैदानी इलाकों में टेम्प्रेचर 45 डिग्री के पार पहुंच गया है। चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों से बचने के लिए लोग बिना किसी जरूरी काम के अपने घरों से निकलने में बच रहे हैं और अगर घर से बाहर निकलते भी हैं तो लू और हीट-स्ट्रोक से बचने के लिए कई तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में हम आपको बताएंगे कि हीट-स्ट्रोक क्या है और इसके बचाव को जान लेते हैं।

दरअसल, इतनी बेतहाशा गर्मी का सहन कर लेना आसान नहीं होता है, लेकिन इंसानी शरीर ऐसे तत्वों से बना होता है कि वो विशेष परिस्तिथियों का भी बखूबी सामना कर लेता है। आमतौर पर इंसान के शरीर का सामान्य टेम्प्रेचर 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है जो 37 डिग्री सेल्सियस के बराबर होता है और माना जाता है कि सामान्य तौर पर इंसान जिस अधिकतम तापमान पर आराम से रह सकता है, वो 108.14 डिग्री फारेनहाइट यानी 42.3 डिग्री सेल्सियस है। ऐसी जगह जहां मौसम स्थिर नहीं रहता, वहां अगर टेम्प्रेचर 45 डिग्री के पार चला जाए तो इसे खतरनाक कहा जाएगा। वैज्ञानिकों ने अपनी स्टडी में बताया है कि इंसान गर्म ब्लड वाला स्तनधारी है यानी होमियोस्टैसिस नामक तंत्र से संरक्षित हैं। ये एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से मानव मस्तिष्क हाइपोथैलेमस से शरीर के तापमान को जीवित रहने की सीमा में रखने के लिए नियंत्रित करता रहता है। जब इंसान की रक्त वाहिकाओं में फैलाव आता है, शरीर से पसीना निकलता है, लोग मुंह से सांस लेते हैं या ताजी हवा के लिए खुली जगहों पर जाते हैं, तो इन तरीकों से हाइपोथैलेमस को ऊर्जा मिलती है और ये मानव शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। इस वजह से इंसान ज्यादा तापमान को सहन कर लेता है।

कितना अधिकतम टेम्प्रेचर होता है जानलेवा?

आंकड़े बताते हैं कि 1992 से 2015 के बीच हीटवेव ने 22 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी, जबकि साल 2021 में गर्मी की वजह से 1,634 लोगों की मौत हुई। वहीं, 2020 में गर्मी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,556 हो गई थी। मेडिकल जर्नल द लांसेट के मुताबिक, 2000 से 2004 और 2017 से 2021 के बीच अत्याधिक गर्मी की वजह से भारत में मौतों में 55 फीसदी की तेजी देखी गई। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2050 तक ब्रिटेन में गर्मी से होने वाली मौतों में 257 प्रतिशत की तेजी आएगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानों का शरीर आमतौर पर 35 से 37 डिग्री अधिकतम तापमान को आसानी से सहन कर लेता है, लेकिन कठिनाई तब बढ़ जाती है जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर हो जाता है, जबकि 50 डिग्री अधिकतम तापमान असहनीय हो जाता है। इससे ऊपर का तापमान किसी भी सामान्य इंसान के जीवन के लिए खतरा बन जाता है।

हीट-स्ट्रोक से बचाव के तरीके

ऐसे में अगर किसी को हीट-स्ट्रोक आता है और उसका समय पर इलाज न किया जाए तो उसकी मौत होने के अलावा, ऑर्गन फेल होना या ब्रेन डेड जैसी कुछ गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में अगर किसी को अगर किसी को लू लगी है तो उसे तुरंत धूप से बचाएं। कपड़ों की मोटी लेयर हटा दें और हवा लगने दें। साथ ही शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए कूलर या पंखे में बैठाएं और ठंडे पानी से मरीज को नहलाएं या शरीर को ठंडे पानी के कपड़े से पोछें। इसके अलावा सिर पर आइस पैक या कपड़े को ठंडे पानी से गीला करके रखें। ठंडे पानी में भीगे तौलिये को सिर, गर्दन, बगल और कमर पर रख सकते हैं। हीट स्टोक की वजह से सोडियम पोटेशियम और इलेक्टोलाइट के लेवल गड़बड़ा जाता है जिसका असर ब्रेन के साथ किडनी पर भी पड़ता है और ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ जाता है। बीपी के मरीजों के लिए खासतौर पर इस सीजन में बचकर रहना चाहिए। नींबू पानी, कच्चे आम का पना फायदेमंद होगा।

अगर इन तरीकों के बाद भी शरीर का टेम्प्रेचर कम नहीं होता तो तुरंत किसी डॉक्टर के पास जाएं। तो फिलहाल आप भी अगर कोई जरूरी काम न हो तो अपने घर या ऑफिस से धूप में बाहर न निकलें।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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