गुलाब बना प्यार की निशानी, फूलों का कारोबार 2028 तक 46 हजार करोड़ से पार हो जाएगा!

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ग्रीक और रोमन सभ्यता में गुलाब का नाम सेक्स और प्यार की देवी के साथ जुड़ा रहा है। ग्रीक माइथोलॉजी गुलाब को लेकर कहानियों के माध्यम से बताती है कि ग्रीक की एक गॉडेस, जिनका नाम एफ्रोडाइट था। उन्हें प्रेम, सौंदर्य और सेक्शुएलिटी का सिंबल माना जाता है।

हर साल फरवरी का महीना वेलेंटाइन वीक के चलते यंगस्टर्स का फेवरेट रहता है। कितने ही लोग इस वीक में प्यार-वफा के वादे करते हैं। इन सब में गुलाब का लाल फूल, मैंसेजर का काम करता है। जो लफ्ज बय़ां नहीं कर पातें, वो ये गुलाब का फूल कर देता है। वैसे बिल्कुल सटीकता से गुलाब कब मोहब्बत को दूसरा नाम बना, ये कहना जरा मुश्किल है। लेकिन साहित्य की कलम ने दस्तावेजों में जो कुछ संजोह कर रखा है, चलिए उससे जानते हैं कि गुलाब का फूल कैसे प्रेम का प्रतीक बन गया। ग्रीक और रोमन सभ्यता में गुलाब का नाम सेक्स और प्यार की देवी के साथ जुड़ा रहा है। ग्रीक माइथोलॉजी गुलाब को लेकर कहानियों के माध्यम से बताती है कि ग्रीक की एक गॉडेस, जिनका नाम एफ्रोडाइट था। उन्हें प्रेम, सौंदर्य और सेक्शुएलिटी का सिंबल माना जाता है। उनकी सुंदरता को लेकर बताया जाता है कि एफ्रोडाइट का सौंदर्य इतना जादुई था कि वो जहां जाती, वहां गुलाब के फूल उग आते थे। यहां से ही लाल गुलाब को प्यार और कामनाओं का एक सिंबल माना जाने लगा।

वैसे, हम ताजमहल को सिंबल ऑफ लव कहते हैं, शाहजहां ने बेगम मुमताज महल की याद बनवाया था। लेकिन शाहजहां के पिता जहांगीर भी इस मामले में कुछ कम नहीं थे। बादशाह जहांगीर अपनी बेगम नूरजहां को खुश करने के लिए रोजाना एक टन लाल गुलाब उनके महल में भिजवाया करते थे और ये गुलाब खासतौर से कश्मीर से मंगाए जाते थे। वैसे ऐसा बताया जाता है कि गुलाब 3 लाख साल से धरती पर मौजूद है। मगर इसकी बाकायदा खेती 5000 साल पहले चीन में शुरू हुई और फिर रोमन साम्राज्य के रास्ते अफगानिस्तान से होता हुआ गुलाब का फूल भारत तक आ गया और अगर अलग-अलग रंगों के गुलाबों की बात करें, तो हर रंग अलग पैगाम देता है। लाल गुलाब जहां प्यार की निशानी है, तो पीला गुलाब दोस्ती और सफेद गुलाब शांति का प्रतीक है। जब गिले-शिकवे भुलाना हो, तो गुलाबी गुलाब काम आता है। रिश्ते को एक कदम आगे ले जाना चाहते हो, तो उत्साह का प्रतीक ऑरेंज गुलाब काम आता है। वहीं अगर रिश्ता खत्म करना हो, तो काला गुलाब काम आता है। 

वैसे रिसर्च कहती हैं कि गुलाब देखते ही उसका असर ब्रेन के उस हिस्से पर पड़ता है, जो मन को सुकून पहुंचाता है। वहीं, फ्लावर डेकोरेशन की एक स्टडी बताती है कि जिन लोगों को गुलाब देखने को दिया गया, उनमें तनाव का स्तर पहले से कम था। गुलाब की खुशबू तनाव कम करने के साथ ही नींद को भी बेहतर करती है। गुलाब के रस में मौजूद ‘रोज ऑक्साइड’ माइंड और बॉडी को रिलैक्स करता है। वैसे, गुलाब अगर सही तरीके से उगाया गया हो तो उसका इस्तेमाल खाने में भी किया जा सकता है। गुलाब की पत्तियों से बने गुलकंद और गुलाब जल में पर्याप्त मात्रा में एंटीबैक्टीरियल और लैक्सटेसिव गुण पाए जाते हैं, जो तनाव कम करके लव हॉर्मोन को बढ़ा सकते हैं। ग्लोबल फ्लावर इंडस्ट्री 3 लाख करोड़ रुपए के पार हो गई है। रिसर्च एंड मार्केट्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फूलों का कारोबार 23 हजार करोड़ रुपए के पार हो चुका है। साल 2028 तक इसके 46 हजार करोड़ हो जाने की उम्मीद है। हालांकि, भारत में फूलों का इस्तेमाल मंदिरों में भी खूब होता है। आमतौर पर 10 रुपए में बिकने वाला गुलाब वैलेंटाइन डे के अवसर पर काफी ऊंचे दामों में बिकता है। एक गुलाब की कीमत 50 से 80 रुपए तक पहुंच जाती है।

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