कोलकाता में नेताजी सुभाष चंद्र बोसकी जयंती पर RSS-BJP का 'मेगा प्लान'

Home   >   खबरमंच   >   कोलकाता में नेताजी सुभाष चंद्र बोसकी जयंती पर RSS-BJP का 'मेगा प्लान'

171
views

2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों में बीजेपी अभी से जुट गई है। किस तरह से पश्चिम बंगाल में पार्टी को मजबूत किया जाए।

इसी को लेकर बीजेपी और आरएसएस लोकसभा चुनाव में बंगाल फतेह करने में जुट गई है। 23 जनवरी को आजाद हिन्द फ़ौज के कमांडर नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती मनाई गई।  इसी को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बंगाल के लिए मेगा प्लान बनाया। संघ ने इस कार्यक्रम को ’नेताजी को लौह प्रणाम’ नाम दिया। 

सरसंघचालक की मेगा रैली ऐसे समय में हुई। जब पश्चिम बंगाल की सरकार इस साल के आखिर में होने वाले पंचायत चुनावों की तैयारी कर रहा है। वहीं इस रणनीति को लोकसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव को लेकर एक कहावत बहुत ही फेमस है कि पंचायत जिसकी बंगाल उसी का। साल 2018 के पंचायत चुनावों में टीएमसी सबसे बड़ी पार्टी बनीं थी, जबकि बीजेपी दूसरे नंबर पर थी। पंचायत चुनाव के बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। वहीं 2023 के निकाय चुनावों के बाद सत्तारूढ़ टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा और यहीं चुनाव लोकसभा का रास्ता भी तय करेगा।

पश्चिम बंगाल में आरएसएस कैडर की वजह से ही बीजेपी को 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटें मिलीं थी। वहीं 2014 में बंगाल की 42 सीटों में 34 जीतने वाली तृणमूल को 2019 में सिर्फ 22 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। बीजेपी के सामने बंगाल में अपनी 18 सीटों को बचाना बड़ी चुनौती है।

वहीं 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल को हिंसा का भी सामना करना पड़ा। इस हिंसा से जुड़ी कई खबरें ये भी आईं कि कई हिंदू परिवारों को इस हिंसा से नुकसान हुआ। तृणमूल कांग्रेस की हिंसक वारदातों के जवाब में बीजेपी की ओर से कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। जिसके बाद से यहां बीजेपी का कार्यकर्ता घर बैठ गया है। जीते हुए बीजेपी के सात विधायक भी तृणमूल कांग्रेस में चले गए, बीजेपी के एक सांसद भी तृणमूल कांग्रेस में चले गए। ममता बनर्जी बीजेपी कैडर में आई इसी निराशा का फायदा उठाकर लोकसभा चुनाव में अपनी खोई जमीन वापस हासिल करना चाहती हैं लेकिन बीजेपी और संघ अपने कार्यकर्ताओं को एक्टिव करने की कोशिश जुट गई है। लगातार बंगाल के चुनावी मैदान में बीजेपी का खराब प्रदर्शन होने के बाद अब संघ ने पारी संभाली है। इसी को लेकर  20, 21 और 22 जनवरी को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में आरएसएस को बंगाल में विस्तार करने को लेकर चर्चा हुई। वहीं नेताजी की छवि को भुनाने के लिए पश्चिम बंगाल में बीजेपी और आरएसएस एड़ी चोटी का जोर लगाये हुए।

शहीद मीनार में होने वाले संघ के कार्यक्रम में पहली बार आम लोगों को भी न्योता दिया गया है। इस बार संघ नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के जरिए खुद को बंगाल की भावनाओं से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। सुभाष चन्द्र बोस की सेक्यूलर विचारधारा से भी संघ अब खुद को जोड़ रहा है। वहीं बीजेपी लगातार नेताजी पर बात करती रही है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने ही नेताजी के लापता होने के रहस्यों को उजागर करने के लिए मुखर्जी कमीशन का गठन किया था। 2014 में केंद्र में सरकार बनने के बाद पीएम प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर नेताजी से जुड़ीं फाइलों को सार्वजनिक करने की पहल हुई। नेताजी के परिवार के साथ लाल किले पर झंडा फहराकर उन्हें सम्मान दिया गया।

पिछले साल जब पहली बार केंद्र सरकार ने 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती को पराक्रम दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया, तो ममता बनर्जी का रुख बेहद आक्रामक हो गया था। बीजेपी के पराक्रम दिवस के जवाब में उन्होंने नेताजी की जयंती को देश नायक दिवस के रूप में मनाया। कोलकाता में पदयात्रा निकाली और ये तो बता दिया कि वो बोस के नाम पर राजनीति केवल बीजेपी को तो नहीं ही करने देंगी।

वैसे तो बंगाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। बंगाल के लोगों के लिए वो किसी गौरव से कम नहीं हैं। ऐसे में बंगाली गौरव के प्रतीक नेताजी के बहाने पर राजनीतिक दल अपनी नैया पार लगाने की कोशिश की जा रही। 2024 लोकसभा चुनाव को देखते हुए एक बार फिर बीजेपी नेताजी को केंद्र में रखना चाह रही? क्या बीजेपी नेताजी के बहाने लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ टीएमसी को मात देने के लिए बिसात बिछा रही ये तो आने वाला समय ही तय करेगा।

 

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!