Russian President Vladimir Putin के Critics का India में कैसे हुआ ये हाल ।

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अमेरिका में साल 2013 को रूसी मूल के नागरिक
बोरिस बेरेज़ॉस्की की लाश उनके घर के बाथरूम से 
मिलती है। उनके गले में फंदा लगा था। ये हत्या थी
कि आत्महत्या ये गुत्थी अभी भी उलझी है। बोरिस
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबियों में
शामिल थे। बाद वे पुतिन के आलोचक बन गए। लगभग
20 सालों में पुतिन के कई आलोचकों की  रहस्यमयी
मौत हो गई। अभी हाल ही में ओडिशा में रूस के तीन
नागरिकों की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। जिसमें एक
रूस के अरबपति सांसद और पुतिन के आलोचक शामिल है।

27 दिसंबर साल 2022 को खबर आई कि रूस के सबसे अमीर नेताओं में शुमार  पावेल एंतॉव की मौत हो गई है। उनका शव ओडिशा के रायगढ़ के एक होटल के कमरे में मिला। वे कुछ साथियों के साथ छुट्टी मनाने भारत आए थे। पुलिस ने बताया है कि एंतॉव की मौत होटल के तीसरे फ़्लोर से गिरने से हुई। दो दिन पहले एंतॉव की उन्हीं के ही पार्टी के एक और सदस्य व्लादिमीर बुडानोव की भी संदिग्ध रूप से मौत हुई थी। पावेल एंतॉव ने यूक्रेन में रूस के 'विशेष सैन्य अभियान' की आलोचना की थी। हालांकि रूसी दूतावास के अधिकारी ने कहा कि ओडिशा पुलिस को इन मौतों के पीछे कोई आपराधिक लिंक नहीं मिला।

तेल कंपनी लुकोइल के निदेशक मंडल के अध्यक्ष रहे राविल मैगनॉव ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की खुले तौर पर आलोचना की थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ सितंबर 2022 में मॉस्को के एक अस्पताल की खिड़की से गिरकर उनकी मौत हो गई।

वहीं अगस्त 2022 को बिज़नेसमैन डैन रैपोपोर्ट को वॉशिंगटन में एक अपार्टमेंट के सामने मृत पाया गया। डैन ने भी कई बार रूस-यूक्रेन युद्ध की निंदा की और यूक्रेन का समर्थन किया।

रूसी राजनेता डेनिस निकोलाइविच वोरॉनेंकॉव, जो रूस की संसद के सदस्य रहे। 2016 के चुनाव में वो अपनी सीट हार हारने के बाद अपनी रूसी नागरिकता छोड़ कर पत्नी के साथ यूक्रेन चले गए। वहां वे पुतिन और उनकी विदेश नीति के मुखर आलोचक बन गए। मार्च, 2017 को डेनिस की गोली मारकर हत्या कर दी।

नवंबर 2015 में रूसी प्रेस मंत्री मिख़ाइल लेसिन वॉशिंगटन के एक होटल के कमरे में मृत पाए गए। लेसिन ने टेलीविज़न नेटवर्क 'रूस टुडे' की स्थापना की। कहा जाता है कि वे ताकतवर लोगों और पावर सर्किल के अंदरुनी बातों के बारे में बहुत कुछ जानते थे।

फरवरी 2015 में बोरिस नेमत्सॉव की हत्या कर दी गई। वे 1990 के दशक में युवा तुर्कों में गिने जाते थे। उप प्रधानमंत्री बने और बहुत समय के लिए उन्हें ही संभावित राष्ट्रपति के रूप में देखा गया। लेकिन साल 2000 में पुतिन के राष्ट्रपति बनने पर नेमत्सॉव ने सार्वजनिक रूप से 'जनादेश' का समर्थन किया, लेकिन धीरे-धीरे पुतिन की नीतियों के आलोचक बन गए।

मार्केलोव एक मानवाधिकार वकील थी, उन्होंने उन पत्रकारों का प्रतिनिधित्व किया, जिन्होंने पुतिन की आलोचनात्मक लेख लिखने के बाद खुद को कानूनी मुसीबत में डाल दिया। जिनकी 2006 में हत्या कर दी गई थी।

एना पोलितकोवस्काया एक रूसी रिपोर्टर थीं. उन्होंने "पुतिन का रूस" नाम की किताब लिखी थी. उन्हें उन ही के बिल्डिंग के एक एलिवेटर में साल 2006 में गोली मार दी गई ।

ये लिस्ट और बड़ी है।

पुतिन के चाहने वालों की संख्या बहुत है लेकिन उनको या उनकी नीतियों को न चाहने वालों की संख्या भी कम नहीं है। खासकर तब जब रूस-यूक्रेन का युद्ध चल रहा है जिसका असर कई देशों में भी हो रहा है।

ओडिशा के रायगढ़ में पावेल एंतोव की रहस्यमयी मौत ये पहली घटना नहीं है। इन के साथ दो और रूसी नागरिकों की मौत हो गई। ये तीनों रूसी पर्यटकों के चार सदस्यीय समूह का हिस्सा थे।

पावेल की मौत पर पुलिस ने कहा कि ये आत्महत्या का मामला लग रहा है। पावेल अपने दोस्त की मौत से डिप्रेशन में थे। उनकी मौत कई सवाल खड़े करती है। उनका शव फस्ट फ्लोर के कमरे मिला। जबकि पावेल का कमरा थर्ड फ्लोर में था। उपर से गिरने पर शरीर पर खरोंच के निशान न होना शक पैदा करता है। एक न्यूज पेपर में छपी खबर के मुताबिक उनके दोस्त के शव का विसरा लिया गया विडियो बना, फिर पावेल का क्यों नहीं। उनके दूतावास से कोई जानकारी नहीं दी गई। उनके बेटी के आने से पहले ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। वे 1151 करोड़ों रुपये के मालिक थे केवल 2500 रुपये के किराये के इतने सस्ते होटल में क्यों रुके। वहीं हत्या की साजिश और गहराती है जब पुलिस की घटना की जानकारी 24 घंटे बाद देती है। रूसी नागरिकों की मौत के अभी कई सवाल हैं जो इनसुलझे है।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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