सड़कों पर क्यों Protest कर रहे हैं Jain Community के लोग?

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जैन समाज इन दिनों सड़कों पर उतरा हुआ है। वे दिल्लीमहाराष्ट्रयूपी के साथ देश कई हिस्सों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। आमरण अनशन कर रहे जैन मुनि सुज्ञेयसागर महाराज ने जयपुर में प्राण त्याग दिए हैं। क्योंकि बात धर्म की शुचिता बनाए रखने की है। मंदिर-मस्जिद या कहें हिन्दू-मुस्लिम का हल्ला बहुत सुना होगा। लेकिनपहली बार अहिंसा जैसे महाव्रत का पालन करने वाले जैन समाज ने मोर्चा खोल दिया है।

झारखंड के गिरिडीह जिले के मधुबन में 'श्री सम्मेद शिखर' है। इसे पारसनाथ पर्वत भी कहा जाता है। जैन धर्म के मुताबिक इस पूजनीय स्थल में 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष को प्राप्त किया था। जैन धर्म की मान्यता है कि यहां एक बार तीर्थ यात्रा करने पर मनुष्य को मरने के बाद मोक्ष मिल जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकविवाद करीब नौ किलोमीटर फैले 'श्री सम्मेद शिखर' को पर्यटन स्थल के तौर पर घोषित करने का है। जैन समाज के लोगों का कहना है कि अगर ये स्थल पर्यटन क्षेत्र घोषित हो गया तो लोग यहां आस्था के लिए नहीं बल्कि पिकनिक मनाने आएंगे। मांस-मछली खाएंगेशराब पीएंगे। इन सब चीजों से तीर्थ स्थल की पवित्रता भंग होगी। 

दरअसल2019 में केंद्र सरकार ने 'श्री सम्मेद शिखर' को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया था। तब झारखंड में बीजेपी की सरकार थी और सीएम थे रघुवर दास। उसी समय झारखंड की सरकार ने एक संकल्प जारी कर इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल घोषित कर दिया। गिरिडीह जिला प्रशासन ने नागरिक सुविधाएं डेवलप करने के लिए 250 पन्नों का मास्टर प्लान भी बनाया। जिसमें होटल, पार्क, दुकानें बनाकर इस जगह को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

लेकिनइसी के बाद विवाद शुरू हुआ जैन समुदाए का आरोप है कि एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक युवक इसी क्षेत्र में शराब पीते दिख रहा है । पूरे परिसर में मांस-मदिरा का सेवन और बिक्री प्रतिबंधित है। वीडियो के बाद जैन समाज चौकन्ना हो गयाक्योंकि इस क्षेत्र के पर्यटन स्थल बन जाने से इस तरह की गतिविधियां बढ़ जाएंगी। और वनों की कटाई से पर्यावरण को भी नुकसान होगा।

 

उधर, गुजरात के भावनगर जिले में पालीताणा की पवित्र शत्रुंजय पहाड़ियों पर बने जैन मंदिर में असामाजिक तत्व तोड़फोड़ कर रहे हैं। मंदिर के आसपास अवैध खनन हो रहा है जमीन पर कब्जा करके शराब के अड्डे बनाए जा रहे है।

इन दोनों मामलों को लेकर जैन समुदाय देशभर में प्रदर्शन कर रहा है। ये प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। मुंबईअहमदाबाद और दिल्ली में जैन समुदाय के सैकड़ों लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं जिसमें महिलाएंबच्चेबूढ़े सभी शामिल हैं।

मामले में 'श्री सम्मेद शिखर' में विराजित मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने कहा कि ‘श्री सम्मेद शिखर इको टूरिज्म नहींइको तीर्थ होना चाहिए। सरकार पूरी परिक्रमा के क्षेत्र और इसके 5 किलोमीटर के दायरे के क्षेत्र को पवित्र स्थल घोषित करेंताकि उसकी पवित्रता बनी रहे। पर्यटन स्थल बनने से यहां मांस-मदिरा बिकने लगेगाये जैन समाज की भावना के खिलाफ है।’

वहीं इसको लेकर राजनीति भी शुरू हो गई। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने हेमंत सरकार पर आरोप लगाने की कोशिशों का कड़ा विरोध किया है।

वहीं झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन का कहना है कि 'इस मामले को लेकर साल 2019 में केंद्र सरकार द्वारा गजट प्रकाशित हुआ है। हमने न तो कोई टीका-टिप्पणी की है और कोई निर्णय नहीं लिया है। ये किस संदर्भ में हैइसकी जानकारी लेनी होगी। सभी समाज और धर्मों का सम्मान है। अभी तक क्या कार्रवाई हुई हैउसे देखने के बाद ही सरकार निर्णय करेगी।'

झारखंड के पर्यटन सचिव मनोज कुमार ने कहा ‘इसके एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव बन रहा है। इस स्थल को पर्यटन स्थल के बजाए धार्मिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया जाएगा। ऐसा करने से व्यवस्थाएं बेहतर होंगी। कोशिश होगी कि यहां जो भी आए वो जैन धर्म के बेसिक प्रिंसिपल का पालन करें।

वहीं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने समन किया है और वो 17 जनवरी को सुनवाई करेगा।

साल 2011 के जनगणना के मुताबिक जैन समाज के लोगों की जनसंख्या पूरे देश में करीब 43 लाख है। अगर राज्य की बात करें तो जैन समाज के लोग महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा और दिल्ली में सबसे कम रहते है। इनकी साक्षरता दर भी सबसे ज्यादा 94.1 फीसदी है। उनको  देश में बेहद समृद्ध समुदाय माना जाता है।

जैन धर्म के सिद्धांतों से ये समझा जा सकता है कि जैनियों के लिए शुचिता ही सर्वोपरि है। उनकी शुचिता तभी बनी रह सकती है। जब उनके आसपास के उन्हीं के वातावरण में विचार वाले वाले लोग हो।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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