बॉलीवुड की महान अदाकारा सायरा बानो की चमकती जीवनी

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प्रसिद्ध अदाकारा सायरा बानो की 27 साल की महान फिल्मी यात्रा: रील और रियल जीवन के उतार-चढ़ाव, मां का संकल्प, बड़े पति की कहानी | Manchh न्यूज़ पर नवीनतम जानकारी प्राप्त करें

‘मेरे सामने वाली खिड़की में एक चांद का टुकड़ा रहता है’। ये गाना है साल 1968 की फिल्म ‘पड़ोसन’ का। इसमें चांद का टुकड़ा जिनके लिए कहा गया वो बेहद खूबसूरत के साथ एक दमदार एक्ट्रेस थीं। 27 साल के करियर में एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में की, लोगों को अपना दिवाना बनाया। इनकी रील की जिंदगी तो शानदार है। लेकिन रियल जिंदगी में बेहद उतार-चढ़ाव। ये वो एक्ट्रेस थीं जिनके पिता बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए। इनकी मां जो एक फेमस एक्ट्रेस थीं उन्हीं ने अपनी चांद सी बेटी को तराशा।

आज कहानी अपने दौर की दिग्गज एक्ट्रेस सायरा बानो की जिनकी शादी 22 साल बड़े एक सुपरस्टार से करा दी गई और यही सुपरस्टार पति उन्हें कुछ वक्त के लिए छोड़ गया। क्योंकि वो मां नहीं बन सकती थीं। पर इन्होंने जिंदगी के आखिरी वक्त तक अपने पति का हाथ नहीं छोड़ा।

साल 1935 की फिल्म ‘खून का खून’ से डेब्यू करने वालीं अपने दौर की दिग्गज एक्ट्रेस नसीम बानो ने बचपन के दोस्त मियां एहसान-उल हक से शादी की। दोनों ने ‘ताज महल पिक्चर्स’ के बैनर तले कई फिल्में बनाई। सब कुछ ठीक था, पर पति से बिछड़ना पड़ा। वजह बना बंटवारा। साल 1947 के बंटवारे के बाद एहसान उल हक पाकिस्तान चले गए। लेकिननसीम बानो अपने दो बच्चों के साथ भारत में रुकीं।

उन्होंने बेटे सुल्तान और 23 अगस्तसाल 1944 को जन्मी बेटी सायरा बानो को पढ़ने के लिए लंदन भेजा। स्कूल के दिनों से ही सायरा बानो को फिल्मों का शौक था। उन्होंने लंदन में ही पहली बार साल 1952 की फिल्म 'आनदेखी जिसके बाद वो दिलीप कुमार की फैन हो गईं, और एक एक्ट्रेस बनने का ख्वाब लिए साल 1960 में भारत लौटीं।

सायरा बानो की मां नसीम बानो ने इस वक्त तक फिल्मों से रिटायरमेंट ले लिया। दरअसल नसीम नहीं चाहती थीं कि उनकी बेटी सायरा और उनके बीच खूबसूरती और एक्टिंग को लेकर कोई तुलना हो। इसलिए बेटी सायरा को आगे बढ़ाने का फैसला लिया। नसीम ने बेटी सायरा बानो की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम किया। वो सायरा बानो के लिए कपड़ेगहने डिजाइन करतीं। 

सायरा बानो ने कथक और भरतनाट्यम की ट्रैनिंग ली और साल 1961 में फिल्म ‘जंगली’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। फिल्म सुपरहिट हुई। सायरा को फिल्म फेयर में बेस्ट एक्ट्रेस का नॉमिनेशन मिला।

देखते ही देखते वो टॉप की एक्ट्रेस में शुमार हो गईं। यूं तो सायरा बानो ने अपने वक्त के सभी एक्टर के साथ काम किया। लेकिन सबसे ज्यादा फिल्में राजेंद्र कुमार के साथ कीं। दोनों की 'आई मिलन की बेला', 'झुक गया आसमानऔर 'अमनजैसी फिल्में सुपरहिट हुईं तो इन दोनों के प्यार के किस्से भी मीडिया में आने लगे।

ये बातें नसीम बानो को परेशान करने लगी। इसके पीछे वजह थी कि राजेंद्र कुमार तीन बच्चों वाले एक शादीशुदा व्यक्ति थे और उनका मज़हब भी अलग था।

नसीम बानो ने अपने दोस्त यूसुफ यानी दिलीप कुमार से मदद मांगी। वो नसीम के घर आए तो उनकी मुलाकात सायरा बानो से भी हुई। पहली ही नजर में दिलीप कुमार सायरा बानो को दिल दे बैठे थे। 11 अक्टूबर साल 1966 को 22 साल की सायरा बानो ने 44 साल के दिलीप कुमार से शादी की। दोनों की उम्र में 22 साल का फासला था।

लेकिन 16 साल बाद इस रिश्ते में दरार आईं। दिलीप कुमार सायरा बानो को छोड़कर हैदराबाद की आसमां नाम की शादीशुदा महिला के साथ रहने लगे। ऐसा कहा जाता है उन्होंने आसमां से निकाह भी कर लिया। इसके पीछे वजह थी कि सायरा बानो मां नहीं बन सकती थीं।

 दिलीप कुमार अपनी किताब 'द सब्सटेंस एंड द शैडोमें लिखते हैं कि ‘साल 1972 में सायरा प्रेग्नेंट हुई थीं। लेकिन सायरा को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हुई। उसी दौरान हमने अपना बच्चा खो दिया। इसके बाद सायरा कभी मां नहीं बन सकीं।’

सुनने वाले सभी हैरान थे। ये वक्त सायरा बानो के लिए बढ़ा ही मुश्किल भरा था। पर कहते है कि प्यार अगर सच्चा न हो तो, उसकी परतें खुल ही जाती है। दिलीप कुमार को समझ में आया कि आसमां उनको धोखा दे रही है। उन्हें सच्चे प्यार की अहमियत पता चली और साल 1983 में दिलीप कुमार सायरा बानो की जिंदगी में लौट आए। सायरा बानो ने भी दिलीप कुमार को माफ कर दिया।

दिलीप कुमार जिंदगी आखिरी 10 साल बेहद बीमार रहे। आए दिन अस्पताल जाना पड़ता। इस दौरान सायरा बानो मजबूत पिलर की तरह उनके साथ खड़ी रहतीं। दोनों का साथ 54 साल का रहा। साल 2021 में दिलीप कुमार का निधन हो गया।

वहीं सायरा बानो ने आखिरी बार साल 1988 की फिल्म फैसला में काम किया। आज 79 साल की उम्र में सायरा बानो अपने साहेब यानी दिलीप कुमार के जाने के बाद उनकी यादों के सहारे मुंबई में रह रहीं हैं।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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