शिवराज चौहान ने आदिवासी पीड़ित के छुए पैर, सुदामा कहते हुए साथ खाया खाना

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राजनीति जो न कराए वो कम है. बेशर्मी की सारी हदें पार करने वाले एमपी के शुक्ला जी का मामला ठंडा करने के लिए अब सियासी ड्रामा चालू है. आने वाले चुनाव में आदिवासियों के वोट की चिंता को देखते हुए बीजेपी  की शिवराज सरकार इसे डैमेज कंट्रोल करने में लगी है. जिसके चलते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित आदिवासी से मुलाकात की साथ ही घटना के लिए माफी मांगी. पीड़ित के पैर धोए और उसकी आरती की. शॉल ओढ़ाकर सम्मान भी किया.


सोचिए सियासत क्या कुछ करा देती है. जब पेशाब कांड हुआ तो विपक्ष ने कार्रवाई की मांग उठाई. अब भला बीजेपी को भी चिंता हुई कहीं वोट बैंक न खिसक जाए तो कार्रवाई भी हुई. आरोपी पर NSA तो लगाया ही गया साथ ही बुलडोजर भी घर पर चलाया गया.
आदिवासी वोटबैंक की चिंता बीजेपी को कितनी है उसके लिए ये वीडियो और मुख्यमंत्री की कही बातें काफी है. जिसमें वो कह रहे है किसी का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मेरे लिए जनता ही भगवान है.


डैमेज कंट्रोल के लिए सियासी ड्रामा तो हर दलों में होता है. लेकिन एमपी के सीधी में हुए कांड ने सबको चौंका जरूर दिया क्योंकि कुछ दिन पहले ही एमपी से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरा बूथ सबसे मजबूत अभियान शुरू किया था. जिसमें उन्होंने कहा थाकार्यकर्ता हैं बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत. 


बीजेपी की ताकत और सत्ता का नशा कैसे कार्यकर्ताओं के सिर पर चढ़कर बोलता है उसके लिए ये वीडियो काफी है जिसमें एक बीजेपी नेता अपनी सत्ता का नशा एक आदिवासी के चेहरे पर पेशाब करके उतार रहा है. मदमस्त प्रवेश शुक्ला अपने संस्कारों का परिचय खुद दे रहा है. सिगरेट का कश लगा रहा है और बड़ी बेफिक्री के साथ एक आदिवासी के चेहरे पर पेशाब कर रहा है. इससे बड़ी अमानवीय तस्वीर और क्या होगी कि आजादी के 75 साल बाद भी सत्ता की गोद में बैठे नेता सबकुछ भूल जाते है. एमपी के सीधी में आदिवासी युवक पर पेशाब करने वाला प्रवेश शुक्ला बीजेपी के विधायक केदारनाथ शुक्ला का प्रतिनिधि है. हालांकि अब उसे 'पूर्व' घोषित कर दिया गया है. ताकि बीजेपी पर दाग न लगे और छींटे कम पड़ें. बीजेपी अपनी इमेज चमकाने के लिए तो काफी कुछ करती है लेकिन ऐसे शैतानों के लिए क्या रणनीति आगे के लिए बनाती है ये देखना होगा. क्योंकि आने वाले कुछ समय में चुनाव है और इन मुद्दों का असर चुनाव का गणित बिगाड़ सकता है. 

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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