कहानी माफिया डॉन अतीक अहमद के भाई खालिद अज़ीम उर्फ अशरफ की

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जमीनकब्जा, हत्या, अपहरण, रंगदारी और फिरौती जैसे संगीन जुर्म को परिभाषित करते दो चेहरे अतीक और अशरफ यूपी की राजनीति में वो नाम हैं, जिनकी कहानी किसी क्राइम मूवी से कम नहीं हैं। इस जुर्म की कहानी में अतीक मेन किरदार है और साइड रोल में नाम आता है अतीक के भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ का. जिसने अतीक के ही नक्शे कदम पर चलकर जुर्म और फिर राजनीति की दुनिया में खुदी को बुलंद किया। और अहमद परिवार के ज्यादातर गुनाहों की पटकथा भी लिखी।  लेकिन हर कहानी की तरह वो दौर भी आया जब दोनों भाईयों के किए जुल्मों का हिसाब होना शुरू हुआ। और एक-एक करके हर गुनाह की सजा मिलने का दौर शुरू हुआ। आज किस्सा अतीक के भाई अशरफ अहमद का. जिसके बारे में हाल ही में सुनवाई के दौरान जमानत खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि "अशरफ खतरनाक है."

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश कुमार सिंह ने मरियाडीह गांव में सुरजीत और अलकमा के दोहरे हत्याकांड के मामले में अतीक के भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ की जमानत खारिज करते हुए कहा कि वो न सिर्फ माफिया डॉन अतीक अहमद का भाई है बल्कि खुद भी एक खतरनाक गैंगेस्टर है। उसकी आजादी गवाहों और कानून पसंद जनता की स्वतंत्रता और संपत्ति को खतरे में डाल देगी। इस वारदात की बात करें तो, साल था 2015 और तारीख 25 सितंबर... रात के करीब साढ़े आठ बजे थे। धूमनगंज इलाके के मरियाडीह गांव में आबिद प्रधान के ड्राइवर सुरजीत और अलकमा को गांव के पास ही गोलियों से छलनी कर दिया गया था। उस वक्त दोनों कार से गांव की ओर ही जा रहे थे। शुरूआत में इस मामले में कई लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में विवेचना में पता चला कि जो लोग नामजद कराए गए हैं, उन्होंने हत्याकांड को अंजाम नहीं दिया। बल्कि इस हत्याकांड के पीछे अतीक अहमद, उसका भाई अशरफ और गैंग का हाथ है। इसी को आधार बनाकर अतीक और अशरफ के साथ 13 लोगों के नाम जोड़ते हुए इस दोहरे हत्याकांड की चार्जशीट दाखिल की गई। अशरफ इस मामले में लंबे वक्त तक फरार रहा... कुर्की और एक लाख का ईनाम घोषित हुआ। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, अशरफ के खिलाफ हत्या, अपहरण, फिरौती और रंगदारी जैसे गंभीर अपराधों में प्रयागराज रायबरेली और चंदौली में करीब 45 मुकदमें दर्ज हैं। साल 1992 में अशरफ पर पहला क्रिमिनल केस दर्ज हुआ और उसने जुर्म की दुनिया में अपना पहला कदम रखा। और फिर साल 2004 के आम चुनाव में फूलपुर से सपा के टिकट पर अतीक अहमद के लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बन दिल्ली पहुंचने के बाद इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट खाली हो गई। इस सीट पर हुए उपचुनाव में सपा ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को टिकट दिया था। ये वही चुनाव था जिसमें बसपा ने उसके सामने राजू पाल को खड़ा किया। उस उपचुनाव में बसपा प्रत्याशी राजू पाल ने अतीक अहमद के भाई अशरफ को हरा दिया था। इस हार को अशरद ही नहीं बल्कि अतीक भी पचा नहीं पाया। जिसका नतीजा ये हुआ कि पहली बार विधायक बने राजू पाल की कुछ महीने बाद ही 25 जनवरी, 2005 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में देवी पाल और संदीप यादव की भी मौत हुई थी। दो और भी लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस हत्याकांड में सीधे तौर पर सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ का कनेक्शन सामने आया था। फिलहाल अशरफ बरेली जेल में बंद है।  अशरफ 11 जुलाई, 2020 को नैनी जेल से बरेली जेल ट्रांसफर हुआ था, जबकि अतीक भी करीब साढ़े तीन माह तक बरेली जेल में बंद रहा था।  


हाल ही में हुए उमेश पाल हत्याकांड का मेन मास्टरमाइंड भी अशरफ को ही बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टस की मानें तो, अतीक अहमद ने बरेली जेल में बंद भाई अशरफ को उमेश पाल की हत्या की जिम्मेदारी सौंपी थी। इतना ही नहीं तीन बार नाकाम होने के बाद चौथी बार के प्रयास में उमेश पाल को मौत के घाट उतारा गया। हालांकि जानकारों का कहना है कि अब अशरफ के जुर्म की कहानी अंतिम पड़ाव की ओर है। पुलिस लगातार अपना शिकंजा कसती जा रही है। आगे और क्या कुछ होगा ये तो वक्त ही बताएगा।

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