ऐसा क्रिकेटर जो यूरोपीय देश अल्बानिया का राजा बनते-बनते रह गया, राजा रणजीत सिंह से है खास कनेक्शन

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यूं तो क्रिकेटर्स का पॉलिटिक्स में कदम रखना कोई नई बात नहीं है। इंडिया समेत कई देशों में बड़े-बड़े स्टार्स ने इसे पेशे के रूप में चुना है। मोहम्मद अजहरुद्दीन, नवजोत सिंह सिंद्धू, चेतन चौहान, गौतम गंभीर समेत कई नाम हैं। गौतम गंभीर तो मौजूदा समय में पूर्वी दिल्ली से सांसद और IPL में लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटॉर भी हैं। इसके अलावा पाकिस्तान को 1992 का वनडे वर्ल्ड कप जीताने में अहम भूमिका निभाने वाले इमरान खान ने नई पार्टी बनाई और देश के प्रधानमंत्री भी रहे। इन सबसे बिल्कुल अलग एक क्रिकेटर ऐसा भी था जिसे यूरोपीय देश अल्बानिया ने राजा बनने का ऑफर दिया था। लेकिन एक शर्त की वजह से ये खिलाड़ी राजा बनते-बनते रह गया। कौन था वो खिलाड़ी और क्या थी शर्त...ये भी आपको बता देते हैं।

फस्ट क्लॉस क्रिकेट में जड़ी 94 सेंचुरी

25 अप्रैल साल 1872 को इंग्लैंड में जन्मे क्रिकेटर चार्ल्स बर्गेस फ्राई, जिन्हें सीबी फ्राई के नाम से भी जाना जाता है। सीबी फ्राई की गिनती आज भी इंग्लैंड के महान खिलाड़ियों में होती है। इंग्लैंड के लिए 26 टेस्ट मैच में फ्राई ने भले ही सिर्फ 1223 रन बनाए हों। लेकिन फस्ट क्लॉस क्रिकेट में उनके नाम 94 सेंचुरी दर्ज हैं, जो उनक टैलेंट की कहानी कहते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी एक खेल पर पूरी तरह से ध्यान नहीं देने के चलते ही फ्राई की क्रिकेट प्रतिभा को असली उभार नहीं मिल पाया।

दरअसल क्रिकेट के साथ-साथ फ्राई फुटबॉल भी खेलते थे और इतना अच्छा खेलते थे कि उन्होंने साउथैम्पटन क्लब की तरफ से एफए कप का फाइनल खेला था। इतना ही नहीं वो जबरदस्त एथलीट भी थे, उन्होंने लॉन्ग जंप के वर्ल्ड रिकॉर्ड की भी बराबरी की थी।

फ्राई की जिंदगी में इंडिया को भी बड़ा रोल था। राजा रणजीत सिंह जी जिनके नाम से आज भी इंडिया में रणजी ट्रॉफी खेली जाती है वो फ्राई के जिगरी दोस्त हुआ करते थे। सीबी फ्राई और रणजीत सिंह जी की दोस्‍ती के किस्‍से उस जमाने में इंग्‍लैंड में काफी मशहूर थे। कहा जाता है कि रणजीत सिंह जी की मेहरबानी की वजह से फ्राई को यूरोपीय देश अल्‍बानिया का राजा बनने का मौका मिला था।

दरअसल हुआ कुछ ऐसा था कि सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद यूनाइटेड नेशन का गठन हुआ। इसमें राजा रणजीत सिंह समेत 3 राजाओं ने हिस्सा लिया था और उसमें सीबी फ्राई को वो अपना स्पीच राइटर के तौर पर ले गए थे।

फ्राई ने ऑटोबायोग्राफी में बताया

फ्राई के ऑटोबायोग्राफी के मुताबिक, यूरोपीय देश अल्बानिया का शाही परिवार अपने जर्मन संबंधों के चलते उस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकता था। जिसके लिए अल्बानिया ने अपने राजा के तौर पर उन्हें यूएन में प्रतिनिधित्‍व करने का ऑफर दिया था। उनका ये नाम अल्बानिया की रॉयल फैमिली को रणजीत सिंह ने ही सुझाया था। उन्‍होंने आगे बताया कि रॉयल फैमिली ऐसे व्‍यक्ति को अपना राजा बनाना चाहती थी जो सालाना ढ़ेर सारे पैसे कमाए। उस जमाने में उनके लिए उतने पैसे कमाना आसान नहीं था। जिसके चलते उन्होंने अल्‍बानिया का प्रस्‍ताव ठुकरा दिया।

 

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