Sunday Holiday : आखिर संडे को ही क्यों होती है छुट्टी ?

Home   >   मंचनामा   >   Sunday Holiday : आखिर संडे को ही क्यों होती है छुट्टी ?

92
views

संडे का दिन यानी छुट्टी का दिन। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस हर जगह संडे को छुट्टी होती है। मौजूदा वक्त में कई जगह कंपनियों में सैटरडे और संडे दो दिनों की छुट्टी होती है। और इसी बीच ऐसी कंपनियों की भी कमी नहीं है जो वीक में सिर्फ 4 दिन काम की बात कर रही हैं यानी 3 दिन छुट्टी मिलेगी। लेकिन एक दौर वो भी था। जब लोगों को सातों दिन काम करना पड़ता था। मतलब छुट्टी होती ही नहीं थी। रोज काम।

आखिर, जब वीक में एक दिन छुट्टी देने की बात हुई होगी तो संडे ही दिन क्यों चुना गया। संडे की छुट्टी की शुरुआत कब से हुई। इसके पीछे की कहानी क्या है। संडे के दिन को लेकर कई धार्मिक महत्व भी बताए जाते है। एस्ट्रोलॉजी के भी अपने तर्क हैं कि, संडे के दिन छुट्टी होने के क्या फायदे हैं।

ये वो दौर था जब भारत में अंग्रेजों का शासन था। मिल के मजदूरों को सातों दिन काम करना पड़ता था। इस वजह से उनकी हेल्थ में बुरा असर पड़ता। कई जगह तो मजदूरों को खाना खाने तक का वक्त भी नहीं दिया जाता। फिर उनकी आवाज बने मेघाजी लोखंडे। जिन्होंने ट्रेड यूनियन आंदोलन की शुरुआत की। मेघाजी लोखंडे ने मजदूरों के हितों के लिए लड़ाई लड़ी। मांग थी, हफ्ते में एक दिन मजदूरों को छुट्टी मिलनी चाहिए। ताकि, वो अपनी थकान मिटा सकें। अपने लिए वक्त निकाल सकें। लेकिन अंग्रेजों ने छुट्टी देने से इंकार कर दिया। फिर  कई सालों का लंबा आंदोलन चला। माना जाता है कि, उनकी कोशिश के चलते साल 1890 में अंग्रेजों ने संडे की छुट्टी की घोषणा कर दी।

अब सवाल उठता है कि आखिर छुट्टी के लिए संडे को ही क्यों चुना गया।

दरअसल, जिस दिन ईसा मसीह ने अपना शरीर छोड़ा था। उस दिन को लोग गुड फ्राइडे कहते हैं और संडे के दिन उन्हें जीवित देखा गया। इस घटना को ईस्टर संडे के रूप में मनाया जाता है। तभी से संडे के दिन चर्च में प्रार्थना होती है। अब संडे को अंग्रेज चर्च जाते थे तो ऐसे में जब वीक में एक दिन छुट्टी देने की बात आई तो अंग्रेजों ने संडे के दिन को सबकी छुट्टी करने का फैसला किया।

इसको लेकर एक और मत है। ईसाई धर्म के मुताबिक ईश्वर ने दुनिया को छह दिन में बनाया और संडे को आराम किया। यही कारण था कि अंग्रेजों ने जहां-जहां पर राज किया उन देशों में संडे को छुट्टी होती है।

गुलामी से आजाद होने के बाद किसी भी देश ने इसे बदलने का प्रयास नहीं किया।

असल में संडे को छुट्टी देने की घोषणा ब्रिटेन में हुई। साल था 1843। ब्रिटेन में सबसे पहले स्कूली बच्चों को संडे की छुट्टी देने का प्रस्ताव दिया गया। इसके पीछे वजह थी कि बच्चे घर पर रहकर कुछ क्रिएटिव काम करें।

ऐसा भी मत हैं जब भारत में मुगल थे तो वे फ्राइडे को काम नहीं करते थे। इस्लाम में फ्राइडे यानी जुम्मे का दिन नमाज के लिए होता है।

ISO यानी International Organization for Standardization के मुताबिक संडे का दिन वीक का लास्ट दिन होता है और इसी दिन छुट्टी रहती है। इसको साल 1986 में मान्यता मिली।

वहीं हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक, संडे वीक का पहला दिन होता है लास्ट दिन नहीं। ये सूर्य देवता और भगवान विष्णु का वार है। इस दिन सभी देवी और देवताओं की पूजा का प्रावधान है। इसलिए संडे का महत्व है।

वहीं एस्ट्रोलॉजी के मुताबिक, संडे को सूरज अपनी सबसे ज्यादा ऊर्जा लिए होता है। सूरज प्रकाश का सबसे बड़ा स्रोत है और प्रकाश को सनातन धर्म में पॉजिटिव माना गया है। इस प्रकाश में सभी तरह के रोग और शोक को मिटाने की क्षमता होती है। रोज सुबह सूरज के सामने कुछ देर खड़े रहने से सभी तरह के पोषक तत्व और विटामिन मिलते हैं।

लेकिन कई देश ऐसे भी हैं जहां पर संडे को छुट्टी नहीं होती है। ये इस्लामिक देश हैं, क्योंकि वो फ्राइडे को नमाज अदा करते हैं। ऐसे में वो फ्राइडे को छुट्टी करते हैं।

लगातार काम करने के बाद छुट्टी लेने से काम में प्रोडक्टिविटी बढ़ती होती है और वर्क लाइफ बैलेंस भी रहता है। तनाव और चिंता का स्तर भी कम होता है। इसलिए वीक ऑफ मिले तो उसे इंजॉय करिए।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!