स्वदेशी फाइटर जेट में अमेरिकी इंजन लगाने को लेकर जल्द समझौते की उम्मीद

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इंडिया के इंडीजिनस फाइटर जेट प्रोग्राम की उलझनों का हल मिल गया है। आने वाले दो दशकों में जब भारत अपनी एयरफोर्स और नेवी के लिए 350 के करीब फाइटर जेट बनाएगा। तब उनमें कौन से जेट इंजनों का इस्तेमाल होगा  

दरअसल 80 के दशक में जब भारत ने अपने पहले फाइटर जेट प्रोग्राम को शुरू किया था तब भी उसके सामने सबसे बड़ा सवाल यही था]लेकिन अब जब भारत तेजस के नए वर्जन और भारत के पहले 5वीं पीढी के फाइटर जेट का निर्माण शुरू कर रहा है ऐसे में उसे पता है कि इन्हें ताकत देने के लिए कौन सा जेट इंजन लगाना होगा। अमेरिका की मदद से भारत देश में ही विश्व के सबसे पाॅवरफुल माने जाने वाले जेट इंजन का निर्माण करेगा। 22 जून को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका जाएंगे। तब इस डील पर मुहर लग सकती है। इन जेट इंजनों को भारत एक नहीं बल्कि अपने 3 अलग अलग फाइटर जेट में यूज करेगा। क्या हैं इन इंजनों में खास और क्यों भारत इन फाइटर जेट इंजनों को खरीद रहा है]आइये इन सवालों के जवाब जानते हैं

 

 

 

भारत और अमेरिका जल्द ही जीई के फाइटर जेट इंजन की खरीद के लिए डील साइन कर सकते हैं। अमेरिकी कंपनी जीई एविएशन के बनाएं जीई-एफ414-400 इंजनों का निर्माण भारत में ही टेक्नोलाॅजी ट्रांसफर के जरिए होगा। जीई एविएशन और एचएएल के बीच डील पर इसी महीने अमेरिका में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान मुहर लग सकती है। इंडिया पहले से ही जीई एविएशन के जीई-एफ404 इंजन का इस्तेमाल तेजस मार्क-1 फाइटर जेट में कर रहा है] लेकिन नया इंजन और भी ज्यादा पाॅवरफुल है। आईये अब जानते हैं कि इस जेट इंजन में क्या खास है और भारत इन्हें आखिर क्यों खरीद रहा है।

 

जीई-एफ&414&400 इंजन

मैक्सिमम पाॅवर& 22]000 पाउंड या 97Kn

 थ्रस्ट 2 वेट रेशियो- 9:1

 

एडवांस कंट्रोल सिस्टम

डिजिटल इंजन कंट्रोल

एडवांस इंजन एनालिटिक्स कैपेबिलिटी

 

 

इन जेट विमानों में पहले से ही हो रहा इस्तेमाल

एफ-18 सुपर हार्नेट

बोइंग-ई-18 जी ग्रोलर

साब ग्रिपन एनजी

साउथ कोरियन केएआई-केएफ-21

नासा-एक्स-59

 

भारत ने अपने फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए जीई के ही इंजन को क्यों चुना ये भी जान लें

 

1600 से ज्यादा ऐसे इंजन बनें

18 मिलियन इंजन  फ्लाइट  आवर्स

लाइफ साइकल में कम काॅस्ट मेंटेनेंस

8 देश अपने फाइटर जेट में इस इंजन का इस्तेमाल कर रहे

 

 

भारत के लिए ये इंजन इतना अहम क्यों?

 

दरअसल भारत सरकार बीते कई दशकों से हथियारों के लिए रशिया पर निर्भर रहा है। टैंक से लेकर सबमरीन और पफाइटर जेट खरीदने में भारत की हमेशा रशिया ने ही मदद की और आज भी रशिया से ही भारत सबसे ज्यादा हथियार और युद्धक उपकरणों की खरीद करता हैं। लेकिन बीते एक साल से ज्यादा वक्त से जारी रशिया और यूक्रेन की जंग के बीच रूसी हथियारों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। इस बीच रूस से आयातित हथियारों के मेनटेनेंस और स्पेयर पार्टस को लेकर भी सेना को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में भारत अब अपनी जररूतों को पूरा करने के लिए हथियारों के  इंडीजिनस डेवलपमेंट पर फोकस कर रहा है। साथ ही यह भी कोशिश रहती है कि इनका निर्माण टेक्नोलाॅजी ट्रांसफर के आधार भर देश में ही हो। खासकर तेजस प्रोग्राम को पूरा करने में हुई देरी की बड़ी वजह इसके लिए सूटेबल जेट इंजन का निर्माण रहा। भारत अब तीन ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है जिसके लिए उसे बेहद पाॅवरफुल फाइटर जेट इंजनों की जरूरत थी। इसी के चलते भारत ने अमेरिकी कंपनी जीई एविएशन के इस नए इंजन की खरीद और भारत में ही इसके निर्माण का फैसला लगभग फाइनल कर लिया है।  भारत अपने किन प्रोजेक्टस में इस नए इंजन का यूज करने वाला है यह भी जान लें

 

तेजस-एमके-1

तेजस-एमके-2

एडवांस मीडियम काॅम्बैक्ट एयरक्राफ्ट (AMCA)

डेक बेस्ड टिविन इंजन फाइटर जेट (TEDBF)

  

दरअसल भारत की इस मल्टी बिलियन डालर डील के लिए फाइटर जेट इंजन बनाने वाली विश्व की दो सबसे बड़ी कंपनियों रोल्स राॅयस और जीई एविएशन के बीच टक्कर चल रही थीं,लेकिन अमेरिकी कंपनी जीई एविएशन के साथ टेक्नोलाॅजी ट्रांसफर को लेकर सहमति बन गई। एचएएल के साथ मिल कर जीई एविएशन देश में ही इस इंजन को बनाएगी। एलसीए तेजस पहले पहले वैरियेंट के लिए एचएएल पहले से ही इसी सीरीज के इंजन का इस्तेमाल कर रहा है। 2021 में जीई-एफ-404 जेट इंजन की खरीद के लिए एचएएल ने 5375 करोड़ की डील साइन की थी। वहीं अब नया ज्यादा पावरफुल जीई-एफ414-400 इंजन भी भारत में बनेगा। ऐसे में उसकी मेनटेनेंस काॅस्ट भी कम लगेगी क्योंकि इंजन का निर्माण देश में ही होगा। क्योंकि उसके कंपोनेंट भी देश में ही उपलब्ध रहेंगे। एक और खास बात आपको बताते चले कि भारत अमेरिका के साथ सिर्फ अपने फाइटर जेट के इंजन के लिए ही डील साइन नहीं करने जा रहा बल्कि वह अपनी नेवी के लिए बन रहे शिप में लगने वाले इंजन की खरीद के लिए भी अमेरिका के साथ डील साइन कर सकता है।

 

 

 

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