Pakistan Army को निशाना बना रहा तहरीक-ए-तालिबान

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गुड तालिबान और बैड तालिबान की रणनीति पर चलने वाला पाकिस्तान इस वक्त बेबस और लाचार है। पाकिस्तान को अंदाजा भी नहीं था कि उसकी मदद करने वाला टीटीपी यानी तहरीक-ए-तालिबान एक दिन ऐसा नासूर बन जाएगा, जिसका इलाज किसी के पास नहीं होगा। पिछले एक हफ्ते से टीटीपी किसी न किसी तरह से पाकिस्तानी सेना को निशाना बना रहा है।

पिछले दिनों टीटीपी ने पाकिस्तानी मेजर समेत 4 फौजियों को तीन दिनों से बंधक बना रखा था। सुरक्षाबलों ने टीटीपी के 33 आतंकियों को मार गिराने का दावा किया है। हालांकि इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के दो कमांडो भी मारे गए हैं। गुड तालिबान और बैड तालिबान की रणनीति को फॉलो करने वाला पाकिस्तान ने जो बोया है वही काट रहा है। गुड तालिबान यानी वो तालिबान जो पश्चिमी बॉर्डर यानी अफगानिस्तान में इस्लामिक शासन को लागू करने और उसे आगे बढ़ाने में मददगार है। बैड तालिबान यानी वो तालिबान जो दुश्मन भारत को कंट्रोल कर सकता है। अब यही बैड तालिबान पाकिस्तान सरकार के लिए सिरदर्द बन गया है। टीटीपी यानी बैड तालिबान की एक ही ख्वाहिश है कि पाकिस्तान में सरकार को उखाड़ फेंका जाए और शरिया कानून लागू किया जाए। वहीं टीटीपी अब इस देश के लिए एक बड़ा आतंकी खतरा बना हुआ है, जब भी बैड तालिबान पाकिस्तान को निशाना बनाता है तो यहां की सरकार को लगता है कि इसमें अफगानिस्तान और भारत का हाथ है।

कब बना टीटीपी

टीटीपी की शुरुआत साल 2007 में हुई थी और बैतुल्ला मसूद ने इसे शुरु किया था। ये ग्रुप खुद को अफगानिस्तान तालिबान का हिस्सा बताता है। इसका एक ही मकसद है और वो है देश में इस्लामिक कानून को लागू करना। टीटीपी फिलहाल उत्तरी वजीरिस्तान और खैबर में ज्यादा ताकतवर है और ये दोनों जगह अफगानिस्तान सीमा से सटी हुई है। हाल ही में टीटीपी ने अपने आतंकियों को पाकिस्तानी सेना पर हमले जारी रखने का निर्देश दिया है। डॉन अखबार के मुताबिक, अपनी आधिकारिक चिट्ठी में टीटीपी ने जहां भी मौका मिले, वहां हमला करो, क्योंकि सेना कई जगहों पर मुजाहिद्दीनों को मार रही है।

अपनी गलती का अंजाम भुगत रहा पाकिस्तान

तालिबान के काबुल पर शासन करने के बाद से टीटीपी पाकिस्तान में ताकतवर हो गया है। जानकारों के मुताबिक, पाकिस्तान के लिए हालात बेहद मुश्किल है। साल 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जरूर हुई थी, लेकिन पाकिस्तान ने कभी इस बात को नहीं माना कि उसकी धरती पर टीटीपी के कई खूंखार आतंकी मौजूद हैं। आज ये देश अपनी उसी गलती का अंजाम भुगत रहा है।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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