युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है सोशल मीडिया का नशा !

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युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है सोशल मीडिया का नशा !
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इन दिनों सबसे बड़ा नशा सोशल मीडिया का युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट्स भी इस बात को मानते है तो शराब और सिगरेट से घातक नशा अब सोशल मीडिया का है. जैसे सिगरेट की लत लग जाए तो बार-बार उसकी तलब लगती है कुछ वैसा ही हो रहा अब फेसबुक और इंस्टाग्राम यूजर्स के साथ भी है. जो अपनी जिंदगी का 1/4 समय रील्स देखने या फिर स्क्रॉलिंग में बिता रहे है. जिसका चस्का ऐसा लग रहा है कि लोग खुद की रील्स बनाने में कोई गुरेज नहीं करते है.

 

5 अरब से ज्यादा सोशल मीडिया यूजर

According to Reports दुनिया की आबादी 8 अरब से ज्यादा है. इनमें से 5.3 अरब इंटरनेट यूजर्स हैं. सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या सबसे ज्यादा चीन में है. लेकिन, पूरी दुनिया में सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा टाइम बिताते हैं हम इंडिया वाले. अपनी भूख, प्यास, नींद और रिश्तों को दरकिनार कर हमने कम से कम इस मामले में अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ दिया है. रिसर्च फर्म ‘रेडसियर’ के मुताबिक इंडियन यूजर्स हर दिन औसतन 7.3 घंटे अपने स्मार्टफोन पर नजरें गड़ाए रहते हैं. इसमें से अधिकतर टाइम वे सोशल मीडिया पर बिताते हैं. इस बात को राहुल गांधी ने भी देश के सामने रखा था और इस बात को दोहराया था कि आज देश का युवा नौकरी नहीं करता, बल्कि 7-8 घंटे मोबाइल पर इंस्टाग्राम और फेसबुक चला रहा है' भारत ही नहीं अमेरिका में भी 7 घंटे और चीनी यूजर्स का 5.3 घंटे एवरेज स्क्रीन टाइम है. इसके साथ ही सोशल मीडिया ऐप्स भी इंडियन यूजर्स ही सबसे ज्यादा यूज करते हैं. अमेरिका और ब्रिटेन में एक इंसान के औसतन 7 सोशल मीडिया अकाउंट्स हैं, जबकि एक इंडियन कम से कम 11 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद है.

इंस्टाग्राम और फेसबुक पर बीत रहा समय

केपियॉस की डिजिटल एडवाइजरी की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 519 करोड़ यूजर्स सोशल मीडिया पर एक्टिव है. ये दुनिया की कुल आबादी का 64.5% है. 85% यूजर्स मोबाइल पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं. 102.10 करोड़ (दुनिया में सबसे ज्यादा) यूजर्स चीन में हैं.  75.50 करोड़ यूजर्स के साथ भारत दूसरे नंबर पर है. साथ ही दुनिया में 2.35 घंटे सोशल मीडिया यूज करते हैं. 3.03 अरब यूजर्स वाला फेसबुक सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफार्म है जबकि 2.56 अरब यूजर्स यूट्यूब की दुनिया में है. 2 अरब यूजर्स वाला वॉट्सऐप तीसरा सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है.  इसके साथ ही भारत में इंस्टाग्राम REELS यूजर 23 करोड़ है. हर दिन करीब 3 घंटे का समय रील्स में बीता रहे है, भारत में हर साल 60 लाख Reels बनाई जाती है. स्क्रीन टाइम में से 40-60% रील्स में जाता है. 

 

हेल्थ एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता 

रिसर्च बताती हैं कि स्क्रीनटाइम जितना ज्यादा होता है, लोग सोशल मीडिया जितना ज्यादा यूज करते हैं, उनकी मेंटल हेल्थ उतनी ही ज्यादा खराब हो जाती है. रिसर्च जर्नल PubMed के मुताबिक 70 फीसदी लोग बिस्तर पर जाने के बाद भी मोबाइल नहीं छोड़ते और सोशल मीडिया पर बिजी रहते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ ऐंड न्यूरोसाइंसेज बेंगलुरु में हुई रिसर्च के  डेटा के मुताबिक, 13 से 47 साल की उम्र के लोग दिन में औसतन 3-4 घंटे सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये उतना ही नुकसानदायक है, जितना शराब पीना, सिगरेट के धुएं उड़ाना. अब सवाल ये है कि सोशल मीडिया पर कितना वक़्त बिताना ठीक है? और किस हद के पार जाना इसकी लत पड़ने में शुमार होता है? यूं तो सोशल मीडिया की लत को लेकर कई रिसर्च हो चुकी हैं, मगर अभी इनसे भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है. हां, अब तक सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर जो तजुर्बे हुए हैं, उनसे एक बात तो सामने साफ़ तौर पर आई है. वो ये कि बहुत ज़्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले दिमागी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. डिप्रेशन और नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं. वो अपनी असली दुनिया के रिश्तों की अनदेखी करने लगते हैं. फिर काम और बाक़ी ज़िंदगी के बीच जो तालमेल होना चाहिए, वो भी गड़बड़ाने लगता है.  ये ठीक उसी तरह है जैसे लोगों को शराब या ड्रग्स की लत लग जाती है. ज़रा सी परेशानी हुई नहीं कि शराब के आगोश में चले गए, या सिगरेट जला ली.

 

एक रिसर्च के मुताबिक़, ज़्यादातर युवा, महिलाएं या अकेले लोग ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. सोशल मीडिया के ज़्यादा इस्तेमाल की वजहें कम तालीम, कम आमदनी और खुद पर भरोसे की कमी होना भी होती हैं. लोग सोशल मीडिया पर जाते हैं ताकि अपना ख़राब मूड ठीक कर सकें. मगर, रिसर्च बताती हैं कि सोशल मीडिया पर जाकर भी इससे आपको राहत नहीं मिलती. रिसर्च के मुताबिक आम तौर पर एक व्यक्ति दिन भर में 58 बार मोबाइल उठाता है. वहीं औसतन एक व्यक्ति का स्क्रीन टाइम दिनभर में 7 घंटे का है. बहुत से लोगों को ये मालूम होगा कि मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करना सेहत के लिए हानिकारक होता है, लेकिन बहुत कम लोगों को ये मालूम होगा कि ये शरीर के लिए कितना घातक हो सकता है. ये न सिर्फ मानसिक रूप से बल्कि शारीरिक रूप से भी सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाता है. मोबाइल अधिक चलाने की वजह से स्लीप साइकिल खराब होता है, मानसिक तनाव होता है, सोचने समझने की शक्ति कम होती है.

स्कीन टाइम को करें ट्रैक

रिपोर्ट्स के मुताबिक सोशल साइट्स का जितना ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, मन पर उसका बुरा असर उतना ही बढ़ता जाता है. हालांकि ऐसा नहीं है कि इससे आप दूरी नहीं बना सकते अगर आप कुछ समय के लिए खुद को सोशल मीडिया से दूर करें तो सेहत के साथ, आप फैमिली में भी समय अच्छे से बीता सकते है. इसके लिए सबसे पहले आप अपने मोबाइल फोन पर इन Social Media Platforms के Notification को बंद कर दें. ये बहुत सरल उपाय है क्योंकि अगर आपको नया नोटिफिकेशन मिलेगा ही नहीं तो शायद आप बार बार अपना Social Media Account चेक भी नहीं करेंगे.इसके साथ ही अगर आप स्क्रीन टाइम को अपने मोबाइल पर सेट करना चाहते है तो उसका भी एक प्रोसेस है

स्क्रीन टाइम ट्रैक करें

सेटिंग्स >  डिजिटल वेलबीइंग और पैरेंटल कंट्रोल पर जाएं

मेनू आइकन >  अपना डेटा प्रबंधित करें >  दैनिक डिवाइस उपयोग पर टॉगल टैप करें

डिजिटल वेलबीइंग और पैरेंटल कंट्रोल स्क्रीन पर सर्कल ग्राफ़ दिन के लिए आपका कुल स्क्रीन समय दिखाता है.

अगर आप भी सोशल मीडिया के एडिक्टेड है तो आपको भी संभलने की जरूरत है. इस स्टोरी पर आपकी क्या राय है कमेंट्स करके जरूर बताएं और वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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