इतिहास की सबसे बड़ी Train Robbery, चंद मिनट में ले उड़े 300 करोड़

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पुरानी कहावत है कि बेईमान लोगों के भी कुछ उसूल होते हैं, क्योंकि वो आपस में पूरी ईमानदारी रखते हैं... ये लाइन्स सटीक बैठती हैं, 65 साल पहले हुई द ग्रेट ट्रेन रॉबरी करने वाले उन 16 लुटेरों पर जिन्होंने चलती हुई ट्रेन से 1-2 करोड़ नहीं बल्कि 300 करोड़ की लूट कर डाली, जो कि इतिहास की सबसे बड़ी ट्रेन रॉबरी है। इस रॉबरी को आज भी द ग्रेट रॉबरी के नाम से जाना जाता है। आज हम बात करेंगे कि कैसे हुई इतिहास में दर्ज अब तक की सबसे बड़ी लूट।

साल 1963, तारीख 7 अगस्त और वक्त शाम के 06 बजकर 50 मिनट... ब्रिटेन में एक स्टेशन है ग्लासगो... वहां से रॉयल मेल नाम की डाक ले जाने वाली ट्रेन लंदन के लिए निकलती है। जिसे अगले दिन सुबह 04:00 बजे यूस्टन पहुंचना था। ये वो दौर था जब डाक के तौर पर ही खज़ाना भी ट्रेनों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता था और सफ़र की रफ्तार भी धीमी रहा करती थी, जिसके चलते ग्लासगो से लंदन के सफ़र में 12 घंटे का वक्त लगता था। ट्रेन को डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव डी 326 खींच रहा था। इस ट्रेन में पोस्ट ऑफिस के 72 कर्मचारी भी थे जो ट्रेन के अंदर ही डाक छांटने का काम करते थे। टोटल 12 बोगी वाली इस ट्रेन में इंजिन के ठीक पीछे था HVP यानी हाई वैल्यू पैकेजेस कोच...  जिसमें करीब 2.6 मिलियन पॉन्डस था, जिसकी मौजूदा कीमत 50 मिलियन पॉन्ड्स के आस-पास है। यानी आज के हिसाब से करीब 300 करोड़ रुपये थे। 

जिस लूट की हम बात कर रहे हैं कि वो हुई थी 8 अगस्त साल 1963 को.... लुटेरों के गैंग को ट्रेन के स्टाफ से गोपनीय सूचना मिली कि रॉयल मेल में बहुत सारा पैसा लंदन जा रहा है। सूचना मिलते ही इसकी प्लानिंग 1 महीने पहले ही कर ली गई। योजना बनी कि तड़के ट्रेन को रास्ते में रोककर लूट लिया जाएगा. गॉर्डन गूडी, बस्टर एडवर्ड और रेनाल्ड इस योजना के मास्टरमांइड थे। तीनों ने मिलकर एक महीने में फुलप्रूफ प्लान बनाया. मगर इन्होंने इससे पहले कभी भी ट्रेन नहीं लूटी थी. इसलिए ट्रेन लूटने में माहिर तीन लोगों को शामिल किया गया. रोजर कॉर्डरे नाम के एक शख्स को प्लान का हिस्सा बनाया गया, जो सिग्नल में तकनीकी खराबी कर ट्रेन रोकने में माहिर था। कुल मिलाकर 16 लोगों की गैंग तैयार हुई। 

8 अगस्त को तड़के सुबह 3 बजे प्लान के मुताबिक, ये 16 लुटेरे लंदन से कुछ घंटे पहले पड़ने वाले एक ट्रैफिक सिग्नल पर खड़े हो गए। उन्होंने सिग्नल की ग्रीन लाइट को एक पेपर से ढक दिया और उसके बाद बैटरी की मदद से रेड लाइट को ऑन कर दिया। ट्रेन 8 अगस्त की सुबह करीब 3 बजे ये इस सिग्नल पर पहुंची। 58 साल के जैक मिल्स ट्रेन चला रहे थे, तभी रास्ते में लाल सिग्नल देख उन्होंने तुरंत ट्रेन को रोक दिया। ट्रेन के रुकते ही सभी लुटेरे ट्रेन के अंदर दाखिल हुए। इनमें से एक ने इंजन में जाकर ड्राइवर जैक के सिर पर लोहे की रॉड से जोरदार वार कर उन्हें बेहोश करके इंजन के पीछे वाली बोगी में पहुंच गए, जहां 128 बॉक्स के अंदर करीब 300 करोड़ रुपये थे। इसके बाद ह्यूमन चेन बनाकर महज 15 मिनट में एक के बाद एक 128 नोटों से भरे डिब्बे ट्रेन से उतारकर उस ट्रक में भर लिए, जो प्लान के अकॉर्डिंग पहले से ही तैयार रखा था। फिर उन्हे लेकर फरार हो गए। अधिकतर नोट 1 और 5 पाउंड के थे। सभी 17 लोगों में यह पैसा बराबर-बराबर बांटा गया। 

लेकिन कहते हैं कि बेईमानी का काम बेईमानी का ही होता है। इस लूट के बाद पुलिस ने लुटेरों पर 2 लाख 60 हजार पॉन्ड्स का ईनाम रखा था। आखिर पुलिस छानबीन के दौरान कुछ सालों बाद लुटेरों को पकड़ने में कामयाबी मिली। हालांकि तब तक गैंग के कुछ सदस्य मारे गए या उनकी मौत हो गई। मगर 11 लोगों को कोर्ट ने दोषी पाया। इनमें से 7 लोगों को 30-30 साल की सजा हुई। 2 को 25 साल, एक को 24, एक को 20 और एक दोषी को 3 साल की सजा हुई। इस मामले में आखिरी जो आरोपी था उसे साल 2001 में पकड़कर जेल भेजा गया था। हालांकि इस गैंग के सभी सदस्य अब मर चुके हैं। बावजूद इसके पुलिस आज तक लूट का सारा पैसा रिकवर नहीं कर पाई। इस वारदात को वहां की पुलिस क्राइम ऑफ द सैंचुरी माना था। इस रॉबरी को इतिहास की सबसे बड़ी लूट बताया गया क्योंकि ये लूट 300 करोड़ की  थी और इस रॉबरी को द ग्रेट ट्रेन रॉबरी के नाम से जाना जाता है। 

 

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