गाजियाबाद की घटना से सहम उठा देश, घरों के 'लाडले' बन रहे मासूमों के दुश्मन!

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आज के दौर में ज्यादातर घरों में कोई न कोई पेट एनिमल जरूर होता है, इसमें डॉग्स का परसेंटेज़ काफी ज्यादा है। लेकिन बीते कुछ सालों  में डॉग्स के बिहेवियर में बदलाव आया है। आए दिन हमें डॉग्स के काटने की खबरें सुनाई देती हैं। हाल ही में ऐसी ही एक दर्दनाक घटना गाजियाबाद के विजय नगर में हुई, जहां एक 14 साल के बच्चे की कुत्ते के काटने से दर्दनाक मौत हो गई है। इस बच्चे की दर्दनाक मौत से हर कोई सहम गया है। आज हम बात करेंगे कि कैसे होती है ये खतरनाक बीमारी और कुत्ते के काटने के बाद क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। 

रेबीज़ एक ऐसा Deadly virus जो Infected Animals की लार से इंसानों में फैलता है। इसी वायरस से Infected कुत्ते के काटने से होने वाली बीमारी को रेबीज कहते हैं।  दुनिया भर में, हर साल करीब 59 हजार लोग इस बीमारी से दम तोड़ देते हैं। जिसमें एक तिहाई से ज्यादा मौतें भारत में होती हैं। हालांकि, भारत को रेबीज-फ्री बनाने का टारगेट सरकार ने सेट किया है। लेकिन भारत में रेबीज़ को लेकर वैक्सीनेशन अभी बड़े पैमाने पर नहीं होता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 70 फीसदी कुत्तों को टीका लगा देने से हर्ड इम्युनिटी बन जाएगी। जिसकी बदौलत बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है। 

WHO के मुताबिक, भारत में रेबीज़ के 30% से 60% शिकार, 15 साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं। देश में साल 2019 में आवारा कुत्तों के काटने की 72.77 लाख घटनाएं हुई थीं। 2020 में ये कम होकर 46.33 लाख हो गईं। साल 2021 में तो ये 17 लाख के आसपास आ गईं। वहीं, साल 2022 के जुलाई महीने तक 14.50 लाख घटनाएं हुई थीं। जिसको देखकर ऐसा अनुमान है की घटनाएं 20 लाख के ऊपर जा सकती है।

WHO के मुताबिक कुत्ते के काटने के बाद रेबीज के लक्षणों को दिखने में 1 से 3 महीने का समय लग सकता है कुछ मामलों में ये ड्यूरेशन 1 हफ्ते से लेकर 1 साल के बीच में भी हो सकता है। रेबीज़ के सिम्टम्स में बुखार, मांसपेशियों में कमजोरी और बॉडी में झनझनाहट होना शामिल है। जैसे ही वायरस सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर इम्पैक्ट करता है तो खरोंच या घाव पर जलन भी महसूस हो सकती है। 


कुत्ते का काटने से क्यों बढ़ रही चिंताएं ?

दरअसल हर 5 साल में मवेशियों और आवारा जानवरों की गिनती होती है। आखिरी बार साल 2019 में गिनती हुई थी। इसके मुताबिक आवारा कुत्तों की संख्या 1.53 करोड़ है। साल 2012 में आवारा कुत्तों की आबादी 1.71 करोड़ से ज्यादा थी।

आवारा कुत्तों में से ज्यादातर का वैक्सीनेशन नहीं होता है। ऐसे में अगर ये किसी को काटते हैं, तो उसे रेबीज़ फैलने का खतरा बढ़ जाता है। वैसे तो रेबीज सिर्फ कुत्ते ही नहीं, बल्कि और दूसरे जानवरों के काटने से भी फैलता है। लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो, देश में रेबीज़ के 96% मामले कुत्तों के काटने से सामने आते हैं। 


कुत्ते के काटने पर क्या करें ?

घाव को साबुन और पानी से साफ करें।

एंटी-माइक्रोबियल लोशन को न लगाएं।

एंटी-रैबीज सीरम तब लें जब गर्दन पर काटा हो।

72 घंटे के अंदर वैक्सीन लगवाएं।


क्या न करें ?

घाव वाले हिस्से पर हल्दी, नमक या घी न लगाएं।

डॉक्टर की एडवाइस पर ही घरेलू उपाय करें।  

जानवर के काटने पर इलाज में देरी या लापरवाही न करें.


इस बीमारी का सही रेबीज़ वैक्सीन है। ये वैक्सीन 14 दिन में 5 बार लगाई जाती है। एंटी रेबीज एक इंजेक्शन की कीमत 350 से 370 रुपये तक होती है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में ये वैक्सीन फ्री में लगती है। हालांकि, देश में रेबीज की वैक्सीन की एवलेबलिटी सरकारी अस्पतालों में काफी कम है। इंसानों में रेबीज़ को पूरी तरह खत्म कर देने वाला भारत का पहला राज्य गोवा बन गया है। साल 2018 से वहां रेबीज़ का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इसके साथ ही केरल जैसे राज्यों में सरकारें रेबीज़ के मामलों के खिलाफ जनाक्रोश के बाद काफी एक्टिव नज़र आ रही हैं। 


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