महिलाओं से स्मार्टफोन की दूरी देशों को करा रही ट्रिलियन डॉलर्स का नुकसान!

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जीने के लिए क्या चाहिए रोटी, कपड़ा और मकान, लेकिन अब मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन भी चाहिए होता है, क्योंकि ये दुनिया से जुड़े रखने का एक जरुरी माध्यम जो बन गया। मोबाइल के लिए कोई उम्र सीमा नहीं है, बूढ़ापे में समय काटने के लिए से लेकर छोटे बच्चों तक मोबाइल का इस्तेमाल करते आपने भी देखा होगा। लेकिन इसमें भी लैंगिक असमानता है, जिसका असर जीडीपी तक पर पड़ता है।

यूएन की वुमन जेंडर स्नैपशॉट 2022 की एक रिपोर्ट आई, इसमें बताया गया कि डिजिटल दुनिया में महिलाओं को शामिल न करने से, कम और मध्यम इनकम वाले देशों को GDP में पिछले 10 सालों में 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा है।

तो रिपोर्ट ये भी बताती है कि देश में महिलाओं के पास पुरुषों के कमपैरिजन में फोन कम हैं।ऑक्सफैम डिजिटल डिवाइड इंडिया इनिक्वलिटी रिपोर्ट 2022 के मुताबिक महिलाओं के पास अपना फोन होने की संभावना 15% कम है। तो वहीं मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को इस्तेमाल करने की संभावना 33% कम है।

वैसे घर में महिलाओं के पास फोन होने के बाद भी उनके पास भी कम रहता है। इसका एक लाइव उदाहरण आप अपने घर में ही देख सकते हैं कि अगर बच्चे को अपना असाइनमेंट करना है तो वो अपनी मां का फोन पिता से पहले बड़ी आसानी से ले लेता है।

नीलसन कंपनी की इंडिया इंटरनेट रिपोर्ट 2022 के मुताबिक देश में करीब 70 करोड़ से ऊपर इंटरनेट यूजर्स हैं। रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि महिलाएं, मोबाइल और इंटरनेट को पुरुषों से अलग तरीके से इस्तेमाल करती हैं। जैसे कि ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने वालों में पुरुष 69% और महिलाएं 31% हैं। जबकि सोशल नेटवर्किंग, डिजिटल न्यूज, वीडियो और म्यूजिक कंज्यूम करने वालों में भी पुरुष आगे हैं, जबकि औरतों की दिलचस्पी शिक्षा से जुड़ी सामग्री में है।

कोरोना महामारी के बाद काम करने के तरीके भी बदले, अब ज्यादातर काम ऑनलाइन होने लगे हैं। यहां तक की रिमोर्ट वर्किंग, वर्चुअल कम्युनिकेशन टूल का इस्तेमाल होने लगा। तो ऐसे में जो महिलाओं के पास डिजिटल टेक्नोलॉजी का एक्सेस नहीं होता, वो अक्सर फ्रीलांस और अस्थायी नौकरी वाली अर्थव्यवस्था जिसे गिग इकोनॉमी कहते है, उससे भी बाहर हो जाती हैं।

जबकि महिलाओं को डिजिटल दुनिया का भरपूर्ण एक्सेस मिलने पर वो जिंदगी और स्वास्थ्य को और बेहतर कर सकती हैं। हालांकि कई लोग सामाजिक कारणों और पितृसत्ता की वजह से महिलाओं के फोन के इस्तेमाल को समय बर्बाद करना बताते हैं। अब जाहिर है कि अगर एक्सेस करने में अंतर रहेगा तो महिलाओं के सशक्तीकरण और बराबरी के हक पर एक दुष्प्रभाव पड़ेगा। जिसका इम्पेक्ट साफतौर पर एजुकेशन, हेल्थ, रोजगार और सोसायटी पर भी होगा।

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