The Kerala Story Review: अदा शर्मा की एक्टिंग और फिल्म की कहानी रोंगटे खड़े कर देगी !

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ऐसा कहा जाता है कि अच्छी फिल्म्स वो होती हैं, जो जब स्क्रीन पर खत्म हों, तो आपके जहन में शुरु हो जाएं। ऐसा ही कुछ सुदीप्तो सेन अपनी फिल्म द केरल स्टोरी में कर सके हैं। फिल्म में 32000 नंबर के फीगर पर लगातार सवाल उठे। लोगों को फिल्म एक प्रोपोगेंडा नजर आती है, लव-जिहाद और इस्लाम पर टारगेट लगती है। लेकिन जब फिल्म के लास्ट में जिस लड़कियों की ये आपबीती है, उनकी जुबानी सुनाई जाती है। और साथ ही सुदीप्तो सेन का पूरी फिल्म में बैलेंस डायरेक्शन, फिल्म को टोटल नेगेटिव बताने पर फुल स्टॉप लगाता नजर आता है।

द केरल स्टोरी में 30 से 32 हजार लड़कियों के आंकडे पर लगातार विवाद है। तो ये फिल्म मेनली 4 लड़कियों की कहानी है, जिसमें तीन लड़कियां टारगेट पर हैं और चौथी लड़की दोस्त के शक्ल में उनको मैनिपुलेट करती है। ‘लव जिहाद’ शब्द का प्रयोग गंभीर और आपत्तिजनक रहता है, लेकिन ‘द केरल स्टोरी’ इसे शुरुआत से समझाती है कि इसे कैसे अंजाम दिया जाता है। कैसे एक नॉर्मल हंसते खेलते परिवार की लड़की शालिनी जिसे अपनी संस्कृति, परिवार सभी से काफी प्यार है। वो ऐसे रास्ते पर चल देती है, जहां से वापसी की राह ही नहीं है।

उसका प्यार में पड़कर परिवार, करियर को छोड़कर केरल से शुरु हुआ सफर सीरिया में जाकर थमता है, जहां उसके जैसी तमाम लड़कियां आतंकवादी संगठन ISIS के कैंप में पहले से ही जमा की गई हैं, ताकि वो आतंकवादियों की देह की भूख मिटा सकें। फिल्म में कई कहानियां हैं, जो आपको झकझोर तक रख सकती हैं।

फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ शुरू में किसी खास राजनीतिक उद्देश्य पर बनी फिल्म लग सकती है लेकिन, जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, ये दर्शकों को अपने साथ जोड़ने लगती है। इस्लाम के मायने तोड़ मरोड़कर दिखाने के साथ ही हिंदू देवी देवताओं और ईसा मसीह के बारे में असहज लग रहीं बातें भी है, जिसे लड़कियों को बरगलाने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। अदा शर्मा फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ में लीड रोल में हैं। उनकी एक्टिंग फिल्म में वाकई तारीफ करने लायक है। अदा शर्मा को इस फिल्म में अभिनय के साथ ही इस कैरेक्टर के लिए हामी भरने के लिए भी तारीफ मिलनी चाहिए।

शालिनी की फ्रेंड्स के कैरेक्टर में योगिता बिहानी और सिद्धि इदनानी ने भी असरदार एक्टिंग की है। एक कम्युनिस्ट नेता की बेटी के रोल में सिद्धि हैं। जिन्होंने प्रेम में डूबी लड़की से लेकर अस्मिता गंवाकर होश में आई लड़की तक, जो घुटने न टेकने का फैसला करती है। उस रोल को बखूबी निभाया है। योगिता बिहानी का रोल फिल्म में एक होशियार लड़की का है, लेकिन धोखे से जब उसके साथ सामूहिक बलात्कार होता है, तो वो इस पूरे षडयंत्र का पर्दाफाश करने का बीड़ा उठाती है। जिसे योगिता ने बहुत ही खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है। इन तीने लड़कियों को बहला फुसला कर मैनिपुलेट करने वाली लड़की के रोल में सोनिया बलानी है, जिसमें उन्होंने अच्छा काम किया है। एक सेकेंड भी वो अपने कैरेक्टर से इतर भटकते हुए नजर नहीं आती हैं।

डायरेक्टर सुदीप्तो सेन और फिल्म के प्रोड्यूसर साथ ही क्रिएटिव डायरेक्टर विपुल अमृतलाल शाह ने फैक्ट्स और एक बैलेंस फिल्म बनाने की अच्छी कोशिश की है। फिल्म के कुछ सीन आपको अंदर तक झकझोर कर रख देंगे। लेकिन उन्हें सब्जेक्ट की गंभीरता को बताने के लिए दिखाना जरूरी भी नजर आता हैं। फिल्म का म्यूजिक भी दृश्यों पर फिट बैठता है।

केरल, सीरिया और अफगानिस्तान जैसे इलाकों को परदे पर दिखाने के लिए सिनेमैटोग्राफर प्रशांतनु महापात्र ने बेहेतरीन काम किया है। अगर फिल्म को निष्पक्ष भाव से देखा जाए, तो ये एक प्रोपेगैंडा फिल्म बिल्कुल नहीं नजर आती है, क्योंकि अगर देश में एक भी लड़की की ये सच्चाई है तो इसे दिखाना जरुरी हो जाता है।

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