महिलाओं की चुप्पी पड़ रही भारी, बढ़ती जा रही दिल की परेशानी

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डॉक्टर्स कहते हैं कि जब मां सिर्फ 4 महीने प्रेग्नेंट होती है तब से ही शिशु का दिल धड़कना शुरु कर देता है और मौत के बाद भी पर्याप्त ऑक्सीजन मिलते रहने पर कुछ देर तक दिल धड़कता रह सकता है, क्योंकि इसकी अपनी एक विघुत प्रणाली होती है। दिल को शरीर के उन पार्ट्स में गिना है जिनके लिए कहा जा सकता है कि जब तक है जान, तब तक है काम।

लेकिन बीते सालों में हार्ट अटैक के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं, खासतौर पर महिलाओं में। और तो और महिलाओं में हार्ट अटैक का एक बड़ा कारण ये निकलकर सामने आया कि जो चेतावनी शरीर दिल में दिक्कतों के लिए दे रहा होता है, वो सभी ज्यादातर महिलाएं पहले तो इग्नोर कर देती हैं और परिवार से भी छिपा लेती हैं।

दिल की दिक्कतों से जुड़े मामलों में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं होती हैं। डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट कहती है कि हर साल तकरीबन 18 मिलियन लोग दिल की दिक्क्तों के कारण अपनी जान गवां देते हैं। 18 मिलियन, ये अपने आप में चिंताजनक हैं।

कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि पुरुषों के कमपैरिजन में महिलाएं उनके पास ईलाज के लिए देर से पहुंचती हैं। ईलाज के लिए जो महिलाएं उनके पास आती भी हैं उनमें से ज्यादातर ये समझती थी कि दिल की दिक्कतें पुरुषों के लिए ज्यादा कॉमन हैं। खासतौर पर हाउसवाइफ्स का ऐसा मानना है, क्योंकि वो इस मिथ पर विश्वास करती हैं कि वो घर और मार्केट के इतने काम करती हैं कि वो और उनका दिल फिट रहता है।

जबकि डाक्टर्स बताते हैं कि दिल की बीमारी पुरुषों की ही तरह महिलाओं के लिए भी एक नॉर्मल समस्या है। महिलाएं दिल की दिक्कतों से सम्बंधित लक्षणों को पुरुषों की तुलना में कम अनुभव कर पाती हैं। महिला और पुरुष दोनों में बीमारी के जो सिम्टम्स दिखाई देते हैं, वो अलग-अलग हैं।

जैसे कि अमेरिका के क्लीवलैंड क्लीनिक मेडिकल सेंटर की एक रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि हार्ट प्रॉब्लम्स के मामलों में महिला को छाती में दर्द के अलावा ठंडा पसीना निकलना, पेट में दर्द रहना, आराम के बाद भी थकान रहना, होता है।

साथ ही हार्ट अटैक में ज्यादातर सीने में या फिर बाएं हाथ में दर्द होने देखा जाता है, जबकि महिलाओं में गर्दन और जबड़े में भी दर्द हो सकता है। ये दर्द तीखा या फिर लगातार बना रह सकता है। कुछ महिलाओं में केवल छाती की बाईं तरफ दर्द न होकर पूरे सीने में दर्द होता है।

इसी के साथ सीने में भारीपन, सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी या घबराहट, हाथ या कंधे में तकलीफ हद्य रोग के लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों को ज्यादातर बार महिलाएं अनदेखा कर देती हैं।

तो वहीं ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज की स्टडी बताती है कि भारत मे महिलाओं की मौत और डिजीज जैसे कि कैंसर के कम्पैरिजन में ह्दय रोग से ज्यादा होती है, जोकि महिलाओं की मृत्यु का करीब 18% है।

तो वहीं अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की रिसर्च कहती है कि कोरोनरी धमनी में दिक्कत आयु वर्ग के आधार पर 3-13 परसेंट तक बढ़ी है। पिछले दो दशकों में इसमें 300 परसेंट की बढ़ोत्तरी भी हुई है। कोरोनरी धमनी का मेन काम ब्लड़ सप्लाई करना होता है। इन बढ़ते मामलों की वजह महिलाओं में हार्ट डिजीज के लिए अवेयरनेस का न होना है। खासतौर पर अपने इंडिया में गृहिणी ईलाज में पैसा बर्बाद होगा, ये बात कहकर सिम्टम्स इग्नोर करती हैं।

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