कश्मीर को जन्नत बनाने वाली झीलों के नाम की कहानी

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कश्मीर... जो मशहूर है अपनी हंसीं वादियों, अजीज़ चिनारों और उन खूबसूरत झीलों के लिए, जिनका पानी भी अपनी मिठास के लिए जाना जाता है। यही वजह हैं कि दुनिया भर के टूरिस्ट इन्हें देखने के लिए उत्सुक रहते हैं। कश्मीर की झील का जिक्र आते ही ख्याल आता है डल झील का, लेकिन डल झील के अलावा भी एक झील है जो बेहद ही खूबसूरत है, जिसे वुलर झील के नाम से जाना जाता है। आज हम बात करेंगे इन दोनों झीलों के नाम की कहानी पर, और एक सरसरी निगाह इनके इतिहास पर...

वैसे एक और खास बात है जम्मू-कश्मीर को लेकर की यहां की राजधानी मौसम के हिसाब से बदलती हैं। सर्दियों के मौसम में जम्मू-कश्मीर की राजधानी  जम्मू होती है। और गर्मियों के दौरान श्रीनगर... श्रीनगर का गहना कही जाने वाली डल झील पर गर्मी के मौसम में खिली धूप हो और शिकारे पर बैठकर चार चिनार देखना ही मानों असली जन्नत के नज़ारे जैसा ही लगता है। हाउसबोट और शिकारे यहां के मुख्य आकर्षण हैं इसके साथ ही मीठे पानी की इस झील के तट पर मुगल उद्यान और अन्य कई उद्यान हैं जो इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं। ये कुदरती सुंदरता के लिए जानी जाती है। क्योंकि जुलाई-अगस्त के महीने में यहां के बगीचों की सुंदरता देखते ही बनती है। 

डल झील कैसे बनी इसके जवाब में कई मत हैं कहीं माना जाता है कि ये एक ग्लैशियर था जो वक्त बीतने के साथ झील में तब्दील हो गई। और कुछ का ये मानना है कि कभी झेलम नदी में भयानक और बेतहाशा बाढ़ आने की वजह से डल झील बनी होगी। हालांकि इसका कोई ठोस जवाब नहीं मिल सका है। 

डल झील करीब 18 वर्ग किलोमीटर के एरिया में फैली हुई है। इसकी चौड़ाई करीब 3.5 किलोमीटर है और मैक्सिमम गहराई 20 फीट है। डल झील के चार बेसिन हैं, बोड दल, नागिन, गगरीबल और लोकुट दल। 

अब बात करते हैं इसके नाम पर, डल झील शब्द क्षेत्रीय भाषाई और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। कश्मीरी भाषा में ‘डल’ शब्द का मतलब ही झील होता है। बाद में ‘डल’ के साथ अलग से ‘झील’ शब्द आम बोलचाल में जुड़ गया, और ये ‘डल झील’ बन गया।

यह झील पर्यटन और मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण डेस्टिनेशन है. यह मछली पालन और water harvesting का important source हैं। पर्यटन के अलावा मछली पकड़ना यहां का दूसरा सबसे बड़ा कारोबार है. इससे स्थानीय लोगों की आजीविका चलती है।

श्रीनगर में मौजूद डल झील के अलावा भी जम्मू-कश्मीर के बांडीपोरा जिले में एक प्राकृतिक मीठे पानी की झील है, जिसे वुलर झील के नाम से जाना जाता है। आकार में बड़े होने के चलते इस झील में लहरें भी बड़ी आती हैं। ये भारत की सबसे बड़ी झील है जो कि झेलम नदी के रास्ते में ही पड़ती है। और झेलम इसमें पानी डालती भी है और आगे निकाल भी लेती है। मौसम के हिसाब से वुलर झील का आकार कम ज्यादा होता रहता है।  जो कि 

 

वुलर झील मिनिमम 30 वर्ग किलोमीटर से 260 वर्ग किलोमीटर के बीच बदलता रहता है। तुलबुल परियोजना भी इसी झील बनी हुई है। प्राचीनकाल में 'महापद्म देवता' इस झील के अधिदेवता थे और उनके नाम पर इस झील को 'महापद्मसर' कहा जाता था। इस झील की शांत सतह पर देखते-ही-देखते ऊँची और ख़तरनाक लहरे उठने लगती हैं। संस्कृत में इन कूदती हुई लहरों को 'उल्लल' कहा जाता है और यही नाम विकृत होकर 'वुलर' पड़ गया।

अगर आप कभी कश्मीर जाएं तो इन झीलों की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ जरूर उठाएं।

 

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