अतीक के आतंक के अंत की कहानी इन महिलाओं के बिना अधूरी है !

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कहते हैं ना लोहे को लोहा ही काटता है... कुछ ऐसा ही हुआ माफिया डॉन अतीक अहमद के साथ... जिस बंदूक के दम पर अतीक लोगों की जानें लेता था.. खून की लालिमा से लोगों का मुकद्दर बिगाड़ देता था..आज उन्हीं बंदूकों ने अतीक को सिर्फ नामों पर जिंदा रखा है... बाकी शरीर तो उसका सुपुर्द-ए-खाक हो गया.....एक वक्त इलाहाबाद जो अब प्रयागराज है वो पावर, पॉलिटिक्स, प्रशासन और पढ़ाई का केंद्र हुआ करता था...जिस शहर ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के रूप में देश का प्रधानमंत्री दिया...जिस शहर कि फिजा ने देश को न जाने कितने प्रशासनिक और पुलिस ऑफिसर्स दिए ....उसी शहर ने एक ऐसा क्रीमिनल गुंडा गैंगस्टर हिस्ट्रीशीटर डॉन माफिया भी दिया...जिसके नाम की दहशत दशकों तक बरकार रही... अपराध का सिक्का प्रयागराज ही नहीं आस-पास के शहरों ही नहीं बिहार तक चलता रहा....वो नाम था अतीक अहमद... जिस किसी ने दुश्मनी की हमेशा महंगी पड़ी....या तो जान गई या जमीन...महंगी गाड़ियों और विदेशी हथियारों का तो जैसे दीवाना था..मूंछों पर ताव देने का शौकीन वो किसी फिल्मी गुंडे की तरह खूंखार दिखता था..... आंखों को गौर से देख लो.. तो लगता था.. जैसे खून तैर रहा हो...कद 5 फुट 6 इंच... लेकिन दुस्साहस मानो शिखर से भी ऊंचा..... लेकिन इसी दुस्साहस को दो महिलाओं ने मिट्टी में मिला दिया... या यूं कहे की अतीक के घमंड को चकनाचूर कर दिया....

एक दौर ऐसा था जब माना जाता था अतीक से अदावत यानी मौत को दावत.... लेकिन सबके बीच कुछ लोगों ने अतीक के जुल्मों के खिलाफ आवाज बुलंद की... उसी का परिणाम है कि आज अतीक के आतंक का साम्राज्य खात्मे की कगार पर है.... उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों में दो नाम है....
पहला नाम- जयश्री उर्फ सूरजकली
जिसने अपनी जमीन बचाने के लिए तीन दशक से अतीक के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है.... मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रयागराज में धूमनगंज इलाके के झलवा में रहने वाली जयश्री उर्फ सूरजकली के पति स्व. बृज मोहन कुशवाहा की 12 बीघा से अधिक जमीन थी... जिस पर अतीक ने एक लेखपाल की मदद से जमीन को शिवकोटी सहकारी आवास समिति के नाम पर दर्ज करा ली थी.... जब जयश्री ने विरोध किया तो धमकियां मिली...
जयश्री का कहना है कि "मैंने इस बात का विरोध किया तो अतीक गुस्सा हो गया. धमकी देते हुए कहा कि जिस तरह तुम्हारे पति गायब हो गए, उसी तरह तुम्हें भी गायब कर देंगे, अब चुपचाप चली जाओ. गुर्गे अक्सर धमकी देते रहे. लेकिन मैं डरी नहीं और अपने केस की पैरवी करती रही. मेरे भाई प्रहलाद कुशवाहा को कंरट लगाकर मार दिया गया. 1989 से 2015 के बीच मेरे घर में घुसकर कई बार मारा पीटा गया. 30 सालों में 7 बार हमला हुआ, सैकड़ों बार धमकियां दी गईं लेकिन मैं टूटी नहीं और अतीक से आज भी लड़ रही हूं. मेरी अरबों की संपत्ति थी जिसे अतीक ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर औने-पौने दामों पर बेच दिया. तकरीबन 200 लोगों को उनकी जमीन पर बसा दिया.’’ ये बात खुद जयश्री ने मीडिया से बात करते हुए कहीं... सूरजकली को भरोसा है कि 35 साल की उनकी लड़ाई कारगर होगी...अतीक के आतंक का अंत तय है... हालांकि उनको इस बात की खुशी है कि अतीक और अशरफ दोनों खत्म हो गए..


अब बात उस महिला की जिसने अतीक की बादशाहत को मिट्टी में मिला दिया... जिसका नाम है पूजा पाल...उमेश पाल हत्याकांड केस में फरार शूटर्स को पुलिस तलाश रही है.. जिसमें गुड्डु मुस्लिम सबसे बड़ा नाम है.. हालांकि अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन अब भी फरार बताई जा रही है....उमेश पाल केस की कड़ी राजू पाल से जुड़ती है... वो राजू पाल जिसका मर्डर दिनदहाड़े संगमनगरी में किया गया था...
25 जनवरी 2005 को इलाहाबाद वेस्ट सीट से BSP के MLA राजू पाल की हत्या कर दी गई थी...राजू पाल की हत्या का आरोप भी अतीक-अशर और उसके गुर्गों समेत 9 लोगों पर लगा है.....मामला लखनऊ की CBI कोर्ट में चल रहा है.....दरअसल राजू पाल ने अतीक के भाई अशरफ को 2004 में चुनाव हराया था.... इसी के बाद राजू पाल की जान ली गई थी.. इसके बाद फिर से चुनाव हुआ और अतीक ने अपने भाई अशरफ को फूलपुर सीट से चुनाव में खड़़ा कर दिया था.... तब उसके सामने बीएसपी की टिकट पर राजू पाल की पत्नी पूजा पाल उतरीं थी..
बाहुबली अतीक ने पूजा पाल को हराने के लिए पूरी ताकत को झोंक दिया था... एक तरफ माफिया अतीक लाव लश्कर था.. तो दूसरी तरफ एक महिला थी... जिसके पति को शादी के कुछ दिन बाद ही मार दिया गया था... जब इस चुनाव के नतीजे आए तो अतीक के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई थी... पूजा पाल ने अकेले अशरफ को हराकर अतीक के घमंड को तोड़ दिया था.. पूजा पाल सपा से विधायक है.. और अतीक और अशरफ को तीन हमलावरों ने प्रयागराज के चकिया में ही मौत के घाट उतार दिया है...
ये दो महिलाएं है जिन्होंने कभी भी अतीक के आगे घुटने नहीं टेके... और अतीक के खिलाफ डटकर खड़ी रहीं...

 

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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