CNG के बढ़ते दामों के पीछे की Theory हैरान कर देगी !

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पिछले कुछ ही सालों में घर का खाना बनाने वाली LPG से लेकर CNG के दामों में काफी इजाफा देखने को मिला है. 2014 के बाद से सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ते जा रहे है. इसके साथ ही राशन-पानी के दाम आसमान छू रहे है. लेकिन इन सबके बीच देश में कारों की डिमांड खूब बढ़ी है खास तौर पर CNG कारें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट. जिनकी मार्केट में काफी तेजी आई है. रिपोर्ट्स बताती है देश में इस समय 68.8 फीसदी पेट्रोल, करीब 18 फीसदी डीजल जबकि 11 फीसदी के करीब CNG वाहन है. इसमें 2.4 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन भी है. लेकिन हाल फिलहाल CNG के दामों में जो उछाल आया है उसने कंपनियों के साथ-साथ आम आदमी के बजट को बिगाड़कर रख दिया है. आखिर ऐसा क्या कारण है कि पिछले कुछ ही सालों में CNG के दाम 70 फीसदी से ज्यादा दाम बढ़ चुके है. 

कटौती की वजह से बढ़े CNG के दाम

गाड़ी का सफर दिन-प्रतिदिन महंगा होता जा रहा है. गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली CNG की कीमतें भी बढ़ती जा रही है. इसके पीछे का कारण सरकार द्वारा की गई गैस में कटौती बताई जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा है कि सरकार ने शहरी गैस वितरकों को सस्ती घरेलू नेचुरल गैस के अलॉट मेंट में भारी कटौती की है, जिससे कंपनियों को महंगी गैस खरीदनी पड़ रही है और कस्टमर को CNG स्टेशन पर महंगी गैस मिल रही है और इसका असर सीधा आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है.

आम आदमी की जेब पर पड़ा असर

इसको आसान भाषा में ऐसे समझ सकते है कि रोजाना ट्रांसपोर्टेशन में CNG गाड़ियां ज्यादा चलती है. गांवों से लेकर शहरों में अब CNG लोडर ज्यादा दिखने लगे है. जैसे सब्जियों को गांवों से लाना ले जाना, राशन पानी में इस्तेमाल होने वाली आटा-दाल से लेकर रोजमर्रा की चीजें ट्रांसपोर्ट के माध्यम से गली नुक्कड़ की दुकानों पर लोडर के जरिए पहुंचती है. जिसका किराया भी लगातार बढ़ता जा रहा है. उसका असर आपकी-हमारी जेब पर पड़ रहा है क्योंकि CNG अगर महंगी है तो किराया भाड़ा भी महंगा होगा ही. लेकिन CNG के महंगे होने की वजह APM गैस की कटौती है.

दरअसल सरकार शहर के गैस डीलर्स को मूल्य नियंत्रित घरेलू गैस यानी एपीएम गैस अलॉट करती है. ये सस्ता गैस कोटा होता है जो गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को सरकार की ओर से मिलता है. गैस डिस्ट्रीब्यूटर CNG की बिक्री खाना पकाने के लिए घरों, वाहनों के लिए फ्यूल के रूप में करते हैं. तेल कंपनियों से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि सस्ते गैस कोटा में कटौती से इसकी कीमतें प्रभावित हो सकती हैं. हालांकि, अधिकारियों का ये भी कहना है कि खाना पकाने के लिए CNG की आपूर्ति पर सरकार के फैसले का असर नहीं होगा. बता दें कि APM गैस का इस्तेमाल CNG और उर्वरक बनाने में होता है.

CNG बिक्री में APM गैस की हिस्सेदारी घटी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शहरों के गैस कंपनियों की CNG बिक्री में APM गैस की हिस्सेदारी अक्टूबर में 88 फीसदी से घटकर करीब 80 फीसदी रह गई.  गैस डिस्ट्रीब्यूटर के मुताबिक दिसंबर के दूसरे हफ्ते में हिस्सेदारी गिरकर 75-76 फीसदी रह जाएगी. बता दें कि पिछले साल के आखिर में गैस कंपनियों की सीएनजी बिक्री में एपीएम गैस की हिस्सेदारी 90 फीसदी से ज्यादा थी.
जो कटौती एपीएम गैस में हुई है उसका उपयोग यूरिया बनाने में किया जा रहा है. ऐसा दावा मीडिया रिपोर्ट्स में किया जाता है. यहां तक की ये भी दावा है कि यूरिया बनाने में एपीएम का उपयोग ज्यादा होता है और हाल फिलहाल के कुछ दिनों में यूरिया की डिमांड में भी तेजी आई है जिसके चलते सरकार ने एपीएम में कटौती की है और CNG के दामों में इजाफा होता जा रहा है.
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक एपीएम अलॉटमेंट में कटौती ‘अस्थायी’ है. ये कटौती ONGC के कम उत्पादन की वजह से की जा रही है. ONGC सप्लाई बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है.
कम APM अलॉटमेंट का मतलब है कि कंपनियों को अन्य जगह से महंगी घरेलू गैस खरीदकर बढ़ी हुई मांग को पूरा करना होगा.
मौजूदा समय में APL गैस की 6.5 डॉलर की तुलना में घरेलू गहरे समुद्री गैस की बिक्री 9.96 प्रति MMBTU जिसे (ब्रिटिश थर्मल यूनिट) कहते है उस पर हो रही है. लंबी ड्यूरेशन के कॉन्ट्रैक्ट में इंपोर्टेड गैस की कीमत लगभग 11-12 डॉलर है.

चीन में सबसे ज्यादा चलते हैं CNG से वाहन

Wikipedia की मानें तो ईरान, पाकिस्तान, अर्जेंटीना, ब्राज़ील और चीन में दुनिया में CNG से चलने वाले वाहनों की संख्या सबसे अधिक है. वहीं भारत में राजधानी दिल्ली और अन्य बड़े शहरों जैसे अहमदाबाद, मुंबई, पुणे और कोलकाता के साथ-साथ लखनऊ,वाराणसी, कानपुर जैसे शहरों में प्राकृतिक गैस वाहनों का तेजी से उपयोग किया जा रहा है. पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण दक्षिण अमेरिका, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है. हालांकि भारत में CNG के बढ़ते दामों ने सबको परेशान कर दिया है. CNG के बढ़े हुए दामों का असर टैक्सी और कैब सर्विस पर काफी देखने को मिल रहा है. जब से CNG के दामों ने आसमान छूना शुरू किया है, ओला-उबर की राइड भी काफी महंगी हो गई है. 8 फरवरी 2021 में जो रेट 49.40 प्रति किलो थे वो अब 90 रुपये से ऊपर हो गए है. यानी 85 फीसदी से ज्यादा CNG दाम पिछले दो साल में बढ़े है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारत का Total Fuel Consumption में Natural Gas की हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत है. इस 6 फीसदी का 56 प्रतिशत भारत इंपोर्ट करता है. ये इंपोर्ट खास कर क़तर, रूस, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे जैसे देशों से होता है. कुएं से पहले गैस निकाली जाती है फिर उसे Liquid किया जाता है और फिर समुद्री रास्ते से ये गैस भारत पहुंचती है. इस वजह से इसे लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG कहा जाता है. भारत लाकर इसे पीएनजी और सीएनजी में बदल दिया जाता है. इसका इस्तेमाल कारखानों, बिजली घरों, CNG वाहनों और रसोई घरों में होता है.

इंटरनेशनल मार्केट में CNG के दामों में इजाफा 


इंटरनेशनल मार्केट में भी CNG के दामों में इजाफा दिखा है. पश्चिमी देशों में घरों को गर्म रखने के लिए नेचुरल गैस की सप्लाई की जाती है. पिछले साल की तुलना में यूरोप या ब्रिटेन में इस साल नेचुरल गैस की कीमत 5 गुना बढ़ चुकी है. ग्लोबल मार्केट में नेचुरल गैस के भाव में अब तक 6 गुना वृद्धि दर्ज की जा चुकी है. जिसका असर भारत में भी देखने को मिला है. दिल्ली में 75 रुपये किलो जबकि यूपी के लखनऊ में 93.36 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रही है.

 

 

 

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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