स्पोर्ट्स फेडरेशन्स में राजनेताओं या उनके करीबियों की पकड़ , ये है असली वजह

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हाल ही में पहलवान और कुश्ती संघ विवाद को लेकर इंडियन एक्सप्रेस में खबर प्रकाशित हुई, जिसमें बताया गया कि कुश्ती संघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह के कई करीबी रिश्तेदार फेडरेशन में अभी भी अच्छे पदों पर काबिज हैं। जिसके बाद अब सवाल ये उठ रहा है कि कुश्ती के अलावा कितने ऐसे फेडरेशन हैं, जिसमें राजनेता या तो उनके करीबी लोग महत्वपूर्ण पदों पर काबिज़ हैं। तो चलिए इस स्टोरी में आपको बताते हैं कि किन खेल संघों के टॉप पोजिशन पर राजनेता या तो उनके करीबियों की पकड़ है।

पिछले कुछ दशकों में अगर गौर करें तो भारतीय खेल संघों में काफी कुछ बदल सा गया है। पूर्व खिलाड़ी की जगह राजनेता और बड़े बिजनेसमैन स्पोर्ट्स फेडरेशन में दिलचस्पी लेने लगे हैं। केंद्र या राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ होने के चलते फेडरेशन में इनकी एंट्री आसानी से हो जाती है। सोचने वाली बात ये है कि फेडरेशन में इनके आने के बाद से बढ़ते करप्शन के मामले और खिलाड़ियों के परफॉर्मेंस में लगातार कमी देखने को मिल रही है। आज के समय में बैडमिंटन, क्रिकेट, हॉकी, टेबल टेनिस समेत कई खेलों पर नेताओं का पूरी तरह से कब्जा है।  

अगर सबसे पहले बात कुश्ती की करें तो...विवादों में घिरे सांसद ब्रजभूषण सिंह लगातार 3 बार से इसके अध्यक्ष का पद संभाल रहे थे। इनका बेटा करण भूषण सिंह समिति का उपाध्यक्ष और दोनों दामाद फेडरेशन के अहम पदों पर काबिज थे। बृजभूषण सिंह के अलावा किसी का भी पहलवानी से कोई नाता नहीं रहा है। बृजभूषण से पहले हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे और कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा के पास अध्यक्ष पद की कुर्सी थी। इनका भी कुश्ती से दूर तक कोई नाता नहीं रहा है।

वहीं बात क्रिकेट की करें तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव के पद पर हैं। BCCI सचिव से पहले जय शाह गुजरात क्रिकेट संघ के कई अहम पदों पर रहे हैं। वहीं कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला इसके उपाध्यक्ष हैं। इसके अलावा भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष पद पर NCP नेता शरद पवार और मौजूदा समय के खेल मंत्री अनुराग ठाकुर भी रह चुके हैं। इनमें से किसी ने भी राज्य स्तर पर एक भी मैच नहीं खेला है।   

इसी तरह बैडमिंटन में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं। आर्चरी फेडरेशन के बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा प्रेसिडेंट हैं। टेबल टेनिस फेडरेशन में हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की पत्नी मेघना चौटाला प्रेसिडेंट हैं। इसी तरह नेशनल रायफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट रनिंदर सिंह हैं, जो कुछ दिनों पहले बीजेपी में शामिल हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे हैं। वहीं कबड्डी में राजस्थान कांग्रेस के नेता रहे स्व जर्नादन सिहं के बेटे तेजस्वी सिंह इसके अध्यक्ष हैं। 

अब सवाल ये उठता है कि क्या किसी सरकार या कोर्ट ने इन राजनेताओं को फेडरेशन में आने से रोकने की कोशिश तक नहीं की। तो बता दें पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली एक इंटरव्यू में कह चुके हैं कि वो नेताओं को खेल संघों से दूर रखने के लिए क़ानून लाने वाले थे, लेकिन उन पर यथास्थिति ना बदलने को लेकर दबाव डाला गया

वहीं सुप्रीम कोर्ट की ओर से जस्टिस आर एम लोढा की अगुवाई में गठित समिति भी सिफ़ारिश कर चुकी है कि सरकारी नौकरों और मंत्रियों को क्रिकेट बोर्ड से दूर रखा जाए। जिसके जवाब में खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा था कि नेताओं के पास देश में अलग-अलग खेल संघों की कमान संभालने की पूरी क्षमता है।

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