भारत की वो दो सड़कें जो चीन के लिए बनीं सरदर्द, जिससे दुश्मन की हर हरकत पर रहेगी नजर

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चीन का LAC को लेकर जो रवैया रहा है, वो नया नहीं है। चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता और कोई न कोई ऐसी हरकत करता है।जिससे दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहे।  अब चाहे गलवान में चीनी सैनिकों से दो-दो हाथ हो या अरुणाचल प्रदेश के तवांग और डोकलाम झड़प। इस बीच भारत ने लाइन ऑफ कंट्रोल पर चौकसी की तैयारी कर ली है। मोदी सरकार लगातार एलएसी पर ऐसे प्रोजेक्टों पर काम कर रही है जिसके बाद से भारत अब चाल बाज चीन के हर हरकत पर नजर रख सकेगा।

पूर्वी लद्दाख हो या अरुणाचल LAC के हर मोर्चे पर चीन को माकूल जवाब देने की भारत तैयारी कर रहा है। चीन की हरकतों और घुड़कियों से डरे और झुके बिना हिंदुस्तान LAC के दुर्गम इलाकों में पहुँच कर आसान बनाने में जुटा हुआ है। अब भारत भी एलएसी पर चुशूल से देमचौक तक 135 किलोमीटर लंबा हाइवे बना रहा है। जो आगे आने वाले दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा। इस हाइवे के जरिए चीन को काउंटर करना भारत के लिए आसान होगा। क्योंकि ये हाइवे एलएसी के साथ-साथ सिंधु नदी से लेकर लेह में भारत-चीन सीमा के करीब तक जाएगा। 

इस हाइवे को बनाने के जिम्मा सीमा सड़क संगठन यानी BRO को दिया गया है। इसमें 400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इस सड़क को CDFD रोड के नाम से भी जाना जाता है। सड़क की चौड़ाई 7.45 मीटर होगी। इस हाइवे में 3 अहम पुल होंगे। बता दें कि चुशुल वही इलाका है जहां साल 1962 में रेजांग ला की लडाई लड़ी गई थी। वहीं डेमचोक की बात करें, तो ये भी भारत और चीन की झड़पों का गवाह रहा है। भारत की प्लानिंग ये भी है कि इस नई वाली सड़क की मदद से भारतीय सेना के अपने हथियारों और जवानों को जल्द से जल्द LAC के पास पहुंचा सकेगा।

इसके साथ ही भारत की एक और सड़क ने चीन को परेशान कर रखा है। ये सड़क LAC से महज 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित  दौलत बेग ओल्डी इलाके तक पहुंचाती है। श्योक वैली और दारबुक से जोड़ने वाली सड़क को DSDBO रोड के नाम से जाना जाता है। करीब 16,600 फीट पर बनी इस सड़क से लेह और काराकोरम आपस में जुड़ते हैं। DSDBO रोड की लंबाई करीब 254 किलोमीटर है। ये सड़क साल 2019 में बनकर तैयार हुई।

दौलत बेग ओल्डी भारत का सबसे उत्तरी कोना है और वहां तक एक सड़क का होना भारत के लिए वाकई अहम है। अक्साई चीन की सीमा रेखा के बराबर चलने वाली DSDBO सड़क LAC से सिर्फ 9 किमी की दूरी पर है। इस सड़क की वजह से भारत अक्साई चीन, चिप चैप नदी से सटे इलाकों तक सीमाओं को मैनेज कर सकता है। इस सड़क के जरिए सेनाओं की जल्द तैनाती और हथियार पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

इस रोड के जरिए तिब्बत जिनजियांग हाईवे तक भारतीय सेना का एक्सेस मुमकिन हो जाता है। भारत ने दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में अपने C-130 J सुपर हरक्युलिस को इस सेक्टर की एयरस्ट्रिप पर उतारा चुका है। जिसके बाद से चीन परेशान है। देश की सुरक्षा के हिसाब से दोनों सड़क हमारे लिए काफी स्ट्रेटजिक रोड है। इसी रोड के बनने के बाद से चीन बार-बार LAC को पार करके घुसपैठ की कोशिश कर रहा है।

 

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