तीस्ता नदी पर तीन देशों का ट्रायंगल, चीन का एंगल क्या है?

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भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी कंजर्वेशन प्रोजेक्ट पर बातचीत चल रही है. इसे लेकर बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने पीएम नरेंद्र मोदी से बीते शनिवार मुलाकात भी की. जिसमें दोनों देशों के बीच सहमति बनी और ऐलान किया गया कि भारत अब बांग्लादेश की तीस्ता नदी के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट में बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है. जिसे अब कूटनीतिक रूप से चीन की बड़ी हार माना जा रहा है. कैसे उससे पहले आपको इस तीस्ता नदी के पूरे मसले पर बात करते हैं.


भारत और बांग्लादेश एक दूसरे के साथ 54 नदियां साझा करते हैं. इनमें से एक है तीस्ता नदी, लगभग 4 सौ किलोमीटर लंबी ये नदी हिमालय के पौहुनरी ग्लेशियर से निकलती है. जो सिक्किम से सटा हुआ है. यहां से तीस्ता पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश चली जाती है, जहां आगे ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है. नदी का 3 सौ किलोमीटर से ज्यादा बड़ा हिस्सा हमारे, जबकि सौ किलोमीटर से कुछ ज्यादा हिस्सा बांग्लादेश में है.

सिक्किम की पूरी लंबाई में बहने वाली तीस्ता नदी को राज्य की जीवन रेखा माना जाता है. पश्चिम बंगाल के कई जिलों के किसान तीस्ता नदी के पानी पर निर्भर रहते हैं. वहीं, बांग्लादेश में भी इस नदी से काफी मदद मिलती है. बांग्लादेश के 14 फीसदी इलाके सिंचाई के लिए इस नदी के पानी मिलता है.


यही तीस्ता नदी का जल विवाद भी है क्योंकि तीस्ता नदी का आधे से ज्यादा हिस्सा भारतीय सीमा में बहता है, जबकि एक-चौथाई बांग्लादेश में. और पड़ोसी देश का कहना का है कि उसे नदी के पानी का 50 फीसदी मिले, खासकर सूखे मौसम में ताकि पानी की जरूरत पूरी हो सके. भारत का प्रस्ताव है कि बांग्लादेश को 37.5 दिया जाए, जबकि 42.5 फीसदी भारत के खुद के पास रहेगा, वहीं बाकी हिस्सा नेचुरली फ्लो करेगा. फिलहाल पश्चिम बंगाल में सिंचाई और मछली पालन जैसे कामों के लिए तीस्ता से नहरें जाती हैं, और आगे भी ऐसी योजनाएं हैं. बांग्लादेश इस बात पर नाराजगी जताता रहा कि नहरें होने पर उसपर पहुंच रहा नदी का पानी और कम हो जाएगा.


इस पर पश्चिम बंगाल की सीएम का कहना है कि जल-बंटवारे की वजह से बंगाल में कटाव, बाढ़ और गाद की समस्याएं बढ़ने लगीं. ऐसा नहीं है कि ये विरोध पहली बार है. साल 2011 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह की ढाका यात्रा के दौरान ये समझौता होना था. टीम में ममता भी शामिल थीं, लेकिन न केवल उन्होंने जाने से इनकार कर दिया, बल्कि समझौता भी टल गया. उनका कहना था कि इससे बंगाल के उत्तरी हिस्से में पानी घट जाएगा. इसकी वजह ये है कि गंगा के बाद तीस्ता पश्चिम बंगाल की दूसरी बड़ी नदी है. आरोप है कि इसपर बांध बनाने से पानी का बहाव सीमित हो जाएगा.


अब तीस्ता रिवर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट के तहत भारत से एक तकनीकी टीम बांग्लादेश जाएगी, जहां स्टडी के बात कई चीजें तय होंगी. इसमें नदी के जल का मैनेजमेंट और उसके संरक्षण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना शामिल है. ये योजना अच्छी-खासी खर्चीली हो सकती है.


दोनों देशों के बीच तीस्ता नदी पर बनी सहमति, चीन को मिली एक बड़ी हार के तौर पर देखा जा रहा है. तीस्ता नदी प्रोजेक्ट में चीन लंबे समय से दिलचस्पी दिखाता रहा है. चीन ने बांग्लादेश को लुभावना प्रपोजल तक दे दिया था कि वो इस प्रोजेक्ट के कुल खर्च का 15 प्रतिशत खुद वहन करेगा, जबकि बाकी खर्च कर्ज होगा. इसके पीछे चीन की सोच ये थी कि  अगर बांग्लादेश बीजिंग को हामी भर दे तो उस देश से सटी भारतीय सीमा पर उसकी मौजूदगी बढ़ जाएगी.


दरअसल, शेख हसीना सरकार तीन साल पहले ‘तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना’ लाई थी. परियोजना का मकसद नदी की सफाई करना और उसका पुराना स्वरूप वापस लाना था. इसमें मानसून के अतिरिक्त पानी को रोकने के लिए एक बड़े जलाशय बनाना और पास के शहरों में चौड़ी सड़कें बनाना भी शामिल है. इस प्रोजेक्ट की संभावित लागत एक अरब डॉलर यानी कि 8300 करोड़ रुपए आंकी गई है.
साल 2020 में ही चीन ने तीस्ता प्रबंधन और संरक्षण परियोजना में अपनी दिलचस्पी जाहिर की थी. फिर दिसंबर 2023 में, चीनी राजदूत ने ढाका में एक सम्मेलन में कहा कि चीन ने कम लागत में नदी के प्रबंधन का प्रस्ताव बांग्लादेश को दिया है. हालांकि, अभी तक इस पर शेख हसीना की सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया था.


क्रॉस-बॉर्डर रिवर इश्यू दो पड़ोसी देशों में आम है. भारत और बांग्लादेश से लेकर भारत और नेपाल के बीच भी नदियों को लेकर विवाद रहा. लेकिन तीस्ता नदी हमारे लिए काफी अहम है, खासकर इसलिए कि चीन भी इसमें दिलचस्पी ले रहा है. बीजिंग इसपर भारी रकम लगाने को यूं ही तैयार नहीं. दरअसल, प्रोजेक्ट साइट चिकन नेक के करीब है. ये पश्चिम बंगाल में लगभग 28 किलोमीटर का वो हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर को बाकी देश से जोड़ता है. इसके पास बांग्लादेश और नेपाल भी हैं. ऐसे में अगर चीन किसी भी तरह ढाका को अपनी तरफ मोड़ ले तो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकता है.

 
 

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