भुखमरी से परेशान नॉर्थ कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग को मिसाइल टेस्टिंग के लिए ये दो देश करते हैं मदद

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सनकी तानाशाह किम जोंग और उनके देश नॉर्थ कोरिया को लोग गजब-गजब फरमान या खतरनाक मिसाइलों की टेस्टिंग के लिए जानते हैं। लेकिन अब यहां कि चर्चा कुछ और कारणों से हो रही है। गरीबी और भुखमरी की चपेट में यहां की बड़ी आबादी त्रस्त है। हालात इतने खराब हैं कि नॉर्थ कोरिया ने अपने सैनिकों की खुराक को भी आधा कर दिया है। इस बीच सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इतनी खराब स्थिती के बावजूद नॉर्थ कोरिया ने दो बैलिस्टिक मिसाइलों की टेस्टिंग की है। अब सवाल उठता है कि इतनी खराब स्थिती में उसके पास मिसाइल को बनाने और टेस्टिंग करने के लिए पैसा कहां से आता है?

बीते कुछ सालों से नॉर्थ कोरिया कोरोना महामारी, यूएन प्रतिबंध और फूड क्राइसिस से त्रस्त है। इन सबके बावजूद नॉर्थ कोरिया आए दिन अलग-अलग तरह की बैलिस्टिक मिसाइलों की टेस्टिंग कर रहा है। जिनमें छोटी दूरी से लेकर कई हजार किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद कर मार करने वाली मिसाइलें हैं।

अनुमान के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया के पास करीब एक हज़ार बैलिस्टिक मिलाइलें हैं। मिसाइलों पर आने वाले खर्चे पर अमेरिका की रिसर्च एण्ड एनालिसिस कॉरपोरेशन की सू किम बताती हैं, नॉर्थ कोरिया के एक सिंगल मिसाइल टेस्ट की लागत लगभग 80 करोड़ रुपये हो सकती है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ कोरिया मिसाइलों को टेस्ट करने के लिए पैसों का इंतजाम दो तरीकों से करता है।

नार्थ कोरिया के मद्दगार देश

पहला अमेरिका के दुश्मन देश चीन और रूस इसकी मदद करते हैं। चीन तो नॉर्थ कोरिया का सबसे बड़ा ट्रेड पॉर्टनर भी है, जो इसकी इकोनॉमी और मिलिट्री डेवलपमेंट के लिए करोड़ों देता है। दूसरा तरीका साइबर क्राइम की तरफ इशारा करता है। कहा जाता है कि नार्थ कोरिया ने साइबर आर्मी की फौज तैयार की है। जो क्रिप्टोकरेंसी की चोरी करती है। फिर इसे डॉलर के हिसाब से बेचती है। फिर उस रकम का इस्तेमाल मिसाइल बनाने में किया जाता है।

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