केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने BharOS का परीक्षण किया, आईआईटी मद्रास ने लॉन्च किया

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दुनिया भर में इस्तेमाल किये जाने वाले मोबाइल फोन्स में आमतौर पर दो ही तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल होता है। जिसके चलते एक डुओ मोनोपोली देखने को मिलती है। वहीं भारत ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन में एक बड़ा कदम उठाते हुए, खुद का मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम BharOS बनाया है। IIT मद्रास की इनक्यूबेटेड फर्म J and K ऑपरेशंस ने BharOS नाम का एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम लॉन्च किया है। BharOS प्राइवेसी-फोकस्ड ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिसे कमर्शियल ऑफ-द-शेल्फ हैंडसेट्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी का दावा है कि नए स्वदेशी OS से देश के 100 करोड़ मोबाइल यूजर्स लाभ उठा सकेंगे।

आईआईटी मद्रास और प्रवर्तक टेक्नोलॉजीस फाउंडेशन ने मिलकर जे एंड के प्राइवेट लिमिटेड, एक तरह का स्टार्ट अप बनाया है, जिसे कंपनीज़ एक्ट 2013 के सेक्शन 8 जो कि नॉट फॉर प्रोफिट कंपनी के संबंध में है। उसके अंतर्गत आईआईटी मद्रास ने स्टेबलिस किया है। आप भी सोच रहे होंगे कि फिर इसको फंडिंग कहां से मिलती है, सेंट्रल गवर्नमेंट का  डिपार्टमेंट फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी है इसके अंतर्गत एक मिशन चलाया गया जिसका नाम है national mission on interdisciplinary cyber physical system इसके जरिए इन्हें फंड दिए गए थे और इनकी तरफ से ही ये ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया गया है। 

अगर आप एंड्राइड मोबाइल खरीदते हैं तो उसमें कई प्रीइंस्टाल्ड एप आते हैं, आपको उनकी जरूरत है या नहीं, ये मैटर नहीं करता। इसी सिलसिले में कॉम्पडीशन कमीशन ऑफ इंडिया ने गूगल की मोनोपोली के खिलाफ सुप्रिम कोर्ट में शिकायत दर्ज की थी। जिसमें हाल ही में गूगल पर 1337 करोड़ का फ़ाइन भी लगाया गया है, खैर वो एक अलग मामला है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐसा कुछ नहीं होगा। BharOS के डेवलपर्स के मुताबिक, नया ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर्स को ज्यादा कंट्रोल और फ्लेक्सिबिलिटी देता है। इसके अलावा ये नो डिफॉल्ट ऐप्स के साथ आता है, जिससे यूजर्स को ज्यादा स्टोरेज मिलेगा। यूजर्स एंड्रॉयड फोन की तरह ही ‘नेटिव ओवर द एयर’ यानी कि NOTA अपडेट भी प्राप्त कर सकेंगे। (GFX OUT) अपडेट ऑटोमैटिकली फोन पर डाउनलोड हो जाएंगे, इसलिए यूजर्स को अपडेट को मैन्युअली इंस्टॉल और लागू करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, BharOS के स्वदेशी होने का दावा किया गया है, ये एंड्रॉयड ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट (AOSP) पर बेस्ड होगा। 

AOSP भी काफी हद तक Android वर्जन पर बेस्ड है और इसीलिए इसे Google मैंटेन करता है। गूगल AOSP के लिए नियमित सुरक्षा बैकपोर्ट देता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि ये Android की जगह नहीं लेगा, लेकिन अगर दावा किया जाता है कि ओएस इंडस्ट्री के लिए है, तो इसे एंड्रॉयड सिस्टम के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल डेवलपर्स ने ये खुलासा नहीं किया है कि वो किसके साथ साझेदारी करने की योजना बना रहे हैं और ये OS किस फोन पर बूट करेगा। हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि BharOS कड़ी सिक्योरिटी और प्राइवेसी की जरूरत रखने वाले organizations को provide किया जाएगा।

BharOS प्राइवेसी सेंट्रिक होगा, जिसका मतलब है कि ये किसी भी थर्ड-पार्टी ऐप को डाउनलोड करने की परमिशन नहीं देगा। ये अपनी निजी ऐप स्टोर सेवाएं (PASS) लेकर आएगा। PASS क्यूरेटेड ऐप्स पेश करेगा, जो organization की सिक्योरिटी और प्राइवेसी स्टैंडर्ड को पूरा करती हैं। BharOS के डेवलपर्स का कहना है कि ओएस फोन में डिफॉल्ट ऐप्स नहीं देगा। लेकिन जहां तक सुविधाओं की बात है, तो अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। क्या यह Android जैसा प्राइवेसी डैशबोर्ड, पर्सनलाइज ऑप्शन और बैटरी हेल्थ जैसे फीचर देगा? फिलहाल ऐसी कई जानकारियां अभी सामने आनी बाकी हैं।

 

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