बेमौसम बारिश ने गर्मी से दी राहत, किसानों के अरमानों पर फेरा पानी

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देश में वैसे तो चुनावी माहौल की चर्चा चारों ओर है, लेकिन उत्तर भारत के कई राज्यों में बेमौसम बारिश की वजह से इन दिनों सावन वाली फीलिंग आ रही है। पहले मई का महीना आते-आते जबर्दस्त गर्मी होने लगती थी, लेकिन इस साल मई के महीने में भी कभी बारिश तो कभी ओले भी देखने को मिल रहे हैं, ऐसे में मौसम खुशनुमा सा है, लेकिन उत्तर और मध्य भारत के कई इलाकों में बेमौसम बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, चना, गन्ने की खड़ी फसलों और मौसमी सब्जियों को नुकसान हो रहा है। क्या आपको पता है इन महीनों में बेमौसम बारिश होने के पीछे वास्तव में क्या वजहें हैं और इसका कृषि पर क्या असर पड़ेगा?

पिछले साल इन महीनों में अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री दर्ज किया गया था। अगर इस समय की बात करें तो दिन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री के आसपास है। इस दौरान ज्यादा गर्मी का भी अहसास नहीं हो रहा है। सामान्य तौर पर इस महीने में बारिश नहीं होती है, लेकिन बेमौसम बारिश होने की वजह पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना माना जा रहा है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, भू मध्य सागर क्षेत्र से उठे तूफानों के चलते पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है और इसके चलते उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत में बादल बरस रहे हैं। फसलों के अलावा ये बारिश जानवरों के लिए भी आफत बनकर आई है। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान के कुछ हिस्सों में तापमान गिरने के साथ बारिश की संभावना है। ये समय किसानों के लिए बेहद ही समस्याओं से घिरा हुआ हो सकता है।

क्या होता है पश्चिमी विक्षोभ?

पश्चिमी विक्षोभ या वेस्टर्न डिस्टरबेंस ऐसा तूफान है, जो भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी क्षेत्रों में आता है, भूमध्य सागर, अटलांटिक महासागर और कुछ हद तक कैस्पियन सागर से वातावरण की उच्च परतों में नमी लाते हैं, जिस वजह से अचानक आंधी और बारिश होती है। ये हिम के रूप में उत्तर भारत, पाकिस्तान और नेपाल पर पड़ती है।

फसलों में भरा पानी

बेमौसम बारिश से किसानों को नुकसान पहुंच रहा है। तेज हवाओं और बारिश से फसल खेतों में बिछ गई और कटी फसलों में पानी भर गया है। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में पक कर खड़ी गेहूं और दलहनी फसलों पर पानी पड़ने से काफी नुकसान हुआ है। साथ ही साथ मसूर, चना, मटर, आलू समेत कई फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। दरअसल, पंजाब में ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने पहले ही खेती की करीब लगभग चार लाख हेक्टेयर जमीन को प्रभावित किया है। गेहूं के अलावा, रबी फसल, अंगूर और आम जैसे फलों सहित कई अन्य फसलें, गोभी, शिमला मिर्च, और भिंडी जैसी सब्जियों की खेती को भी नुकसान पहुंचा है। मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में खेत और बागवानी दोनों फसलों को नुकसान पहुंचा है। नासिक, महाराष्ट्र में करीब 5-10 प्रतिशत प्याज की फसल खराब हो गई है। इस वजह से अंगूर की उपज में 8-10 प्रतिशत की गिरावट आने की उम्मीद है।

ग्लोबल वार्मिंग भी बेमौसम बारिश की अहम वजह

वहीं मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, लगातार बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग भी बेमौसम बारिश होने की एक अहम वजह है। ग्लोबल वार्मिंग से ध्रुवीय सिरे पर बर्फ पिघल रही है, जिस वजह से समुद्र का जल स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है और इससे कई तटीय क्षेत्रों में बारिश हो रही है। इसके अलावा अप्रैल और मई में हो रही बैमोसम बारिश का एक कारण जलवायु परिवर्तन भी है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन भी बेमौसम बारिश होने की वजह है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव की पुष्टि तभी की जा सकती है जब ये प्रवृत्ति 30 सालों तक जारी रहे।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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