Varun Gandhi की BJP से कटी Ticket, SP से ठोंकेगे Pilibhit में चुनावी ताल या Amethi से चलेंगे दांव ?

Home   >   चुनावपुर   >   Varun Gandhi की BJP से कटी Ticket, SP से ठोंकेगे Pilibhit में चुनावी ताल या Amethi से चलेंगे दांव ?

19
views


सियासी गलियारों में इन दिनों बीजेपी सांसद वरुण गांधी की चर्चा खूब छाई हुई है. हाल ही में बीजेपी की आई लिस्ट में दो बार के सांसद वरुण गांधी का टिकट काट दिया गया जबकि उनकी मां मेनका गांधी को सुल्तानपुर से दोबारा सीट दी गई है. जिसके बाद सवाल उठने लगे कि वरुण गांधी अब क्या करेंगे. कोई कह रहा है कि वरुण गांधी पीलीभीत से सपा से दावा ठोक सकते है तो कोई कह रहा है कि अमेठी से इस बात चुनाव लड़ेंगे. हालांकि अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वरुण गांधी किस सीट से चुनाव लड़ेंगे.

बता दें पीलीभीत से बीजेपी ने जितिन प्रसाद को टिकट दिया है. इस सीट पर दो बार से वरुण गांधी बीजेपी से सांसद है. साल 2019 के चुनाव में वरुण ने सपा के हेमराज वर्मा को ढाई लाख से ज्यादा मतों से हराया था. इस चुनाव में वरुण को 7 लाख 4 हजार 549 वोट और हेमराज वर्मा को 4 लाख 48 हजार 922 मत मिले थे. इस बार सियासत का ऊंट किस करवट बैठता है और वरुण अपने सियासी भविष्य को लेकर क्या फैसला करते हैं. इस पर निगाहें बनी हुई है. हालांकि वरुण गांधी के पास अभी कई विकल्प है जिस पर वो अमल कर सकते है लेकिन बीजेपी से उन्हें किसी और सीट से भी टिकट मिलना अब असंभव है क्योंकि वरुण का टिकट कटने की मुख्य वजह उनका बीजेपी विरोधी रुख रहा. उन्होंने किसान आंदोलन से लेकर बेरोजगारी तक, तमाम मुद्दों पर पार्टी को घेरा. उन्होंने सबसे पहले 2016 में उत्तर प्रदेश में अपनो पोस्टर लगाकर पार्टी नेतृत्व को नाराज किया था. उन्होंने प्रयागराज में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने पोस्टर लगाए थे. इसे उनकी खुद को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने की कोशिश के तौर पर देखा गया था. लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में भी बीजेपी को घेरा था. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की गाड़ी के किसानों को कुचलने के मामले में भी वरुण ने बीजेपी से तीखे सवाल किए थे. सीएम योगी की खिलाफत करना भी वरुण की टिकट कटने की एक वजह रहा. दरअसल, योगी सरकार ने अमेठी में संजय गांधी अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया था. संजय वरुण के पिता थे. सोनिया गांधी इस अस्पताल को चलाने वाले संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की चेयरमैन थीं. वरुण ने इस कदम को "एक नाम के प्रति द्वेष" के कारण की गई कार्रवाई करार दिया था.

 हालांकि बीजेपी से टिकट कटने के बाद वरुण के भविष्य को लेकर 3 तरह की अटकलें चल रही हैं.

पहली ये कि वे पीलीभीत से निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं. उनके निजी सचिव ने चुनाव आयोग के कार्यालय से नामांकन के 4 सेट खरीदे थे, तभी से ये अटकलें लग रही हैं.

दूसरी अटकल ये है कि वो अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी में शामिल होकर पीलीभीत से लड़ सकते हैं. अखिलेश ने उनका पार्टी में स्वागत भी किया है.

तीसरी ये की वो अब अमेठी से चुनाव लड़ सकते है. जिसके पीछे उनके पिता का अमेठी से जुड़ाव है.

रिपोर्ट्स की मानें तो इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी ने अमेठी सीट से चुनाव लड़ते हुए ‘पॉलिटिकल डेब्यू’ किया था, लेकिन तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा. यहां से जनता पार्टी को जीत मिली. हालांकि 1980 में अमेठी में हुए लोकसभा चुनाव में संजय गांधी ने जीत का स्वाद चखा. लेकिन कुछ समय बाद एक हादसे में अचानक हुई मौत के बाद संजय के भाई राजीव गांधी ने भी यहां से ‘पॉलिटिकल डेब्यू’ की और जीत के साथ संसद पहुंचे. अमेठी में 1981 में हुए उपचुनाव में राजीव गांधी ने शरद यादव को हराया था. अमेठी सीट पर 1984 का चुनाव बेहद दिलचस्प रहा था क्योंकि पहली बार यहां पर गांधी परिवार आमने-सामने था. कांग्रेस के टिकट पर राजीव के सामने भाई संजय गांधी की पत्नी बतौर निर्दलीय मेनका गांधी मैदान में थीं. लेकिन चुनाव में राजीव गांधी को 3 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से जीत मिली थी.

 5 साल बाद 1989 के लोकसभा चुनाव में राजीव गांधी के सामने महात्मा गांधी के पौत्र राज मोहन गांधी मैदान में उतरे थे. एक बार फिर जीत राजीव के खाते में गई. 2 चुनावों के गैप के बाद अमेठी से गांधी परिवार की वापसी हुई और सोनिया गांधी ने 1999 के चुनाव में यहां से अपना पॉलिटिकल डेब्यू किया. संजय, राजीव के बाद सोनिया ने भी यहीं से अपना पॉलिटिकल डेब्यू किया. सोनिया ने चुनाव 1999 के चुनाव में बीजेपी के संजय सिंह को हरा दिया. सोनिया को 3 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से जीत मिली थी. हालांकि उन्होंने बाद में ये सीट छोड़ दी और अगले चुनाव 2004 में रायबरेली संसदीय सीट से चुनाव लड़ने लगीं.

गांधी परिवार से राहुल गांधी के रूप में 5वीं शख्सियत ने अपना पॉलिटिकल डेब्यू किया. 2004 के आम चुनाव में राहुल ने अपने पहले चुनाव में जीत हासिल की. 2009 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को 71 फीसदी से अधिक वोट मिले और लगातार दूसरी जीत हासिल की. 2014 के चुनाव में फिर से राहुल ने जीत की हैट्रिक लगाई. लेकिन 2019 में राहुल अपना पिछला प्रदर्शन नहीं दोहरा सके और बीजेपी की स्मृति ईरानी ने चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया.

कहा जा रहा है वरुण गांधी को अमेठी से चुनाव लड़ाने के लिए प्रियंका गांधी भी जोर लगाए हुई है. क्योंकि प्रियंका और वरुण के संबंध अच्छे रहे है. कुछ समय पहले चर्चा भी थी की प्रियंका वरुण को कांग्रेस में ला सकती है. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. हालांकि अब कयास लगाए जा रहे है कि वरुण गांधी को INDIA गठबंधन की ओर से अमेठी से उम्मीदवार बनाया जा सकता है.  सीट के समीकरण की बात करें तो अमेठी में सबसे ज्यादा वोटर्स अनुसूचित जाति के लोग है. यहां पर दलित वोटर्स की संख्या करीब 26 फीसदी है. जबकि 18 फीसदी ब्राह्मण वोटर्स हैं. 11 फीसदी क्षत्रिय और 10 फीसदी लोध और कुर्मी वोटर्स हैं. यादवों और मौर्य वोटर्स की संख्या भी अहम है. मुस्लिम वोटर्स की संख्या भी कम नहीं है और यहां पर इनकी संख्या करीब 20 फीसदी है.  राहुल गांधी ने तो अमेठी से चुनाव लड़ने से मना कर दिया है. अब उनकी जगह वरुण को टिकट मिलेगी या फिर किसी और को उम्मीदवार बनाकर उतारा जाएगा ये देखना दिलचस्प होगा. 


कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!