विलुप्त होने की कगार पर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट सरकार को दे चुका सलाह

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मौजूदा समय में इंडिया के स्कूलों में बच्चों को राष्ट्रीय पक्षी का नाम मोर बताया जाता है। लेकिन जब 1960 के दशक में किस पक्षी को नेशनल बर्ड का दर्जा दिया जाए, इस मुद्दे पर चर्चा चल रही थी तब बर्डमैन ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर पक्षी वैज्ञानिक सालिम अली ने मोर के बजाए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को राष्ट्रीय पक्षी बनाने का प्रस्ताव दिया था। उस वक्त बस्टर्ड नाम जुड़े होने की वजह से सालिम अली का ये प्रस्ताव ठुकरा दिया गया था। आज द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षी की चर्चा इसलिए हो रही है कि ये आज अपने अस्तित्व को लेकर संघर्ष करते दिख रह हैं।  

वैसे तो भारत में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सोन चिरैया नाम से फेमस है। लेकिन कई राज्यों में इसे अलग-अलग नाम से जाना जाता है। शुतुरमुर्ग जैसे दिखने वाले इस पक्षी को राजस्थान में गोडावण भी कहते हैं और वहां का ये राजकीय पक्षी भी है। साल 1970 के करीब देश में इनकी संख्या 1300 करीब थी और ये कई राज्यों में पाए जाते थे। लेकिन वर्तमान समय में उंगलियों से गिनकर इनकी संख्या बताई जा सकती है। क्योंकि वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में ये 200 ही बचे हैं। जिसमें से 150 सोन चिरैया गुजरात और राजस्थान में हैं।

इसके विलुप्त होने की वजह क्या है ये भी जान लिजिए...18 किलो वजनी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड घास के मैदानों के सिकुड़ने, बिजली के तारों की बढ़ती संख्या और अवैध शिकार है। घास का मैदान ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का प्राकृतिक आवास है। पानी के कमी की वजह में घास के मैदान सिकुड़ रहे हैं। इसके अलावा विलुप्त होने की एक वजह ये भी है कि सोन चिरैया साल में केवल दो ही अंडा देती है। जमीन पर घोसला होना के कारण इसके 50 फीसदी अंडे कुत्ते या दूसरे जानवर खा जाते हैं।

इस बीच अब सवाल ये उठता है कि क्या इन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए सरकार या किसी पर्यावरणविद ने कोई कोशिश नहीं कर रहे हैं। तो बता दें...2011 में सोन चिरैया को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसपर कोर्ट ने सरकार को GIB यानी ग्रेट इंडियन बसटर्ड परियोजना शुरू करने की सलाह दी थी। इसके अलावा कोर्ट ने राजस्थान और गुजरात सरकार को बिजली के तारों को अंडरग्राउंड ले जाने और तारों पर बर्ड डायवर्टर लगाने का आदेश दिया था, पर जमीनी स्तर पर ये काम होते दिख नहीं रहा है। हालांकि 2019 में राजस्थान के जैसलमेर में इनकी जनसंख्या को बढ़ाने के लिए ब्रीडिंग सेंटर खोला गया है।