वो फिल्में कि जो Box Office पर नहीं कर पाईं धमाल, बाद में किया कमाल ।

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नायक, मेरा नाम जोकर, कागज के फूल, लक्ष्य ये वो चंद फिल्में हैं जिनको अलग-अलग डायरेक्टर ने बनाया, जो अलग-अलग समय में रिलीज हुईं, सभी फिल्मों में एक्टर भी सेम नहीं हैं फिर भी इन फिल्मों में एक बात कॉमन है। ये सभी फिल्में अपने समय में फ्लॉप साबित हुईं, लेकिन आज की जेनेरेशन इन फिल्मों को Cult और Iconic मानती है।

कागज के फूल (1959)

गुरुदत्त के दिल के सबसे करीब साल 1959 में आई फिल्म कागज के फूल जो अपने समय से कई साल आगे थी, गुरु दत्त को यकीन था कि लोग पर्दे पर एक डायरेक्टर की असल जिंदगी ज़रूर देखेंगे। लेकिन वे गलत साबित हुए। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी। लेकिन आज कागज के फूल को दर्शक Iconic मूवी मानते हैं।

गाइड (1965)

बॉलीवुड की पॉपुलर फिल्मों में से एक्टर देवानंद साहब की गाइड है, जो रिलीज होने के समय अपना प्रोडक्शन कॉस्ट तक रिकवर नहीं कर पाई। साल 1965 में आई फिल्म में देव आनंद और वहीदा रहमान का कैरेक्टर राजू और रोजी आज भी लोगों के दिलों पर‌ राज करते हैं।

मेरा नाम जोकर (1970)

ऐसे ही राज कपूर साहब के दिल के सबसे करीब साल 1970 में आई फिल्म मेरा नाम जोकर, जिसे बनाने के लिए उन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। फिल्म को बनाने में 6 साल लग गए, रिलीज के वक्त दर्शकों को इसका सब्जेक्ट समझ नहीं आया। लेकिन आज फ़िल्म को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में भारत की सबसे बेहतरीन फिल्मों के तौर पर दिखाया जाता है।

The Burning Train (1980)

भारत की ‘Speed’ मूवी The Burning Train। फिल्म को रिलीज के समय इंडिया की पहली डिजास्टर फिल्म का खिताब मिला। साल 1980 में आई फिल्म के डायरेक्टर रवि चोपड़ा को विश्वास था कि फ़िल्म कमाल करेगी। मल्टी-स्टारर इस फिल्म में एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा, इमोशंस, सब कुछ था, लेकिन फिर भी ये फ़िल्म कुछ खास नहीं कर पाई। लेकिन आज फिल्म को लोग पसंद करते है।

उमराव जान (1981)

साल 1981 में आई फिल्म उमराव जान रेखा की जिंदगी के बेहतरीन फिल्मों में एक मानी जाती हैं। फिल्म की छोटी सी छोटी चीज बेहद शानदार थीं लेकिन ये ज्यादा पैसे नहीं कमा पाईं थी। इसे लोग एक आर्ट फिल्म की तरह सपंद करते है। 

जाने भी दो यारों (1983)

कुंदन शाह की फिल्म जाने भी दो यारों जब 1983 में रिलीज हुई थी तो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई। उस समय रवि बासवानी को बेस्ट कॉमेडियन अवार्ड मिला था। लेकिन आज ये फिल्म बॉलीवुड की क्लासिक फिल्मों में आती है और दर्शकों की फेवरेट फिल्मों में से एक है।

अग्निपथ  (1990)

ऐसे ही विजय दीनानाथ चौहान यानी आमिताभ बच्चन को मुकुल आनंद की फिल्म अग्निपथ के लिए Best Actor का नेशनल अवार्ड मिला। ये वो फ़िल्म है, जो फ़्लॉप थी। 1990 में आई इस फ़िल्म को आज जब भी देखते हैं, तो यकीन नहीं होता कि इस फ़िल्म को लोग नापसंद कर सकते हैं।

जो जीता वही सिकंदर (1992)

अगर आप 90 के दशक में जन्मे हैं तो जो जीता वही सिकंदर फिल्म तो जरूर याद होगी। फिल्म का गाना पहला नशा आज भी लोगों को अपना दीवाना बना देता है। जब ये फिल्म रिलीज हुई थी तब सिर्फ मुंबई में ही अपना कमाल कर पाई लेकिन देश के दूसरे हिस्सों में फिल्म का जादू नहीं चल पाया।

अंदाज अपना-अपना (1994)

आमिर खान, सलमान खान, करिश्मा कपूर और रवीना टंडन स्टारर साल 1994 में आई फिल्म अंदाज अपना-अपना जिसके सीन्स और डायलॉग्स पर आज मीम्स बनते रहते हैं। वो रिलीज़ के बाद फ्लॉप साबित हुई थी। लेकिन अब इसे बेस्ट बॉलीवुड कॉमेडी फिल्म्स की लिस्ट में शामिल किया जाता है।

नायक (2001)

सबसे आखिरी में एक दिन के सीएम यानी अनिल कपूर की नायक फिल्म जो आज भी टीवी पर आती है तो लोग रिमोट से चैनल को चैंज नहीं करते है। लेकिन साल 2001 में आई फिल्म को क्रिटिक्स ने खराब बताया पर आने वाले समय में बात गलत साबित हुई।

स्वदेश (2004)

साल 2004 में आई आशुतोष गोवारिकर के बेहतरीन डायरेक्शन, एक अच्छी स्टोरी और शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार के होने के बावजूद स्वदेश फ्लॉप हो गई थी। लेकिन जब हम आज इस फिल्म को देखते हैं तो मोहम नाम के करेक्टर को भूल नहीं पाते।

लक्ष्य (2004)

इसी साल फिल्म लक्ष्य आई थी। फिल्म में रितिक रोशन की बेहतरीन एक्टिंग थी। तब फरहान अख्तर की फिल्म को ज्यादा तवज्जो नहीं मिली और इसे बेकार माना गया लेकिन बाद में ये दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में शामिल हो गई।

ऐसी ही तमाम फिल्म्स की फेहरिस्त लंबी हैं, जो बाद में लोगों के जेहन में बस गईं, लेकिन अपनी रिलीज के वक्त कमाल नहीं दिखा पाईं थी।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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