वोे यश चोपड़ा थे, जिन्होंने शाहरुख खान को 'किंग ऑफ रोमांस' और अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' बनाया

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यशराज फिल्म्स की नींव रखने वाले यश चोपड़ा ने इंजीनियरिंग को छोड़कर फिल्म जगत को चुना, जिसमें उनकी मां ने भी उनका साथ दिया, जानिए यश चोपड़ा के बारे में

साल 1951,  यश चोपड़ा 19 साल के थे और  उनके बड़े भाई बीआर चोपड़ा तब डायरेक्टर थे। एक भाई कैमरामैन,  एक भाई डिस्ट्रीब्यूटर भी थे। पिता लाल विलायती राज चोपड़ा चाहते थे कि घर में कोई तो हो, जो कुछ अलग करे, तो उन्होंने यश चोपड़ा को जालंधर से बॉम्बे भेज दिया। कहा "जाओ! पासपोर्ट बनाओइंग्लैंड जाओ और इंजीनियर बनकर आओ।" पिता की बात मानकर यश चोपड़ा पासपोर्ट तो बनवाने लगें, लेकिन उन्हें इंजीनियरिंग के बारे में कुछ भी नहीं पता था।

यश चोपड़ा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं तो एक खीला (कील) भी दीवार में नहीं लगा सकता था, आज भी नहीं लगा सकता हूं। फिर एक दिन उन्होंने तय किया कि वो दिल की ही सुनेंगे वो फिल्म डायरेक्टर बनेंगे। इसकी वजह थी उन्हें फिल्में देखना पसंद था और उन पर बड़े भाई बीआर के व्यक्तित्व का काफी असर भी था।

आज कहानी यश चोपड़ा की। जो किंग ऑफ रोमांस के नाम से मशहूर हुए। 27 सितंबर, साल 1932 लाहौर में यश चोपड़ा का जन्म हुआ। पढ़ाई लाहौर से हुई। साल 1945, परिवार लाहौर से पंजाब के लुधियाना आ गया। यश चोपड़ा इंजीनियरिंग के लिए लंदन जाने वाले थे, लेकिन फिल्मों में करियर बनाने का सपना लिए वो मुंबई आ गए। इससे पहले बड़े भाई बीआर चोपड़ा भी 50 के दशक में मुंबई आए थे और वो बीआर फिल्म्स के बैनर तले फिल्में बनाते। यश चोपड़ा भी अपने भाई के साथ काम करना चाहते थे। आँखों में ये सपना लिए जब यश चोपड़ा जब घर से चले तो मां ने 2-2 रुपये के नए नोट दिए जो कुल 200 रुपये थे। कहा ‘तुम भाई के साथ तो रहोगे लेकिन जरुरत पड़ेगीये रुपये हैं और मेरा आशीर्वाद हैं, मेरा दिल कहता है जो भी तुम करोगे ठीक ही करोगे, मेरा और तुम्हारे पिता का भी आशीर्वाद है।’

यश चोपड़ा ने बीआर फिल्म्स में नौकरी शुरू कर दी। फिल्म 'नया दौर' में सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया। बीआर चोपड़ा को अपने भाई में प्रतिभा नजर आई और उन्हें अगली फिल्म का निर्देशन करने के लिए कहा। साल 1959 में यश चोपड़ा ने निर्देशक के तौर पर डेब्यू किया और 'धूल का फूल' बनाई। इसके बाद उन्होंने बीआर फिल्म्स के लिए 5 फिल्मों का निर्देशन किया। साल 1970। यश चोपड़ा की शादी पामेला से हुई। जो एक प्लेबैक सिंगर थीं। दोनों का साथ 53 का रहा। 20 अप्रैल, साल 2023 75 साल की उम्र में पामेला का निधन हो गया। 

यश चोपड़ा को शादी के बाद ख्याल आया कि अब उन्हें अपने भाई की छत्रछाया से निकलकर अपना कुछ शुरू करना चाहिए। हालांकि, वो अपने भाई का साथ छोड़ने के लिए श्योर नहीं थे। फिर पत्नी पमेला ने यश चोपड़ा से कहा कि ‘अगर आपका दिल कहता है, तो आप जरूर आगे बढ़ें। फिर साल 1970 में यश चोपड़ा ने यशराज फिल्म्स की नींव रखी। पर ये रास्ता आसान नहीं था उन्हें बतौर फिल्म प्रोड्यूसर खुद को साबित करना था। फिर उन्होंने मशहूर डिस्ट्रीब्यूटर गुलशन राय की मदद से साल 1973 में अपनी पहली फिल्म 'दाग' बनाई। फिल्म में राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर और राखी ने लीड रोल में थे।

नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री 'द रोमांटिक्स' में पामेला चोपड़ा ने बताया था कि 'दाग' की रिलीज के पहले यश कई दिनों तक सोए नहीं थे। लेकिन रिलीज होने के बाद ये फिल्म काफी हिट रही थी। वक्त गुजरा यश चोपड़ा ने न सिर्फ 'दीवार', 'कभी कभी', 'डर', 'चांदनी', 'सिलसिला', 'दिल तो पागल है', 'वीर जारा' जैसी कई बेहतरीन और रोमांटिक फिल्में दी, बल्कि पर्दे पर रोमांस और प्यार को नए मायने दिए हैं।

ये वो वक्त था जब यश चोपड़ा का भी बुरा दौर आया। उनकी फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही थीं। वो निराश थे। उन्होंने साल 1988 की विजय बनाई। जो एक मसाला फिल्म थी। पर ये भी फ्लॉप हुई। इसके बाद फैसला किया अब वो बिना फिल्मी गणित के सिर्फ दिल से फिल्म बनाएंगे। फिर उन्होंने चांदनी पर काम शुरू किया। ये फिल्म उनकी आखिरी उम्मीद थी। साल 1989 की फिल्म चांदनी न सिर्फ हिट हुई बल्कि उसने रोमांटिक फिल्मों के लिए दरवाजे भी खोल दिए।

यश चोपड़ा की फिल्मों की कई खासियतें थीं। इसके पीछे वजह थी कि इन फिल्मों में यश चोपड़ा की पत्नी पामेला का प्रभाव था। शायद ये पामेला के विचारों का असर था कि उनकी फिल्मों में महिला किरदारों में मजबूती दिखने लगी। उनकी फिल्म 'कभी कभी' की स्क्रिप्ट पामेला ने ही तैयार की थी। फिल्म में राखी, वहीदा रहमान और नीतू सिंह लीड रोल में थे। साथ में अमिताभ, शशि कपूर और ऋषि कपूर के भी बेहद अहम रोल थे। यश चोपड़ा की फिल्मों से कई स्टार सुपरस्टार बन गए।

ये 70 का दशक था। पूर्वी पाकिस्तान में अराजकता और इंदिरा गांधी के लगाए गए आपातकाल से देश में तनाव था। ये गुस्सा उन दिनों फिल्मों में भी दिखा। यशराज की फिल्मों में भी आम आदमी का गुस्सा और विद्रोह नजर आया और अमिताभ बच्चन 'एंग्री यंग मैन' का चेहरा बनकर उभरे। अमिताभ की लीड रोल वाली 5 फिल्में 'दीवार' (1975), 'कभी-कभी (1976), 'त्रिशूल' (1978), 'काला पत्थर' (1979) और 'सिलसिला' (1981) यश चोपड़ा की बेहतरीन फिल्में हैं। वहीं, बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान के साथ बतौर डायरेक्टर यश चोपड़ा ने 'डर', 'दिल तो पागल है' और 'वीर जारा' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाईं। शाहरुख खान की फिल्म 'जब तक है जान’ यश चोपड़ा की आखिरी फिल्म थी।

वहीं, द मोस्ट आईकॉनिक फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे..के डायरेक्टर भले ही आदित्य चोपड़ा हो, लेकिन ये फिल्म भी यशराज फिल्म्स के बैनर तले ही बनी थी। हम शाहरुख खान को किंग ऑफ रोमांस कहते हैं, लेकिन रोमांटिक फिल्मों का जादूगर यश चोपड़ा को कहा जाता। उनकी आखिरी फिल्म ‘जब तक है जान’ भी रोमांटिक फिल्म थी। साल 2001 में दादा साहेब फाल्के और 2005 में पद्म भूषण नवाजे गए। फिल्मों की शूटिंग के लिए यश चोपड़ा को स्विट्जरलैंड सबसे ज्यादा पसंद था। अक्टूबर 2010 में स्विट्जरलैंड में उन्हें वहां एक अवॉर्ड से भी नवाजा गया। स्विट्जरलैंड में उनके नाम पर एक सड़क भी है और एक ट्रेन भी चलाई जाती है। साल 2012। फिल्म ‘जब तक है जान’ बनाने के बाद यश चोपड़ा 80 साल के हुए तो उन्होंने कहा ये उनकी अंतिम फिल्म है और अब वो रिटायर होकर परिवार को वक्त देना चाहते हैं।

इसके बाद यश चोपड़ा रिटायर तो हो गए लेकिन परिवार को वक्त नहीं दे पाए। सिनेमा को कई परिभाषाएं सीखाने वाले यश जी का 21 अक्टूबर, 2012 को डेंगू से उनका निधन हो गया था। यश चोपड़ा के दो बेटे आदित्य और उदय चोपड़ा हैं, बड़े बेटे आदित्य चोपड़ा भी डायरेक्टर हैं, जोकि यश चोपड़ा की यशराज फिल्म्स को आगे बढ़ा रहे हैं। आदित्य चोपड़ा ने साल 2001 में इंटीरियर डिजाइनर पायल खन्ना से शादी की, लेकिन दोनों साल 2009 में अलग हो गए, फिर साल 2014 में उन्होंने एक्ट्रेस रानी मुखर्जी से शादी की। वहीं, यश चोपड़ा के छोटे बेटे उदय चोपड़ा एक्टर हैं। वो 50 साल के हैं, लेकिन उन्होंने अभी शादी नहीं की है।

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