Hathras Wale Baba के चश्मे में छिपा है कौन सा गहरा राज़, क्या है पूरी सच्चाई ? इस रिपोर्ट में देखिए

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क्या चश्मे के अंदर से कोई मुर्दों में जान फूंक सकता है ?, क्या चश्मों के जरिए किसी भी बीमारी का इलाज संभव है ? क्या रंगीन चश्मा पहनने से दिव्य दृष्टि मिल जाती है ? ये सवाल इसलिए क्योंकि हाथरस वाले 'भोले बाबा' को लेकर ऐसा खुलासा हुआ है जिसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे. सोचिए जो इंसान खुद बीमार हो, कीडनी का मरीज हो क्या वो दूसरों का इलाज कर सकता है और वो भी चश्मे से, ये सुनकर शायद यकीन न हो लेकिन ये बात सच है. भोलेबाबा की रहस्यलोक के नए-नए खुलासे रोज हो रहे है इस बीच बाबा के चश्मों को लेकर नई जानकारी सामने आई है. ऐसा बताया जाता है कि नारायण साकार हरि उर्फ ‘भोले बाबा’ हर मंगलवार को रंगीन चश्मा पहनता था. इससे वो भक्तों को दिव्य दृष्टि से ठीक करने का दावा करता था. बाबा के चश्मों के साथ कई ऐसी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर छाई हुई है जिसने इंटरनेट का पारा चढ़ाया हुआ है.

 

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बाबा नारायण साकार हरि के अलग-अलग चश्मों की अलग-अलग कहानी हैं. नीले रंग के चश्मे से वो बीमार लोगों को दिव्य दृष्टि डालकर ठीक करने का दावा करता था. हरे रंग के चश्मे से भूत-प्रेत उतारने का दावा करता था. भक्तों का मानना है कि कि बाबा अपनी आंखों से जब ये चश्मा उतारते थे तो उनकी दिव्य दृष्टि से लोग ठीक हो जाते थे. इसके लिए उनके सेवादारों द्वारा पहले से ही मरीज चिन्हित करके आगे बैठाए जाते थे. ब्राउन और काला चश्मा, जिनके जीवन में कुछ ठीक न चल रहा, उनको शांति देने के लिए बाबा लगाता था. वहीं आम दिनों में बाबा नजर का चश्मा लगाता था.

 

यहां तक की नारायण साकार के लिए एक भजन भी बना है जिसे खुद उनके भक्तों ने बनाया है. "नारायण हरि ब्रह्मांड रचैया!! चक्र सुदर्शन धारी हैं..." ये भजन भोले बाबा के भक्तों ने उसके लिए बनाया है. इस बीच एक नया खुलासा भी हुआ है कि बाबा उल्लू की आंख का काजल लगाता है. ऐसा दावा NDTV की रिपोर्ट्स में किया गया है. जिसके मुताबिक- उसके पुराने भक्तों ने ये दावा किया है कि वो तंत्र साधना करता था ताकि जो भी सत्संग में आए वो सम्मोहित हो जाए. कई भक्तों ने दावा किया है कि उसकी आंखों में कुछ ऐसा है, जिसकी वजह से भक्त उनकी ओर चले आते हैं. ये बाबा लोगों को अपनी भक्ति के जादू में ऐसे जकड़ लेता था कि जो बाबा ने कह दिया वो लोगों के लिए पत्थर की लकीर बन जाता था. लोग बाबा के बारे में कुछ भी गलत सुनने को तैयार नहीं होते थे. आस्था के चक्कर में भक्त भक्ति और अंधविश्वास में फर्क नहीं कर पाते थे.

NDTV रिपोर्ट्स की मानें तो नारायण साकार हरि खुद के पास सुदर्शन चक्र होने का दावा करता है. वो खुद को विष्णु का अवतार बताता है, जो प्रलय भी ला सकता है. यही नहीं सत्संग में बाबा एडिटिंग करके हाथ के पास चक्र भी घुमा कर भी दिखाता था. उसके सेवादार सब जगह प्रचार करते थे कि उसके पास चक्र है और वो उसे घुमा भी सकता है. लोग उसके पास भूत बाधा की समस्याएं लेकर भी पहुंचते थे. भक्त कहते हैं कि बाबा उनकी समस्याओं का समाधान करते थे. दावे तो ये भी हैं कि बाबा भूत को बुलाकर भरी सभा में धूल चटवाते थे. भक्तों को बाबा पर इतना विश्वास है कि वो आश्रम के बाहर लगे हैंडपंप के पानी को चमत्कारी बताते है.  दरअसल नारायण साकार के रहस्य लोक के बाहर 6 हैंडपंप लाइन से लगे हैं. धाम पर आने वाले उनके अनुयायी हैंडपंप चलाकर पानी पीते हैं. उनका दावा है कि इन हैंडपंप का पानी चमत्कारी है. बाबा के एक भक्त ने हाल ही में एक मीडिया से बात करते हुए कहा था कि उसकी पत्नी को पथरी की दिक्कत थी, लेकिन नारायण हरि का नाम लेने मात्र से ही पथरी पेशाब के रास्ते बाहर निकल गई और महिला ठीक हो गई. 

 

वहीं एक शख्स ने कहा कि आगरा के एक प्रोफेसर के बेटे को कुष्ठ रोग था. वो उसे बहादुरनगर धाम लेकर आए. बाबा ने अपने सेवादारों से प्रोफेसर के बेटे को हैंडपंप के पानी से नहलाने के लिए कहा और चार दिन में उसका कुष्ठ रोग ठीक कर दिया. एक बंदे ने दावा किया कि उसे बिजली का करंट लगा था, ​वो सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती था और बाबा की कृपा से ही बचा. ये कहने पर कि सैफई के अस्पताल में उसका इलाज तो डॉक्टर ने किया होगा, उसने कहा- डॉक्टर तो सिर्फ माध्यम थे, कृपा बाबा की थी,​ जिस कारण मेरी जान बची. यहां तक की कई ऐसे भी भक्त मिले जिन्होंने दावा किया कि नारायण हरि के धाम के बाहर लगे हैंडपंप का पानी पीने से कैंसर ठीक हो गया, दिल का रोग सही हो गया. एक शख्स ने कहा कि मैं मरते-मरते बचा हूं. अगर ये पानी नहीं होता तो मैं आज जिंदा नहीं होता. हाथरस, मैनपुरी, एटा, इटावा, अलीगढ़ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में उनके अनुयायी भोले बाबा के चमत्कार के किस्से सुनाते नहीं थकते. वे उन्हें ईश्वर का अवतार मानते हैं. हालांकि कुछ ऐसे भी लोग आश्रम के पास रहते है जिनका कहना है कि भक्तों के ये सारे दावे फर्जी है और अंधविश्वासी से ज्यादा कुछ नहीं. 

अब मुर्दों में जान फूंकने का दावा करने वाला भोले बाबा ठीक उस वक्त अपनी जान बचाकर भाग रहा था, जब सबसे ज्यादा मुर्दों को उसका इंतजार था. फिलहाल बाबा का राइट हैंड जो मुख्य आयोजन कर्ता जिसका नाम देवघर है उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. भोले बाबा ने खुद भी मीडिया के सामने आकर इस बात को कहा है कि दो जुलाई की घटना के बाद से ही बेहद दुखी हूं. प्रभु हमें दुख से उबरने की शक्ति दे. प्रशासन भरोसा रखे कि जो भी उपद्रवकारी हैं, वो बख्शे नहीं जाएंगे. अब बाबा का तो न तो FIR में नाम है और न ही यूपी पुलिस की जुबान पर. आगे और क्या अपडेट सामने आता है ये देखने वाली बात होगी

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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