क्या है AFSPA? कब और क्यों देश में हुआ था लागू। अब Manipur से क्यों हटा।

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साल 1942 जब देश में भारत छोड़ो आंदोलन ने जोर पकड़ा हुआ था। डरी हुई अंग्रेजी हुकूमत ने आंदोलन का सिर कुचलने के लिए एक अध्यादेश पारित किया। जिसका नाम था अफस्पा’ (AFSPA) यानी आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट। आजादी मिलने के बाद भी ये कानून  देश के कई हिस्सों में लागू करना पड़ा। समय-समय पर इस एक्ट को निरस्त करने की मांग उठती रही है। हाल ही केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के कई जिलों से इस एक्ट को हटा दिया है। सवाल ये हैं इस कानून की क्यों जरूरत पड़ी और अब इसे क्यों हटाया जा रहा है।

देश आजाद होने के बाद साल 22 मई 1958 को पूर्वोत्तर के राज्यों में आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (AFSPA) को लागू करना पड़ा। ये एक फौजी कानून है जिसे “डिस्टर्ब” क्षेत्रों में लागू किया जाता है, ये कानून सुरक्षा बलों और सेना को कुछ विशेष अधिकार देता है। वे बिना वारंट के किसी की भी जांच कर सकते हैं उनकी गिरफ्तारी कर सकते है। किसी भी संदिग्ध ठिकानों को शक के आधार पर तबाह कर सकते हैं।

समय-समय पर एक्ट को निरस्त करने के लिए लोग मांग उठाते रहे हैं। मणिपुर की ऑयरन विमेन इरोम शर्मिला 16 साल तक भूख हड़ताल पर बैठी रही थीं। इसको लेकर नॉर्थ-ईस्ट में समय-समय पर आंदोलन होते रहे हैं। मानवाधिकार संगठन एक अरसे से मांग करते रहे हैं कि इस एक्ट को खत्म कर दिया जाए। साल 2004 में तो इस एक्ट के खिलाफ महिलाओं ने न्यूड प्रदर्शन भी किया। उन्होंने आरोप लगाया था कि अर्धसैनिक बलों ने एक महिला का कथित तौर पर गैंगरेप किया था। या गया था।

हाल ही के दिनों में गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर के मोइरांग के इंडियन नेशनल आर्मी के हेड क्वाटर का दौरा किया था उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के इस राज्य में शांति है, उग्रवाद का सफाया हो गया है। मणिपुर के छह जिलों से AFSPA को हटा दिया गया है। असम में 23 जिलों से पूर्ण रूप से और एक जिले से आंशिक ये एक्ट हटाया गया है। नागालैंड के 07 जिलों से इसे खत्म किया गया है। वहीं मेघालय से 2018 में, त्रिपुरा से 2015 में और 1980 के दशक में मिजोरम से ये एक्ट पूरी तरह हटा लिया था। पंजाब और चंडीगढ़ भी इसके दायरे में आए। हालांकि साल 1997 में इस कानून को वहां से खत्म कर दिया गया। लेकिन अरुणाचल और साल 1990 से जम्मू और कश्मीर में ये कानून लगा है। 

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पिछले कुछ समय से अफस्पा को हटाने के संकेत दे रही थी। उन्होंने मणिपुर के विधानसभा चुनावों के दौरान भी इसे हटाने की बात कही थी। अफस्पा हटाने की जो वजह केंद्र सरकार ने बताई है, वो ये है कि पूर्वोत्तर में सुरक्षा की दृष्टि से बेहतर हो रही है और यहां हो रहा विकास भी काफी बेहतर है। 

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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