सुशांत सिंह राजपूत का क्या था वो ग्रेड A कनेक्शन? जिसने SSR को इंजीनियर से बना दिया एक्टर

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मैं बहुत छोटे शहर से आया हूं, लेकिन मैं ये कह सकता हूं कि शहर ही छोटे-बड़े हो सकते हैं। इंसान तो कभी छोटे-बड़े नहीं हो सकते हैं। सपने डिसाइड करते हैं कि फ्यूचर में तसल्ली होगी कि नहीं, ऐसा सुशांत सिंह राजपूत का कहना था। एक समय पर एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के लिए सपने का मतलब मुंबई था।

साल 2013 में फिल्म काई पो छे से अपने कैरियर की शुरुआत करने के बाद सुशांत सिंह राजपूत ने बेस्ट एक्टर और कई नामचीन अवार्ड्स अपने नाम कर लिए। फिल्मी सफ़र की शुरुआत से पहले वो टीवी जगत के एक पापुलर और चहेते कलाकार थे। अपने महज 7 साल के अपने फिल्मी सफ़र में सुशांत ने अलग-अलग बेहेतरीन रोल्स निभाए हैं।

आज के दिन 21 जनवरी 1986 में पटना में केके सिंह के घर चार बहनों के बीच सुशांत सिंह राजपूत का जन्म हुआ। सुशांत सिंह की बहन श्वेता सिंह ने बर्थडे विश वीडियो में बताया कि उनके घर में दोनों को गुडिया और गुलसन बुलाया जाता था। जब दोनों छोटे थे, तो छुट्टियों के दौरान अपने गराज में जाकर फन के लिए एक्टिंग किया करते थे। सुशांत सिंह ने पहले इंजीनियरिंग की। उन्होंने इंटरेंस में 7वीं रैक हांसिल की थी और फिजिक्स में नेशनल ओलपियाड भी जीता था। इसके साथ ही  सुशांत सिंह का इंटरेस्ट एस्ट्रोनायड और बाद में एयर फोर्स में पाइलेट बनने का भी था।

लेकिन बाद में उन्हें अपने कॉलेज शो के दौरान एक्टिंग ज्यादा अच्छी लगी। इसलिए उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई को बीच में ही छोड़कर एक्टर बनने का सपना सजाया। हालांकि बाद में सुशांत सिंह राजपूत ने प्लेन उडाना भी सीखा और वो इकलौते ऐसे एक्टर रहे, जिन्हें नासा ने मिशन मून 2024 के लिए ट्रेन किया था।

वैसे, सुशांत से जब एक बार पूछा गया कि उन्हें कब लगा कि वो एक्टिंग के लिए बने है, तब उन्होंने बताया कि कॉलेज टाइम पर एक एक्टिंग पर आधारित डिप्लोमा कोर्स में उन्हें ए ग्रेड मिला था, जिसके बाद सुशांत को लगा कि उनमें कुछ तो बात है और उन्होंने अपना कैरियर इंजीरियरिंग से एक्टिंग की तरफ शिफ्ट किया।

सुशांत सिंह राजपूत का ज़िंदगी को लेकर गहरा आब्जरवेशन और फिर कुछ अलग कर गुजरने की चाहत उन्हें अलग बनाती। डेब्यू के बाद उन्होंने पीके, ब्योमकेश बक्शी और शुद्ध देशी रोमेंस फिल्म में काम किया। लेकिन एम.एस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी से एक एक्टर के तौर पर उनकी छवि को बड़ी पहचान मिली। फिर केदारनाथ, छिछोरे और सोनचिरइया फिल्म से अपने अभिनय का लोहा मनवाया। फिल्म दिल बेचारा एक्टर के कैरियर की आखिरी फिल्म थी। जो उनके न रहने के बाद रिलीज हुई थी।

कितना बड़ा इस्तेफाक रहा कि अपनी आखिरी फिल्मों में ज़िदगी की सीख देने वाले सुशांत की इस दुनिया में न रहने की वजह खुदखुशी सामने आई। सुशांत की एचीवमेंट्स की बात करने जाएं तो एक लंबी लिस्ट है। बैकग्राउंड एक्टर्स से लीड रोल के सफर में उन्होंने काफी मेहनत की। लेकिन अवार्ड से कहीं ज्यादा बड़ी उपलब्धि उनके फैंस रहें। 34 साल की उम्र में वो लोगों के रोल मॉडल बन गए।

उनकी मौत के बाद नेपोटिज्म से लेकर बॉलीवुड कंटेट पर एक लंबी बहस छिड़ गई। फिल्म इंडस्ट्री की कई दबी हुई चीजें दर्शकों के बीच आई। लोगों ने कंटेट के साथ एक्टर और बैकग्राउंड के साथ कई टॉपिक्स पर खुलकर और साफ बात करना शुरु किया।

वैसे, सुशांत के ज़िदगी को लेकर कई बड़े प्लान थे। चांद पर जमीन लेना, घर में टेलिस्कोप से अंतरिक्ष को निहारना और अपनी चाहतो की बकेट लिस्ट बनना। शायद ही कभी ऐसी बातें किसी एक्टर के लिए सुनने को मिलती हैं। उनके जानने वालो का कहना है कि सुशांत को काफी म्चयोर और एक डीप थिंकर थे।

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