जब विनोद खन्ना ने महेश भट्ट से कहा – ‘ओशो तुम्हे बर्बाद कर देंगे’

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‘70 के दशक में अपने करियर की शुरुआत में मैं एक साधारण सा इंसान था। मैंने 'विश्वासघात' और 'मंजिलें और भी हैं' जैसी फिल्में बनाई, जो फ्लॉप हो गईं। इन सबसे परेशान होकर मैंने अध्यात्म का रास्ता चुना। ओशो उस वक्त पुणे में काफी पॉपुलर हो रहे थे। मैंने खुद को उन्हें समर्पित कर दिया और पांच वक्त ध्यान लगाता था।’

ये शब्द फिल्म डायरेक्टर महेश भट्ट के है। महेश भट्ट की जिंदगी एक खुली किताब की तरह है। खुद को नाजायज बताने से लेकर लव लाइफ तक, लोगों को उनके बारे में सब कुछ पता है। अब महेश भट्ट ने कुछ नए सनसनीखेज खुलासे किए हैं, वो भी ओशो रजनीश और विनोद खन्ना को लेकर।

एक दौर ऐसा था जब ओशो रजनीश का बहुत प्रभाव था, बॉलीवुड के तमाम सेलिब्रिटी भी उनके अनुयायी बने। फिल्ममेकर महेश भट्ट उन चंद लोगों में हैं जो सबसे पहले उनसे प्रभावित हुए। हालांकि ये रिश्ता लंबा नहीं चला। अरबाज खान के शो ‘द इनविंसिबल’ में महेश भट्ट ने अपनी लाइफ के कुछ डार्क सीक्रेट्स बताएं। उन्होंने ओशो रजनीश और विनोद खन्ना पर अपना करियर बर्बाद करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है।

महेश भट्ट ने बताया कि ……

‘अपने करियर की शुरुआत में वो अपने लिए सही रास्ता तलाश रहे थे। उसी दौरान वे स्वयंभू गुरु 'ओशो' रजनीश से मिले। कुछ समय बाद ही उन्हें एहसास हुआ कि ये जो भी हो रहा है ये सब गलत है। मैं रजनीश से मिलने सलीम खान के साथ भी गया था और वे ओशो से भगवान श्री रजनीश बन गए थे. मैंने ओशो से पूछा कि क्या आपके पास मुझे देने के लिए शब्दों के अलावा कुछ है, क्योंकि लोग अकेले हैं, दुखी हैं. अगर आपके पास रोशनी है तो क्या आप मुझे दे सकते हैं, अगर नहीं तो यहां क्या हो रहा है. 15 मिनट का अपॉइंटमेंट करीब डेढ़ घंटे चला था. वो मुझे वापस बुलाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन मैं उनके प्यार में नहीं पड़ा। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और ओशो ने उन्हें बर्बाद करने की धमकी दे डाली।’

महेश भट्ट ने ही विनोद खन्ना को ओशो से मिलवाया था। विनोद खन्ना रजनीश से इतने प्रभावित हुए कि अपने करियर के पीक पर होते हुए भी सब कुछ छोड़कर वो अमेरीका जाकर ओशो आश्रम में बस गए। इधर महेश भट्ट का मोह भंग हो चुका था और उन्हें ओशो की दी गई माला भी कमोड में बहा दी।

डायरेक्टर महेश भट्ट ने आगे बताया कि

'विनोद खन्ना ने मुझे फोन किया और कहा कि भगवान बहुत गुस्से में हैं। तुमने माला तोड़कर कमोड में फेंक दी। तो मैंने कहा कि, 'हां मैंने ऐसा ही किया है और ये सब बेकार है। मैं बेवकूफ हूं। इसपर विनोद खन्ना ने कहा कि ‘भगवान ने कहा है कि तुम वापस आ जाओ और खुद आकर माला उन्हें दो, नहीं तो ओशो तुम्हें बर्बाद कर देंगे।'

महेश भट्ट ने आगे बताया कि

‘रजनीश ने विनोद खन्ना से कहा कि मैंने महेश पर बहुत मेहनत की है लेकिन उनमें वो बात नहीं जो तुममें है। मैंने विनोद से कहा कि वो मेरे खिलाफ तुम्हारा इस्तेमाल कर रहे हैं। बावजूद इसके मेरे और विनोद के रिश्ते में कभी कोई कड़वाहट नहीं आई’.

ऐसा मानने वालों की कमी नहीं है कि अगर विनोद खन्ना विवादास्पद आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक ओशो के चक्कर में न पड़ते तो शायद बॉलीवुड का इतिहास कुछ और होता। शायद अमिताभ बच्चन इतनी आसानी से सुपरस्टार नहीं बनते और विनोद खन्ना का करियर उनके आसपास ही होता। ओशो का जादू विनोद खन्ना के सिर चढ़कर बोला। ओशो ने विनोद खन्ना की सिर्फ जिंदगी ही नहीं बदली बल्कि शायद उनसे सुपरस्टार का तमगा भी छीन लिया।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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