Crude Oil सस्ता होने के बाद भी Petrol-Diesel के दाम क्यों नहीं घट रहे ?

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Petrol, Diesel के Prices को लेकर अक्सर बहस होती रहती है. पेट्रोल की कीमत जब भी बढ़ती है खाने-पीने के सामान से लेकर ट्रांसपोर्टेशन वगैरा सबकुछ महंगा हो जाता है और जब गवर्नमेंट से सवाल पूछे जाते है तो एक दूसरे को ब्लेम करते है, एक ओर इंटरनेशनल मार्केट में Crude Oil के Price में गिरावट दिख रही है तो वहीं दूसरी ओर भारत में पेट्रोल के दामों में हाल फिलहाल स्थिरता बनी हुई है, ज्यादातर कंपनियां छप्पड़फाड़ कमाई कर रही है तो वहीं पब्लिक मंहगा पेट्रोल खरीद रही है. रिपोर्ट्स की मानें तो तीन सरकारी तेल कंपनियों का मुनाफा करीब 33 हजार करोड़ से बढ़ जाने का अनुमान है लेकिन हाल फिलहाल तेल के दाम स्थिर बने हुए है. क्रूड ऑयल जोकि इंटरनेशनल मार्केट में सेम प्राइज पर मिलता है उसके बाद भी हर कंट्री में पेट्रोल के प्राइजेस अलग-अलग क्यों होते है यहां तक की इंडिया नेपाल में भी ऑयल के प्राइज में क्यों अंतर होता है, कंपनी और सरकार को पेट्रोल-डीजल की रेट पर कितना मुनाफा हुआ डिटेल में समझते है.

इस प्रोसेस के जरिए मिलता पेट्रोल-डीजल


पेट्रोल डॉयरेक्ट हमें जमीन नहीं मिलता, इसका एक प्रोसेस होता है. पहले क्रूड ऑयल को ढूंढकर Sub Surface से Surface में लाया जाता है. ये क्रूड ऑयल पहले Raw Form में निकलता है, फिर इसे रिफाइनरी तक पहुंचाया जाता है. इन रिफाइनरी में पेट्रोल, डीजल और बाकी तेलों को ट्रांसफॉर्मेड किया जाता है. India में 23 रिफाइनरी है. इंटरनेशनल मार्केट से क्रूड ऑयल को खरीदकर भारत लाया जाता है और फिर यहां से पेट्रोल बनता है.जिसे पेट्रोलियम कंपनियां जैसे IOC, BPCL, HPCL समेत कई कंपनियां है जो हमारे-आप तक पेट्रोल-डीजल को पहुंचाती है. इसके लिए वो सरकारों को टैक्स देती है. यानी केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को. फिर डीलर अपना कमीशन बनाता है और जनता को महंगा पेट्रोल-डीजल मिलता है.

महंगाई से लेकर GDP तक है Oil से कनेक्ट 


ऐसा नहीं पेट्रोल-डीजल से गाड़ियां ही चलती है इससे आप Directly और Indirectly सब तरह से जुड़े हुए है. आसान शब्दों में कहे तो ट्रांसपोर्टेशन का Base यही होता है, महंगाई से लेकर GDP हर एक चीज कनेक्ट होती है, जब पेट्रोल की कमी होती है. वैसे तो इंडिया में भी क्रूड ऑयल मिलता है लेकिन वो पर्याप्त मात्रा में नहीं है. इंडिया बड़े स्केल पर ऑयल को इंपोर्ट करता है, पूरे विश्व में 3 ऐसे देश है
US
Russia
Opec
इंटरनेशनल मार्केट में बैरल के हिसाब से क्रूड ऑयल मिलता है. 1 बैरल में करीब 159 लीटर ऑयल होता है.


According To रिपोर्ट्स


Base Price- ये वो होता है जो कंपनियां रिफाइनरी के बाद Set करती है.
Freight ETC यानी इसमें जो भी ट्रांसपोर्टेंशन का चार्ज लगता है वो
Price जो डीलर चार्ज करते है
Excise Duty- जो की सेंट्रल गवर्नमेंट लगाती है
Dealer Commision- ये डीलर का कमीशन होता है
Vat- ये स्टेट गवर्नमेंट लगाती है.
इसके बाद फाइनल होकर आपको पंप पर पेट्रोल मिलता है. इंडिया में All Over WorlD सबसे ज्यादा Tax लगता है यहां तक की जिन देशों को हम पेट्रोल देते है वहां पर पेट्रोल ज्यादा सस्ता है. जैसे- भारत और नेपाल को ही देख लिजिए.
भारत में इस समय पेट्रोल की कीमतें
96.72 दिल्ली में है.
इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बनी हुई हैं तब भी Prices में कोई कमी नहीं है. ऐसा नहीं की गवर्मेंट को फायदा नहीं हुआ. Excise Duty पर नजर डालें तो लाखों करोड़ों का सरकार को प्रॉफिट हुआ. लेकिन जनता का कोई भला नहीं किया गया.


पेट्रोल-डीजल से लाखों करोड़ की कमाई

साल              Excise Duty में कमाई
2018-19           2.10 लाख करोड़
2019-20           2.19 लाख करोड़
2020-21           3.71 लाख करोड़


जबकि हाल ही में संसद में एक लिखित जवाब में पेट्रोलियम राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने बताया था कि
भारतीय पेट्रोलियम सेक्टर की 15 बड़ी तेल-गैस कंपनियों से चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले 9 महीनों में यानी अप्रैल-दिसंबर के बीच सरकारी खजाने में 5.45 लाख करोड़ रुपए आए हैं, इसमें से 3.08 लाख करोड़ रुपए केंद्र सरकार के खजाने में और 2.37 लाख करोड़ रुपए राज्य सरकारों के खजाने में आए.
बता दें एक सरकारी कंपनी तो ऐसी है जिसे भारत सरकार बेचने की तैयारी में थी लेकिन कंपनी ने जबरदस्त मुनाफा कमाया, दरअसल भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, जो कि देश की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी है. पिछले फाइनेंशियल ईयर 2022-23 की जुलाई-सितंबर अवधि में कंपनी को 304 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था. अब साल भर में ही उसका प्रॉफिट जबरदस्त बढ़ा है. इतना ही नहीं इस साल अप्रैल-जून अवधि में भी कंपनी ने 10,550.88 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया है. हाल ही में मोदी सरकार के कैबिनेट मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगी.

वेनेजुएला में मिलता है सबसे सस्ता तेल

भारत में बिकने वाली माचिस की डिब्बी की कीमत के बराबर वेनेजुएला में ऑयल मिलता है, दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल फिलहाल वेनेजुएला में ही बिक रहा है. इसके बाद लिबिया, ईरान, अंगोला, अल्जीरिया, और कुवैत में सबसे सस्ता पेट्रोल मिल रहा है. 2019 में प्रतिबंध लगने से पहले भारत की तेल रिफाइन कंपनियां वेनेजुएला से नियमित तौर पर तेल आयात करती थी. लेकिन 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद वेनेजुएला से तेल आयात बंद हो गया था.आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2019 तक वेनेजुएला, भारत के लिए 5वां सबसे बड़ा तेल Supplier Country था. 2019 में वेनेजुएला ने भारत को लगभग 16 मिलियन टन कच्चा तेल Export किया था. यानी भारत ने लगभग 5.7 अरब डॉलर का तेल आयात किया था. भारत Crude oil का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Consumer है और अपनी 85 फीसदी से ज्याद आवश्यकता को पूरा करने के लिए Import पर Depend है, OPEC के सदस्य देशों में शामिल वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. वेनेजुएला इच्छुक खरीददार देशों को छूट की पेशकश कर रहा है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक, भारत ने साल 2021-22 में 212.2 मिलियन टन कच्चे तेल का आयात किया, जो पिछले साल में 196.5 मिलियन टन था. अप्रैल 2022-23 में तेल आयात निर्भरता लगभग 86.4% थी, जो एक साल पहले इसी अवधि में 85.9% रही थी. पिछले लगभग दो सालों में तेल बाजारों में अस्थिरता को देखते हुए, सरकार ने कहा है कि भारत जहां भी सस्ता तेल ले सकता है, वहां से खरीदेगा. हालांकि ऐसा दावा है चुनाव से पहले सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत दे सकती है

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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