लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस पर क्यों सख्त हुए अखिलेश यादव?

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आम चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने यूपी में 16 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। इस ऐलान ने सूबे की सियासत में खलबली मचा दी है। सबसे गौर वाली बात ये है कि  बीजेपी, जिसे 365 दिन चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी कहा जाता है। अखिलेश ने कही न कही उसे भी एक मैसेज देने की कोशिश की है कि वो यूपी की सियासी पिच पर फ्रंट-फुट पर बैटिंग कर रहे हैं। इसके अलावा कई राजनीतिक पंडित INDIA गठबंधन पर सवालिया निशान और कांग्रेस के लिए दूसरा झटका भी मान रहे हैं। क्योंकि पहला झटका अखिलेश ने तब दे दिया था, जब उन्होंने एक ट्वीट कर कांग्रेस को एक दायरे में सीमित कर दिया था कि वो बस 11 सीटें ले और चुनाव लड़े। इन दोनों ऐलानों के साथ ही अखिलेश यादव ने ये जरूर दिखा दिया कि यूपी में गठबंधन की गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर वो खुद हैं और रूट मैप डिसाइड कर रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस को इसका अंदाजा बिल्कुल नहीं था कि अखिलेश उन 3 सीटों पर भी अपने कंडीडेट्स का ऐलान कर देंगे, जिनपर कांग्रेस भी दावा कर रही थी। क्योंकि जिन 28 सीटों की लिस्ट कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को दी है, उसमें फरूखाबाद से सलमान खुर्शीद का नाम है। जो खुद उस कमेटी के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं जो समाजवादी पार्टी से सीटों का निगोसिएशन कर रही है। इसके अलावा वो फरूखाबाद से सांसद रह चुके हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। हालांकि, इसकी चर्चा तो तब से थी, जब नवल किशोर शाक्य को लेकर अखिलेश यादव काफी वक्त से फरूखाबाद में घूम रहे थे। लेकिन गठबंधन के बावजूद ऐलान करने का ये तरीका रहेगा, इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।  दूसरी सीट है खीरी की, जिसके ऐलान के बाद से रवि वर्मा और 7 बार सांसद रहने वाला परिवार सदमें में होगा, क्योंकि इस सीट से उनके पिता, उनकी मां भी सांसद रहे हैं। लेकिन इस सीट पर अखिलेश ने अपने युवा प्रत्याशी उत्कर्ष वर्मा के नाम का ऐलान किया है और तीसरी सीट लखनऊ की, तो लखनऊ भी मोस्ट इंपॉर्टेंट सीट है। जिसपर कांग्रेस अपने वरिष्ठ नेताओं के नाम को लेकर दावेदारी दिखा रही है।
हालांकि, सपा की तरफ से प्रत्याशियों की जारी लिस्ट पर नाराजगी की चर्चाओं के बीच बुधवार को दोनों पार्टियों के नेताओं ने एक बैठक की है। कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक के घर समाजवादी पार्टी के टीम के लोगों से ये मिटिंग हुई। जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में कांग्रेस पार्टी ने यूपी मे अपने कई बड़े नेताओं के लिए सपा से सीट मांगी है। पूर्वांचल की आधा दर्जन सीटों पर अपने बड़े नेताओं के नाम देकर सपा से कांग्रेस पार्टी ने और सीटों की मांग की है। सूत्रों की मानें तो, इस मीटिंग में कांग्रेस पार्टी ने नाराजगी जताने के बजाय सीटों के समन्वय पर जोर दिया। इसके साथ ही फर्रुखाबाद और लखीमपुर खीरी की घोषित की गई समाजवादी पार्टी की सीटों पर भी अपने नेताओं सलमान खुर्शीद और रवि वर्मा के लिए दावेदारी भी बनाए रखी है।
इसके अलावा अगर बात की जाए सपा की जातिगत राजनीति की, तो इसका गणित भी उतना मजबूत नहीं दिख रहा। क्योंकि सपा की पहली लिस्ट में 11 OBC, 1 मुस्लिम, 1 दलित, 1 ठाकुर, 1 टंडन और 1 खत्री उम्मीदवार शामिल हैं। 11 OBC उम्मीदवारों में 4 कुर्मी, 3 यादव, 2 शाक्य, 1 निषाद और 1 पाल समुदाय से हैं। सपा ने अयोध्या लोकसभा (सामान्य सीट) पर दलित वर्ग के पासी प्रत्याशी अवधेश प्रसाद को टिकट दिया है। एटा और फर्रूखाबाद में पहली बार यादव की जगह शाक्य बिरादरी के नेताओं को टिकट दिया गया है, तो इस फैसले में समाजवादी पार्टी की PDA की नीति का कुछ खास प्रभाव दिखा नहीं। पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की नीति बस कोरम पूरा करती दिखी, क्योंकि इस लिस्ट में 1 मुस्लिम कंडीडेट को टिकट देकर अखिलेश ये मैसेज देना चाह रहे हैं कि इस लिस्ट में अल्पसंख्यक भी है। लेकिन अल्पसंख्यक भी है से, काम चलने वाला नहीं है। क्योंकि ये बात जग जाहिर है कि सपा की असल ताकत अल्पसंख्यक ही है। और इस ताकत को पूरी तरह से हासिल करने के लिए यूपी में सपा को कांग्रेस के साथ जाना होगा, क्योंकि जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे बड़े मुस्लिम संगठन जाकर सलमान खुर्शीद और सोनिया गांधी से मिल रहे हैं।
कांग्रेस के रणनीतिकार मान रहे हैं कि INDIA गठबंधन के तहत सपा, कांग्रेस और आरएलडी की दोस्ती मुस्लिम मतों के विभाजन को भी रोकेगी, जो दोनों के लिए ही राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित होगा। मुस्लिम समुदाय मतदाताओं को अपने साथ मजबूती से जोड़े रखने के लिए सपा को भी ये मनोवैज्ञानिक संदेश देना जरूरी होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य विपक्षी गठबंधन में शामिल होने के कारण वो केंद्र की सत्ता के लिए हो रहे लोकसभा चुनाव में भी विकल्प है। इसलिए सपा के लिए भी कांग्रेस का कम महत्व नहीं है।
इसके साथ ही आरएलडी के लोग भी कहते हैं कि पश्चिमी यूपी में अखिलेश यादव का अपना यादव वोटबैंक नहीं है, सपा की पूरी सियासत मुस्लिमों के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। ऐसे में जरूरी नहीं है कि मुस्लिम सपा के साथ जाए, 2024 में बीजेपी के जो भी हराता हुआ नजर आएगा, उसके साथ मुस्लिम खड़े नजर आएंगे। कांग्रेस और आरएलडी दोनों में एक धड़ा है, जो सपा के साथ बसपा से भी गठबंधन के पक्ष में है। उन्हें लगता है कि मौजूदा सियासी परिस्थिति में कांग्रेस, सपा और आरएलडी मिलकर कुछ सीटों पर बीजेपी से मुकाबला कर सकते हैं, लेकिन यूपी की ज्यादा सीटों पर नहीं सामना कर सकते हैं। साल 2019 में भी बीजेपी को उन्हीं सीटों पर हार मिली थी, जो दलित-मुस्लिम समीकरण वाली सीटें थी।
जानकारों का मानना है कि मुस्लिम वोट कांग्रेस की तरफ मूव होते दिख रहा है, जैसा कि बिहार के सीमांचल एरिया में देखा गया, मुस्लिमों का बड़ा हुजुम कांग्रेस के समर्थन में खड़ा नज़र आया। इससे पहले भी तेलंगाना और कर्नाटक में भी कांग्रेस को मुस्लिम वोट शेयर काफी बेहतर मिला और अब कुछ ही दिनों में राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा यूपी में आने वाली है। जब यात्रा यूपी में आएगी, तब कांग्रेस के मुस्लिम चेहरे जो मुस्लिम समर्थन लाते हैं, अगर वो भी शामिल रहे तो ऐसा भी हो सकता है कि कांग्रेस अखिलेश को ड्राइविंग सीट से उतार भी सकती है। हालांकि ये इतना आसान भी नहीं होगा। क्योंकि गठबंधन में आरएलडी भी एक पक्ष है। हालांकि, सपा ने आरएलडी को सात सीटें देने की बात कही है, उसमें बागपत, मुजफ्फरनगर, मथुरा, कैराना, हाथरस, बिजनौर और अमरोहा की सीट शामिल है। आरएलडी के नेता भी इस बात से हैरान हैं कि सपा ने उन्हें अमरोहा लोकसभा सीट की पेशकश कैसे की? खासकर तब, जब मौजूदा सांसद दानिश अली कांग्रेस के साथ तालमेल बैठा रहे हैं। सपा ने आरएलडी को जिन सात सीट की पेशकश की है, उनमें से तीन सीट पर सपा के नेता आरएलडी के चुनाव निशान पर उतारने की की तैयारी में है। ये सीट कैराना, मुजफ्फरनगर और मुथरा होगी। सपा के इस प्रस्ताव पर पर आरएलडी मन नहीं बना पा रही है। इसी तरह से कांग्रेस को जिन 11 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान अखिलेश ने किया है, उसमें रायबरेली, अमेठी के सिवा बाकी सीटें शहरी क्षेत्र की है, जहां पर सपा कभी चुनाव नहीं जीत सकी है। कांग्रेस के लिहाज से भी यह सीटें काफी कमजोर मानी जा रही है, जिसके चलते सपा फॉर्मूले पर पर सहमति नहीं हो पा रही।
कांग्रेस और आरएलडी नेता 2017, 2022 के चुनाव में गठबंधन के ऐलान उद्हारण दे रहे हैं. कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि सपा की ये प्रेशर बनाने की रणनीति है। ऐसे में बस यही कहा जा सकता है कि सपा ने सीटों की घोषणा करके यूपी में INDIA की कैमिस्ट्री बिगाड़ दी है। ये बात कितनी असरदार साबित होगी ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। 

 
 
 

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