आखिर क्यों बिगड़ रही है शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक

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कभी सोचा है जब कोई प्लेन से लंबा सफर तय करता है तो उसे जेट लेग क्यों होता है। अलग-अलग टाइम जोन से भला हमारे शरीर पर प्रभाव क्यों पड़ता है। ये कोई मामूली सवाल नहीं है, तीन वैज्ञानिकों ने जब इसका जवाब तलाशा था कि लंबा सफर करने, अलग-अलग टाइम जोन में जाने वाले लोग परेशान क्यों हो जाते हैं। तो इसके लिए साल 2017 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इन सभी का जवाब है जैविक घड़ी जिसे हम बायोलॉजिकल क्लॉक भी कहते हैं।

 हम अपने समय से उठ जाते हैं, जिस समय पर हम रोजाना सोते हैं, वो वक्त आते ही हमें नींद आने लगती है। शरीर का ये पूरा सिस्टम अपने आप बायोलॉजिकल क्लॉक की वजह से चलता है। रिसर्च की मानें तो बायोलॉजिकल क्लॉक का मूल स्थान मस्तिष्क में बताया जाता है। हमारे शरीर में मिज़ाज, हॉर्मोन लेवल, टेम्परेचर और पाचन क्रिया में लगातार उतार-चढ़ाव होते रहते हैं।

एक्सपर्ट का मानना है बेशक जैविक घड़ी  हमारे शरीर को नियंत्रित करती है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव आने पर हमारे शरीर पर बहुत गहरा असर भी डालती है। इसीलिए किसी दूसरे देश जाने पर जब टाइम ज़ोन बदलता है तो हमें जेट लैग होने लगता है।

वैसे जिस बायोलॉजिकल क्लॉक को साइंस अब मान्यता दे रही है हमारे पूर्वजों ने हमेशा से ही उन सभी चीजों को महत्व दिया है। ऋषियों और आयुर्वेदाचार्यों ने जल्दी सोने-जागने, आहार-विहार की बातें जो बताई हैं, उन पर रिसर्च करके अब मार्डन साइंस उन बातों का समर्थन कर रहे हैं।

बायोलॉजिकल क्लॉक प्रकृति की अपनी एक घड़ी है, जो संपूर्ण धरती के पेड़-पौधों, प्राणी जगत और मनुष्यों पर लागू होती है। जैविक घड़ी भले ही हमें दिखाई न दे, लेकिन अपना काम निरंतर करती रहती है। लेकिन आजकल की भागमभागभरी वाली जिंदगी में लोगों की अपनी बायोलॉजिकल क्लॉक भी गड़बड़ाती जा रही है। यहां तक की डॉक्टर जो दवा रात या दिन के लिए स्पैफिकिली लेने के लिए कहते है, उसमें भी इसका योगदान है।

यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया के रिसचर्स के मुताबिक शरीर की 'जैविक घड़ी' दवाओं के असर को बुरी तरह प्रभावित करती है। उनका दावा है कि दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली 100 दवाओं में से 56 पर दिन और रात के अंतर का जबरदस्त प्रभाव पड़ता है। इन दवाओं में सर्दी-जुकाम की सामान्य दवाओं से लेकर कैंसर की दवाएं तक शामिल हैं। शोधकर्ता जॉन होजेनेच के मुताबिक दवा खाने का वक्त इसके प्रभाव से लेकर दुष्प्रभाव तक को नियंत्रित करता है।

दिनभर शरीर के अंगों की कार्यप्रणाली बदलती रहती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस खोज से साबित होता है कि दवा खाने का टाइम भी महत्वपूर्ण होता है। सही वक्त पर दवा खाने से दवा फायदेमंद साबित होती है, वहीं गलत समय पर ली गई दवा नुकसानदेह भी हो जाती है।

बायोलॉजिकल क्लॉक को लेकर कहा जाता है कि इसके बारे में 300 साल पहले से जिक्र हो रहा है। वैज्ञानिकों ने 300 साल पहले जैविक घड़ी का पता पौधों में तो लग गया था, लेकिन 1950 में वैज्ञानिकों ने पशुओं में इसके अस्तित्व को प्रमाणित किया।

स्टडी के दौरान पाया गया कि फ्लाइट की बायोलॉजिकल क्लॉक का सर्कर, नॉर्मल 24 घंटे की बजाय 19 या 29 घंटे का था। इसकी वजह या तो सर्केडियन रिदम की कमी थी या फिर जीन्स में अचानक आया बदलाव होता है। कम शब्दों में समझे तो सर्कैडियन लय शारीरिक, मानसिक और व्यवहारिक परिवर्तन हैं जो 24 घंटे के चक्र के बाद होते हैं

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