महिलाओं के पास हैं ये खास अधिकार

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आज महिला और पुरुष को बराबर कहा माना जाता है। हर क्षेत्र में लड़कियां आगे बढ़कर नाम कमां रहीं है, कई चीजों में अभी काफी बदलाव विकास की स्तिथी में है। महिलाओं के पास वर्कप्लेस और यौन शोषण से जुड़े कुछ ऐसे अधिकार है, जो उन्हें पता होना जरुरी है।

मेल-फीमेल दोनों ही कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में काम कर रहे हैं, लेकिन जब सैलेरी की बात आती है, तो कई जगह पर इक्वल पे नहीं होता। लेकिन हर महिला को समान वेतन का अधिकार है। पुरुषों के कमपैरिजन में महिलाओं को कम मेहनताना मिलता है, लेकिन समान पारिश्रमिक अधिनियम के तहत, वेतन या मजदूरी में जेंडर के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता। किसी एक काम के लिए जितना पारिश्रमिक पुरुष को मिलता है, उतना ही पारिश्रमिक महिला का भी अधिकार है।

मातृत्व प्रकृति का महिला के लिए तोहफा है, लेकिन मां बनने के दौरान काम्प्टिटिव इनवायरमेंट में कैरियर के साथ उलघनें बढ़ जाती है, साथ ही फिजिकल रिकवरी के लिए भी समय की मांग होती है। तो मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत, प्रसव के बाद महिला 6 महीने की छुट्टी ले सकती है, इस दौरान सैलेरी में कोई भी कटौती नहीं की जा सकती है, साथ ही बाद में महिला को काम पर लौटने का अधिकार भी रहेगा।

इसी के साथ ही एक महिला को सवैधानिक रुप से कुछ अधिकार दिए गए है, जो महिला अपराध से जुड़े हुए हैं। जिसमें यौन शोषण के मामले में नाम और पहचान गोपनीय रखने का अधिकार मिलता है। इंडिया में यौन शोषण के मामले में पीड़िता को नाम और पहचान को गोपनीय रखने का अधिकार होता है। यौन उत्पीडन के मामलों में महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में दर्ज कराने का अधिकार रखती है। जिलाधिकारी के सामने भी महिला अपनी शिकायत सीधे दर्ज करा सकती है। वहीं पुलिस, मीडिया और अधिकारियों को भी महिला की पहचान जाहिर करने का अधिकार नहीं है।

इसी के साथ ही रेप या यौन शोषण पीडित महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का अधिकार होता है, जो संविधान में महिला को दिया गया है। पीडिता महिला थाने में मदद मांग सकती है और एसएचओ विधिक प्राधिकरण के वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचना देता है।

वहीं एक महिला को रात में गिरफ्तारी से बचने का अधिकार भी है, कानून में साफ बताया गया है कि सूरज डूबने के बाद या शाम होने के बाद किसी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। अगर महिला का अपराध काफी गंभीर है या मामला काफी खास है तो प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के आदेश बिना भी पुलिस महिला को शाम से लेकर सूरज निकलने तक गिरफ्तार नहीं कर सकती है।

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