होली में महिलाएं चलाती ‘हंटर’, पुरुष फेंकते पानी

Home   >   मंचनामा   >   होली में महिलाएं चलाती ‘हंटर’, पुरुष फेंकते पानी

138
views

होली आने के महीने भर बचे हों और फिर भी अगर कोई पानी फेंक दे तो आप गुस्से से लाल हो जाएंगे। लेकिन ऐसा वाक्या आपके साथ हरियाणा में हो जाए तो आपको ये गुस्से के घूंट पीने पड़ेंगे। क्योंकि यहां ये परंपरा का हिस्सा हैं। जिसे हंटर वाली होली कहते हैं।

होली मस्ती का त्योहार है। कहीं लठ्‌ठमार होली होती है तो कहीं छड़ीमार होली तो कहीं फूलों से होली खेली जाती है। लेकिन हरियाणा में कोरड़े यानी ‘हंटर वाली होली’ की भी अपनी अलग पहचान है।

करीब 800 साल पहले हरियाणा की देसवाल बेल्ट यानि जाटलैंड में हंटर वाली होली की परंपरा शुरू हुई। इस दिन हंसी-मजाक के साथ होली खेली जाती है और मर्यादा का ध्यान रखते हुए तमाम तरह की बंदिशों से दूर, सभी महिलाएं और पुरुष ये होली मनाते हैं। पूरे देश में होली का त्योहार अमूमन दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन होलिका दहन और उसके अगले दिन जब रंग खेला जाता है।

लेकिन फाल्गुन महीने की शुरुआत से लेकर होलिका दहन तक यानी लगभग 20 दिनों तक हरियाणा में महिलाएं को इस बात की पूरी आजादी रहती है कि वे गली-मोहल्लों में निकलने वाले किसी भी पुरुष पर चाहे वो छोटा बच्चा हो या फिर बुजुर्ग उन पर पानी फेंक दें या फिर वे उन पर कपड़े से बना हंटर चला दें। हरियाणा से ताल्लुक रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस बात का विरोध नहीं करता, क्योंकि सभी जानते हैं कि ये उनकी परंपरा का हिस्सा है।

महिलाएं ये हंटर खुद अपने हाथों से तैयार करती हैं। इस हंटर को सूती के कपड़े से बुना जाता है। इसे ऐसे बनाया जाता है कि मार खाने वाले के शरीर पर निशान नहीं पड़ते और परंपरा भी निभ जाती है।

होली वाले दिन गांव-शहरों की गली - मोहल्लों में बड़े - बड़े ड्रमों या कढ़ाई में रंग वाला पानी भर लिया जाता है। इसमें पुरुष पानी महिलाओं पर डालते हैं और बदले में महिलाएं उन पर हंटर बरसाती हैं। इस दौरान पुरुष जहां हंटर से बचने का प्रयास करते हैं, वहीं महिलाएं उनका पीछा करती हैं। इस दिन कोई भी बंदिश नहीं होती। हर समाज की महिलाएं और पुरुष इसमें भाग लेते हैं। बेहद फेमस रोहतक बेल्ट में तकरीबन 7 हजार की आबादी वाले सुंडाना गांव की होली को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। इस दिन गांव के चौक पर मेले जैसा नजारा होता हैं।

आप होली में खूब मस्ती करें लेकिन हुड़दंग न हो किसी को चोट न लगे इसका ध्यान रखें।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!