उत्तरकाशी टनल से बाहर निकाले गए मजदूर, बाबा बौखनाग का जताया सभी ने आभार

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408 घंटे के लंबे इंतजार के बाद जिंदगी जिंदाबाद का नारा बुलंद हुआ है. उत्तरकाशी की चट्टानों को चीरकर, पिछले 17 दिनों से टनल में फंसे मजदूर अब बाहर आ चुके है, देशभर में मजदूरों के लिए जो प्रार्थनाओं का दौर चल रहा था वो काम आया है. मंगलवार को ऐसा शुभ समाचार मिला कि पूरे देश में खुशी की लहर छा गई. टनल में 17 दिन से फंसे मजदूरों को निकालने के लिए जहां देश-विदेश की बड़ी बड़ी मशीनें फेल होती नजर आ रही थीं तो वहीं  रैट माइनर्स का कमाल दिखा.

बाबा बौखनाग का दिखा चमत्कार

इस हादसे के पीछे की वजह बाबा बौखनाग की नाराजगी बताई जा रही थी. स्थानीय लोगों का ऐसा मानना था कि बाबा बौखनाग नाराज हैं, जिसकी वजह से ये हादसा हुआ. जबकि हादसे के कुछ दिन बाद सुरंग के मुहाने पर बाबा बौखनाग का मंदिर बनाया गया. रेस्क्यू ऑपरेशन को शुरु करने से पहले एक्सपर्ट और टीमें बाबा बौखनाग का आशीर्वाद लेते और ऑपरेशन सफल होने की कामना करते थे. यहां तक की विदेशी एक्सपर्ट अर्नोल्ड डिक्स ने भी बाबा बौखनाग के मंदिर पर नतमस्तक दिखे थे.

बाबा बौखनाग की कृपा, सैंकड़ों लोगों की कड़ी मेहनत के बाद सभी 41 श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया है. जिसके बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बाबा बौखनाग का शुक्रिया अदा किया है. हालांकि कुछ मजदूरों की तबीयत ठीक नहीं थी तो उन्हें सीधे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया है.

रैट माइनर्स रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के हीरो

हालांकि टनल रेस्‍क्‍यू म‍िशन के 'असली हीरो' रैट माइनर्स रहे. जिनकी एंट्री कुछ वैसे ही हुई जैसे फिल्‍म में हीरो की होती है. जिन्होंनें आखिरी में मोर्चा संभालते हुए 41 मजदूरों को एक नई जिंदगी दी. बता दें  दिवाली वाले दिन जब देश खुशियों का पर्व मना रहा था तभी सुबह के वक्त पहाड़ का मलबा गिरा और सिल्क्यारा टनल ब्लॉक हो गई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक चारधाम प्रोजेक्ट के तहत ये टनल नेशनल हाईवे-94 के अंतर्गत बनाई जा रही है. ब्रह्मखाल और यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर सिल्कयारा और डंडलगांव के बीच बन रही इस टनल से 25 किलोमीटर की दूरी मात्र 4.5 किलोमीटर में पूरी हो जाएगी और इससे एक घंटे का समय भी लोगों का बचेगा.

एक बार पूरी टाइमलाइन भी जान लेते है कि आखिर कब क्या कुछ हुआ.

12 नवंबर: हादसा हुआ तो बचाव कार्य में NDRF, ITBP और BRO को लगाया गया. 35 हॉर्स पावर की ऑगर मशीन से 15 मीटर तक मलबा हटा. टनल से पानी निकालने के लिए बिछाए गए पाइप ऑक्सीजन, दवा, भोजन और पानी अंदर भेजा जाने लगा.

13 नवंबर: शाम तक टनल के अंदर से 25 मीटर तक मिट्टी के अंदर पाइप लाइन डाली जाने लगी. दोबारा मलबा आने से 20 मीटर बाद ही काम रोकना पड़ा.

14 नवंबर: टनल में लगातार मिट्टी धंसने से नॉर्वे और थाईलैंड के एक्सपर्ट्स से सलाह ली गई. ऑगर ड्रिलिंग मशीन और हाइड्रोलिक जैक को काम में लगाया. लेकिन ये मशीनें भी असफल हो गईं.

15 नवंबर: रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत ऑगर मशीन के कुछ पार्ट्स खराब हो गए. टनल के बाहर मजदूरों की पुलिस से झड़प हुई. PMO ने हस्तक्षेप किया और एयरफोर्स का हरक्यूलिस विमान से हैवी ऑगर मशीन लेकर चिल्यानीसौड़ हेलीपैड पहुंचा.

16 नवंबर: 200 हॉर्स पावर वाली हैवी अमेरिकन ड्रिलिंग मशीन ऑगर का इंस्टॉलेशन पूरा हुआ. रात में टनल के अंदर 18 मीटर पाइप डाले गए. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रेस्क्यू ऑपरेशन की रिव्यू मीटिंग की.

17 नवंबर: सुबह दो मजदूरों की तबीयत बिगड़ी. उन्हें दवा दी गई. दोपहर 12 बजे हैवी ऑगर मशीन के रास्ते में पत्थर आने से ड्रिलिंग रुकी. मशीन से टनल के अंदर 24 मीटर पाइप डाला गया.

18 नवंबर: PMO के सलाहकार भास्कर खुल्बे और डिप्टी सेक्रेटरी मंगेश घिल्डियाल उत्तरकाशी पहुंचे. पांच जगहों से ड्रिलिंग की योजना बनी.

19 नवंबर: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उत्तराखंड CM पुष्कर धामी उत्तरकाशी पहुंचे, रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया और फंसे लोगों के परिजनों को आश्वासन दिया. टनल में जहां से मलबा गिरा, वहां से छोटा रोबोट भेजकर खाना भेजने या रेस्क्यू टनल बनाने का प्लान बना.

20 नवंबर: इंटरनेशनल टनलिंग एक्सपर्ट ऑर्नल्ड डिक्स ने उत्तरकाशी पहुंचकर सर्वे किया और वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए 2 स्पॉट फाइनल किए. मजदूरों को खाना देने के लिए 6 इंच की नई पाइपलाइन डालने में सफलता मिली. BRO ने सिलक्यारा के पास वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए सड़क बनाने का काम पूरा किया.

21 नवंबर: एंडोस्कोपी के जरिए कैमरा अंदर भेजा गया और फंसे हुए मजदूरों की तस्वीर पहली बार सामने आई. उनसे बात भी की गई. जिससे पता लगा सभी मजदूर ठीक हैं.

22 नवंबर: ऑगर मशीन से 15 मीटर से ज्यादा ड्रिलिंग की गई. मजदूरों के बाहर निकलने के मद्देनजर 41 एंबुलेंस मंगवाई गईं. चिल्यानीसौड़ में 41 बेड का हॉस्पिटल तैयार करवाया गया.

23 नवंबर: अमेरिकी ऑगर मशीन में खराबी आ गई. इसे ठीक करने के लिए दिल्ली से हेलिकॉप्टर के जरिए 7 एक्सपर्ट बुलाए गए.

24 नवंबर: सुबह ड्रिलिंग का काम शुरू हुआ तो ऑगर मशीन के रास्ते में स्टील के पाइप आ गए, जिसके चलते पाइप मुड़ गया.

25 नवंबर: ऑगर मशीन टूटने के चलते रुका रेस्क्यू का काम शनिवार को भी रुका रहा. बी प्लान के तहत टनल के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग की तैयारी हुई.

26 नवंबर: 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए पहाड़ की चोटी से वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू हुई. वर्टिकल ड्रिलिंग के तहत पहाड़ में ऊपर से नीचे की तरफ बड़ा होल करके रास्ता बनाया जा रहा है.

27 नवंबर: रैट माइनर्स ने मैन्युअली ड्रिलिंग की

रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तरकाशी में सिलक्यारा टनल में 8 राज्यों के 41 मजदूर फंसे थे. जिन्हें अब बाहर निकाल लिया गया है. इसमें उत्तराखंड के 2, हिमाचल प्रदेश का 1, यूपी के 8, बिहार के 5, पश्चिम बंगाल के 3, असम के 2, झारखंड के 15 और ओडिशा के 5 मजदूर थे

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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