यहां तलाक शर्म नहीं जश्न की बात

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तलाक़ दे तो रहे हो इताब-ओ-क़हर के साथ

मिरा शबाब भी लौटा दो मेरी महर के साथ।

लखनऊ के शायर साजिद सजनी का ये शेर तलाक होने के बाद महिला के दर्द को बयां करता है। भारत में तलाक को लेकर लोग सहज नहीं होते, तलाकशुदा महिलाओं को कई तरह के चैलेंज फेस करने पड़ते हैं। वहीं एक ऐसा देश है, जहां महिलाओं का तलाक लेना बुरा नहीं माना जाता, बल्कि लोग इसका जश्न तक मनाते हैं।

आजकल जो शादी में यकीन रखते हैं वो तलाक में भी रखते हैं. क्योंकि अब वो जमाना नहीं रहा कि लोग शादी को सात जन्मों को बंधन समझकर एडजस्ट करते रहें। अगर दोनों के विचार एक दुसरे से नहीं मिल रहे तो वे तलाक ले सकते हैं। लेकिन समाज का बदलते नजरिए से बेहद दुखी होते है लेकिन अफ्रीकी देश मॉरिटियाना की महिलाएं तलाक लेने के बाद जश्न मनाती है। इस देश की महिलाओं का मनना है कि वे इसके बाद पूरी तरह से आजाद हैं।

बीबीसी की खबर के मुताबिक, इस देश की महिलाएं तलाक लेने के बाद बेहद खुश रहती हैं घर में रिश्तेदार और दोस्तों को बुलाकर पार्टी देतीं है। वहां कि महिलाएं तलाक लेने के बाद ये सोचती है पहले की जिंदगी से अब वो पूरी तरह से आजाद है तलाक के बाद अब वे अपनी मर्जी से उससे बेहतर जिंदगी का हमसफर ढूंढ़ सकती हैं।

अफ्रीकी देश मॉरिटियाना में तलाक को बुरा नहीं माना जाता है। वहां कोई भी महिला तलाक के बाद पार्टी दे सकती है। और दोबारा शादी कर सकती है। लेकिन दोबारा शादी करने के लिए उन्हें तीन महीने के इंतजार करना पड़ता है। इस्लामिक कानून के मुताबिक ऐसा, सुनिश्चित करने के लिए महिला कहीं प्रेग्नेंट तो नहीं है।

बीबीसी की खबर के मुताबिक, वहां की महिलाएं तलाक लेने के बाद पार्टियों का आयोजन इसलिए करतीं हैं ताकि वे ये दिखा सकें कि अब वे पूरी तरह से आजाद हैं।

मॉरिटियाना में तलाक लेने के बाद पार्टी का चलन वहां के मूर समुदाय में ही देखा जाता है। इस देश में मूर समुदाय की आबादी लगभग 80 फीसदी है।

मूर समुदाय के मुताबिक, अगर पति शादी के नियमों को तोड़ता है तो पत्नी पति से तलाक ले सकती है।

वहीं मॉरिटियाना में इन तलाकशुदा महिलाओं से शादी के करने के लिए ज्यादातर पुरुष बेहद दिलचस्पी रखते हैं लेकिन कुछ पुरुषों तलाकशुदा महिलाओं से शादी करना पसंद नहीं करते थे इनकी राय अलग हैं। उनका मानना है कि महिलाएं ये जश्न की पार्टी इसलिए रखती की वे अपने पति से बदला ले सकें। लेकिन पुरुष कहते है कि ये महिलाएं ज्यादा मांग करती है उन्हें शादीशुदा जीवन का अनुभव होता है।

तलाक लेने वाली महिला को अपने बच्चों को परवरिश खुद करने पड़ती है उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिलती है। अपना खर्चा चलाने के लिए वे अपने पति के पुराने सामान के मार्केट में बेच देते हैं।

इस देश के कई लोग तलाक के इस चलन को लेकर चिंतित भी है पर फिलहाल इस परंपरा में जल्द कोई बदलाव होगा ऐसा दिखता तो नहीं है।

अब बात न बने तो तलाक लेना ही चाहिए। लेकिन क्या इसके बाद दो लोग अपना-अपना जीवन चैन से बिता पाते हैं? शायद हां या शायद नहीं।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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