यूपी की ये 12 सीटें बढ़ा सकती हैं बीजेपी का सिरदर्द !

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यूपी में लोकसभा की वो 12 सीटें जहां 2019 के चुनाव में हुआ सबसे करीबी मुकाबला, जीत हार का अंतर 181 वोटों का भी रहा

2024 के आम चुनाव नजदीक हैं ऐसे में लोकसभा सीटों के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने के लिए हर पार्टी सियासी दांव लगा रही है। 80 लोकसभा सीटों वाले यूपी से दिल्ली की सत्ता का रास्ता गुजरता है। बीते दो चुनावों में यहां बीजेपी का ही प्रभुत्व रहा है। जबकि बाकी पार्टियां हाशिये पर नजर आई हैं। 2019 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 80 में से 64 सीटें जीती थी। इस बार बीजेपी 80 में 80 सीटें जीतने का दावा करते हुए ही तैयारी कर रही है। इधर समाजवादी पार्टी इस बार पिफर एक गठबंधन में है। इस बार एसपी इंडिया अलायंस में है और कांग्रेस के साथ एलायंस में उसके चुनाव लड़ने की संभावना है,लेकिन गौर करने वाली एक बात ये भी है कि 2019 के चुनावों में यूपी की कुछ सीटों पर जीत हार का अंतर बेहद कम था। एक सीट पर तो महज 181 वोटों की बढ़त के साथ बीजेपी जीती थी। यूपी में ऐसी एक दर्जन के करीब लोकसभा सीटें थी जिसमें जीत हार का अंतर 25 हजार वोटों से भी कम था। जिसमें से 10 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। ऐसे में इस बार भी इन सीटों पर मुकाबला किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। इसलिए इन सीटों पर बीजेपी के साथ एसपी और बीएसपी भी काफी होमवर्क कर रही है।

 

यूपी की सियासत में 2014 के बाद से ही बीजेपी पूरी तरह से हावी नजर आई है। फिर चाहें लोकसभा हो या विधानसभा दोनों में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सबसे ज्यादा सीटें जीत रही है। 2019 के बाद कई उपचुनाव भी हुए जिसमें मैनपुरी में भले ही बीजेपी को हार मिली हो,लेकिन उसने आजमगढ और रामपुर लोकसभा सीट सपा से छीन ली थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन का वोट शेयर 50 परसेंट से ज्यादा था। इसके बाद भी एक दर्जन के करीब ऐसी सीटें भी थी। जहां बीजेपी प्रत्याशी बमुश्किल ही जीत हासिल कर सके थे। इन एक दर्जन सीटों में बीजेपी ने 10 और बीएसपी ने 2 सीटें जीती थी। स्टोरी में आगे बढ़े उससे पहले जान लीजिए कि 2019 में किस पार्टी को यूपी में कितनी सीटें मिली थीं और उनका वोट शेयर क्या था।

 

यूपी में 2019 के आम चुनावों में मिली सीटें

पार्टी- सीटें

बीजेपी-62

बीएसपी-10

एसपी-5

कांग्रेस-1

अपनादल एस-2

 

किस पार्टी का कितना वोट शेयर

बीजेपी गठबंधन-51.19 परसेंट

बीजेपी-49.98 अपनादल एस-1.21 परसेंट

बीएसपी-19.43 परसेंट

एसपी-18.11 परसेंट

कांग्रेस-6.36 परसेंट

आरएलडी-1.69 परसेंट 

 

2019 में इन सीटों पर जीत-हार का अंतर बेहद कम

सीट-जीत का अंतर-पार्टी जीती

सहारनपुर-22,417--बीएसपी

मुजफ्फरनगर-6,526--बीजेपी- संजीव बालियान

मेरठ-4,729-बीजेपी-राजेंद्र अग्रवाल

बागपत-23,502-बीजेपी-सत्यपाल सिंह- जयंत चैधरी हारे

फिरोजाबाद-24,991-बीजेपी- अक्षय यादव हारे- शिवपाल ने भी वोट काटे

बदांयु-18,454-बीजेपी- धर्मेंद्र यादव हारे-संघमित्र मौर्या जीती

सुल्तानपुर-13,859-बीजेपी-मेनका गांधी जीती

कन्नौज-12,353-बीजेपी- डिंपल हारी,  सुब्रत जीते

श्रावस्ती-5,320-बीएसपी

बलिया-15,519-बीजेपी

चंदौली-13,959-बीजेपी

मछलीशहर-181- बीजेपी-वीपी सिंह सरोज जीते- बसपा प्रत्याशी को हराया।

 

पिछली बार के प्रदर्शन को देखते हुए संभावना है कि इस बार बीजेपी इनमें से कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदले। वहीं सपा ने यूपी में अपने 16 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी हैं। इनमें फिरोजाबाद,बंदायु की सीटें भी शामिल हैं जहां यादव कुनबे के ही अक्षय यादव और धर्मेद्र यादव को दोबारा एसपी ने फिर से प्रत्याशी बनाया गया है। देखने वाली बात ये भी होगी कि बसपा इन सीटों पर मजबूत प्रत्याशी उतारती है या नहीं। और इस बार क्योंकि एसा और बसपा अलग अलग चुनाव लड़ेगी तो ऐसे में वोट शेयर में होने वाला बिखराव किसे फायदा पहुंचाएगा ये भी बड़ा सवाल है। वहीं कांग्रेस की बात करें तो अभी वह यूपी में महज एक सीट पर सीमित हैं वो भी रायबरेली में जहां से सोनिया गांधी सांसद हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के 3 और प्रत्याशी ही दूसरे नंबर पर आ सके थे। बाकी जगहों पर या तो जमानत जब्त हो गई या वे तीसरे नंबर पर रहे।

 यादव वोटबैंक पर बीजेपी की नजर 

अब आने वाले कुछ दिनों में ही यूपी में लोकसभा चुनाव की तस्वीर और भी साफ हो जाएगी। हालांकि यूपी की सियासत में मौजूदा समय में मुख्य विपक्षी पार्टी सपा के अपने सियासी गढ़ भी ढह चुके हैं। वो लोकसभा सीटें जहां समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी या ये कहें कि यादव परिवार के सदस्यों का दबदबा रहता था वहां भी बीजेपी जीत रही है। कन्नौज, इटावा, बंदायु और फिरोजाबाद जोकि यादव कुनबे के गढ माने जाते थे वहां पर बीजेपी 2019 में ही जीत हासिल कर चुकी है। जबकि उपचुनाव में आजमगढ और रामपुर में भी बीजेपी प्रत्याशी जीत गया। एसपी सिर्फ मैनपुरी का अपना किला बचा सकी। बीजेपी ने जिस तरह से यादव वोट बैंक में सेंधमारी करने के लिए कोशिशें की हैं। उस बारे में समाजवादी पार्टी आला कमान भी वाकिफ है। इसके अलावा पसमांदा मुस्लिमों को लुभाने के लिए भी बीजेपी लगातार कोशिशें कर रही है। ऐसे में एसपी के वोट बैंक में सेंधमारी भी बीजेपी कर सकती है। हालांकि सबकुछ समाजवादी पार्टी के विपरीत ही हो रहा हो,ऐसा भी नहीं है। शिवपाल यादव अब एक बार फिर अखिलेश के साथ हैं। संगठन पर उनकी पकड़ का असर ही था कि घोसी की विधानसभा सीट में पिछले साल हुए उपचुनाव में बीजेपी के पूरी ताकत झोंक देने के बाद भी वो सीट एसपी ने जीत ली थी। 2024 के चुनाव में शिवपाल यादव या उनके बेटे आदित्य यादव के लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना भी जताई जा रही हैं। आजमगढ की सीट पर उनके नाम की चर्चा भी हैं।

2024 के आम चुनाव बीएसपी के लिए भी बड़ा लिटमस टेस्ट होंगे। पिछली बार गठबंधन की वजह से उनके 10 प्रत्याशी चुनाव जीते थे जबकि 2014 में बीएसपी का एक भी सीट नहीं मिली थी। बीएसपी में पहली बार मायावती के साथ उनके भतीजे आकाश आंनद भी पार्टी में अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वो लोकसभा चुनाव लड़ते हैं या नहीं ये भी देखने वाली बात होगी। 2019 के चुनाव में बीएसपी को बीजेपी के बाद सबसे ज्यादा 19 फीसदी वोट मिले थे। ऐसे में उसे नजरअंदाज करना न तो बीजेपी के लिए आसान होगा हो न समाजवादी पार्टी के लिए।

 

लोकसभा चुनाव को लेकर सियासत की इस गहमागहमी में समीकरण किसके पक्ष में जाएंगे और 2024 में हाल 2014 या 2019 जैसा न हो इसके लिए विपक्ष क्या करेगा ये देखने वाली बात होगी। क्योंकि चुनावी मंच अब सज चुका है। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इस बार बीजेपी के पास एक बड़ा सियासी हथियार भी है। जिसकी काट विपक्ष कैसे करेगा। ये वक्त ही बताएगा।

 

 

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