आदेश श्रीवास्तव: बॉलीवुड के संगीतकार की दर्दनाक जीवन कहानी | Manchh न्यूज़

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2000 से ज्यादा गानों के संगीतकार, आदेश श्रीवास्तव की जीवन की कठिनाइयों से लेकर सफलता तक की अद्भुत कहानी Manchh न्यूज़ पर विस्तार से जानिए |

साल, 2010। उम्र, 46 साल। जिंदगी, बेहतरीन। करियर, उफान पर था। चार लोगों की खूबसूरत सी फैमिली थी। आलीशान घर, हमर और बैंटले जैसी महंगी गाड़ियां। फिल्म इंडस्ट्री में कई सारे दोस्त। फिर एक दिन एक तूफान आता है। जिसके बाद बसी बसाई दुनिया उजड़ गई। इलाज के पैसों के लिए कारें बिक गई। आलीशान घर में किराएदार रखने पड़े।

ये सब तो झेला ही। पर एक दुख और भी था। दोस्तों ने बेरुखी के सिवा कुछ नहीं दिया। 

ये दास्तां 2000 से ज्यादा गानों का म्यूजिक देने वाले दिग्गज म्यूजिक डायरेक्टर आदेश श्रीवास्तव की है।

इनकी जिंदगी में संघर्ष है, टैलेंट है, सक्सेस है, मोहब्बत है, खूबसूरत सी फैमिली है, अकेलापन है और फिर दर्दनाक अंत है ।

4 सितंबर साल 1964, मध्य प्रदेश के जबलपुर में जन्मे आदेश श्रीवास्तव के पिता रेलवे में सुपरिटेंडेंट थे और मां कॉलेज में लेक्चरर। ये चार भाइयों में से एक थे। फैमिली में कोई भी फिल्मों में काम नहीं करता पर सभी गानों को सुनना पसंद करते।

आदेश श्रीवास्तव भी स्कूल-कॉलेज के फंक्शन में गाना गाकर शौक पूरा कर लेते। सभी चाहते थे पढ़ लिखकर डॉक्टर बनें पर उम्र बढ़ी तो रुझान म्यूजिक की तरफ गया।

लेखक जाने-माने कवि-पत्रकार और आदेश श्रीवास्तव के पारिवारिक मित्र आलोक श्रीवास्तव अपने एक लेख में लिखते हैं कि आदेश श्रीवास्तव अपने सपनों में रंग भरने के लिए 20 – 21 साल की उम्र में मुंबई आ गए।

वो ड्रम अच्छा बजाते थे, इस वजह से शुरुआती दौर में सलिल चौधरी, ओपी नैय्यर और शंकर-जयकिशन जैसे ग्रेट म्यूजिक डायरेक्टर के साथ काम करने का मौका मिला। फिर टैलेंट के दम पर जल्द ही म्यूजिक डायरेक्टर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के असिस्टेंट बन गए।

साल 1993, मुंबई आए हुए सात-आठ साल हो चुके थे। तब ऋषि कपूर और मनीषा कोइराला की फिल्म ‘कन्यादान’ में बतौर म्यूजिक डायरेक्टर काम किया। फिल्म तो हिट नहीं थी पर बड़ी बात ये थी इस फिल्म में आदेश श्रीवास्तव के म्यूजिक से सजे गानों को लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे दिग्गज सिंगर्स ने आवाज दी थी।

इसके बाद साल 1994 में सैफ अली खान और शिल्पा शेट्टी की फिल्म ‘आओ प्यार करें’ के लिए म्यूजिक दिया। फिल्म के गाने सिंगर कुमार सानू ने गाए थे। वैसे तो सभी गाने हिट हुए पर एक गाना ‘चांद से पर्दा कीजिए’ उस साल के टॉप 10 गानों में शुमार हुआ और आदेश श्रीवास्तव के पैर बॉलीवुड में जम गए।

इसके बाद साल दर साल, 1996 की दिल तेरा दीवाना, राजा की आएगी बारात, 1998 की मेजर साब, 1999 की दहेक, साल 2000 की जोरू का गुलाम, 2001 की बस इतना सा ख्वाब है और कभी खुशी कभी गम, 2003 की चलते चलते और बागबान, साल 2005 की अपहरण2006 की बाबुल, साल 2010 की राजनीति, 2015 की डर्टी पॉलिटिक्स जैसी करीब 100 से ज्यादा फिल्मों में म्यूजिक दिया।

बतौर म्यूजिक डायरेक्टर फिल्म डर्टी पॉलिटिक्स उनकी आखिरी फिल्म थी। आदेश श्रीवास्तव ने करीब 50 से ज्यादा फिल्मों का बैकग्राउंड म्यूजिक भी दिया।

बतौर बैकग्राउंड म्यूजिक डायरेक्टर साल 1990 में ‘सैलाब’ पहली और साल 2015 की ‘वेलकम बैक’ उनकी आखिरी फिल्म थी। साल 1997 की फिल्म ‘बार्डर’ और साल 2000 की फिल्म ‘रिफ्यूजी’ के बैकग्राउंड स्कोर के लिए फिल्म फेयर जीता। इन्होंने 50 से ज्यादा गाने भी गाए। इनकी आवाज से सजा फिल्म ‘राजनीति’ का 'मोरा पिया मोसे बोलत नाही' गाना बेहद पॉप्युलर हुआ। इन्होंने शकीरा, एकॉन जैसे इंटरनेशनल स्टार्स के साथ भी काम किया। टीवी शो 'सारेगामापा' में जज भी बने।

साल 1990, आदेश श्रीवास्तव की जिंदगी में विजेता आईं। म्यूजिक डायरेक्टर जतिन-ललित की बहन विजेता ने साल 1981 की सुपरहिट फिल्म ‘लव स्टोरी’ में कुमार गौरव के साथ बतौर हीरोइन काम किया है। विजेता अच्छी सिंगर भी थीं। आदेश और विजेता म्यूजिक की वजह से दोस्त बनें और फिर शादी कर ली। इनके दो बेटे अवितेश और अनिवेश हुए।

साल 2010, अचानक इनकी जिंदगी ठहर सी गई। आदेश को ब्लड कैंसर हो गया। उन्हें 12-12 लाख रुपये के इंजेक्शन लगाने पड़ते। इलाज के लिए अमेरिका गए। बीमारी से जूझते-जूझते हालात इतने बुरे हो गए की उतने पैसे भी नहीं थे वो इलाज करा पाएं।

बढ़े शौक से खरीदी गई अपनी कार बेचनी पड़ी। घर में किरायेदार रखने पड़े। घर को ही अस्पताल बना लिया। हालात और बिगड़े पांच सालों तक बीमारी से लड़ते-लड़ते 5 सितंबर साल 2015 सिर्फ 51 साल की उम्र में निधन हो गया। 

एक संयोग ही कहेंगे की एक दिन पहले 04 सितंबर को इनका जन्मदिन भी होता है।

एक इंटरव्यू में आदेश श्रीवास्तव की पत्नी विजेता ने बताया था कि आदेश आखिरी दिनों में दोस्तों को बहुत याद करते। आदेश श्रीवास्तव जब बीमार थे तब उन्होंने अपनी पत्नी विजेता से कहा था कि ‘एकदम से बीमार पड़ना बहुत कष्ट भरा है। जिन लोगों के साथ मैंने बरसों काम किया उनके ठंडे रुख ने मुझे इस बीमारी से ज्यादा तकलीफ पहुंचाई। जब मैं बीमार हुआ तो कोई मुझसे मिलने तक नहीं आया।’

आदेश श्रीवास्तव के निधन की खबर से पूरी इंडस्ट्री हिल गई थी। अंतिम दर्शन को फिल्मी जगत के कई दिग्गज पर क्या फायदा उनका दोस्त जा चुका था।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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