Actor Anupam Kher : 'आपके पास यादें नहीं हैं तो कुछ भी नहीं'

Home   >   किरदार   >   Actor Anupam Kher : 'आपके पास यादें नहीं हैं तो कुछ भी नहीं'

24
views

एक्टर अनुपम खेर (Anupam Kher) साल 2004 में पद्मश्री, साल 2016 में पद्म भूषण और 08 बार फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं। वो अपनी यादों को खोने से डरते हैं।

 

 

'यादें खो जाने का डर'

'दिलीप साहब ने अपनी यादें खो दी थीं। वो एक शानदार शख्स थे। ऐसे शख्स जिनके पास कई चीजों की जबरदस्त जानकारी थी। अगर आप पूछेंगे कि मेरा सबसे बड़ा डर क्या है? तो वो है यादें खो जाने का डर। अगर आपके पास यादें नहीं हैं तो कुछ भी नहीं है।' ये बातें एक इंटरव्यू में उन्होंने साझा की थी जिन्होंने अपने 42 साल के सफर में तेलुगू, तमिल, कन्नड़, मलयालम, अंग्रेजी, चाइनिज और हिंदी भाषा की करीब 540 फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों के जरिए उन्होंने कभी हंसाया, कभी रुलाया तो कभी विलेन बनकर डराया। इनकी एक्टिंग इतनी शानदार की हर बार अपने फिल्मी किरदार को एक अलग तरह का शेड दे ही देते। 

यादों की कहानी

आज कहानी साल 2004 में पद्मश्री, साल 2016 में पद्म भूषण और आठ बार फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित अनुपम खेर की उन यादों की जिन्हें वो खोने से डरते हैं। वो यादें जिसमें मां की साड़ी का पल्लू जीवन जीने की नई ताजगी देता है। वो यादें, जब पहली बार मुंबई आए तब उनकी जेब में सिर्फ 37 रुपये थे। वो यादें जिसमें पहली पत्नी से अलग होने के बाद एक दूसरी लड़की से मुलाकात होती है और वो यादें जिसमें चाहे जैसे भी हालात हो वो अपने दोस्तों का साथ कभी नहीं छोड़ते।

'मेरी प्यारी मां...' 

कश्मीरी पंडित पुष्कर नाथ खेर। पेशे से क्लर्क थे। शिमला में रहते पत्नी दुलारी खेर और दो बेटे के साथ। एक बेटा - राजू खेर जिन्होंने भी हिंदी फिल्मों में काम किया है वहीं दूसरे बेटे 7 मार्चसाल 1955 को शिमला में जन्मे अनुपम खेर। अनुपम खेर अपनी मां को बेहद प्यार करते हैं। देश-दुनिया जहां भी हो अपनी मां को जन्मदिन की बधाई जरूर देते। एक बार उन्होंने कई तस्वीरें अपने सोशल मीडिया पर शेयर कीं और अपनी मां दुलारी खेर के बारे में लिखा। 'मेरी प्यारी मां! जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। प्रभु आपको लंबी और स्वस्थ आयु प्रदान करें। आप हमारे लिए क्या हो, इस भावना का शब्दों में वर्णन बहुत कठिन है। जसका प्यार मरते दम तक नहीं बदलता, वो मां होती है। जब कभी भी रुलाती है दुनिया, तो हंसाती है मां। खुशियों की तिजोरी की चाबी है मां।'

'साड़ी का पल्लू...'

फिल्म हिस्टोरियन अली पीटर जॉन के एक लेख के मुताबिक अनुपम खेर अपनी मां के लिए कहते हैं 'मां के पल्लू की बात ही निराली है। मां अपने पल्लू से बच्चों का पसीना और उसके आंसू पोंछती। खाना खाने के बाद मां के पल्लू से अपना मुंह साफ करने का मजा अलग ही होता। 'आंख में दर्द हो तो मां अपने पल्लू को गोल बनाकर फू-फू... फूंक मारकर उसे गर्म करके जब आंख में लगाती थी तो दर्द उसी वक्त पता नहीं कहां उड़न छू हो जाता। जब भी बाहर जाते, मां की साड़ी का पल्लू थाम लेते।'

'धन्यवाद... मुझे छत देने के लिए' 

अनुपम खेर ने शिमला से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद एनएसडी यानी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से एक्टिंग सीखी और 26 साल की उम्र में सपनों में रंग भरने मुंबई आ गए। वो जब मुंबई आए इस पल को याद करते एक बार उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा था.. 'मैं भारतीय सिनेमा में अपनी किस्मत आजमाने 3 जून, साल 1981 को जेब में 37 रुपये लेकर मुंबई आया। मैं लकी हूं, ये शहर मेरे प्रति बहुत काइंड रहा। मुझे कुछ नहीं से बहुत कुछ बनाया। पिछले हफ्ते, मैं उस जगह पर गया जहां मैं पहली बार रहा। मैं अक्सर यहां जाता हूं। मैंने अपना छोटा कमरा चार लोगों के साथ साझा किया! धन्यवाद 2/15, खेरवाड़ी मुझे छत देने के लिए! आप हमेशा मेरा सबसे खास और आइकोनिक एड्रेस बने रहेंगे।'

'मैं गांव का सीधा-सादा लड़का'

साल 1982 में पहली फिल्म 'आगमन' की। तीन साल स्ट्रगल किया। उम्र 29 साल हो चुकी थी। तब साल 1984 की फिल्म 'सारांश' में 65 साल के एक बूढ़े व्यक्ति का किरदार निभाकर खूब तारीफें बटोरी। ये इनकी पहली हिट फिल्म थी। साल 1985 अनुपम खेर ने किरण खेर से शादी की। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने और किरण खेर के रिश्ते बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था कि 'मैं पहली बार किरण से चंडीगढ़ में मिला। मैं गांव का एक सीधा-सादा लड़का और किरण इंडस्ट्री का जाना-माना नाम। हमारे बीच कोई कनेक्शन नहीं था। हम साथ में थियेटर किया करते थे। जब हम दोनों की बातें शुरू हुईं फिर मुलाकातों का सिलसिला चल पड़ा। हम दोनों की अपनी-अपनी मैरिड लाइफ में परेशानियां थीं। लेकिन जब मैं और किरण दोनों साथ में वक्त बिताते तो वो पल बहुत ही खूबसूरत होता।दरअसल, अनुपम खेर ने करीब 22 साल की उम्र में मुंबई आने से पहले ही साल 1978 में एक्ट्रेस मधुमालती कपूर से शादी कर ली थी। लेकिन फिर वो अपनी पत्नी से एक साल में ही अलग हो गए। वहीं किरण खेर ने साल 1979 में गौतम बेरी से शादी की थी। उनसे उन्हें साल 1981 में बेटा सिकन्दर खेर भी हुआ।

'सतीश कौशिक के बारे में बातें नहीं करते'

अनुपम खेर की जन्म की तारीख 7 मार्च है। संयोग ये है कि उसके दो दिन के बाद यानी 9 मार्च को उनके सबसे अजीज दोस्त सतीश कौशिक इस दुनिया को अलविदा कह गए। बॉलीवुड में अनुपम खेर, अनिल कपूर और सतीश कौशिक इस तिगड़ी की दोस्ती की मिसाल दी जाती है। अनुपम खेर एक इंटरव्यू में बताते हैं कि 'मैं और अनिल कपूर, सतीश कौशिक के बारे में बातें नहीं करते। क्योंकि अपने दोस्त को खो देना ये किसी सदमे से कम नहीं है।' अनुपम खेर बताते हैं कि 'सतीश की याद आज भी आती है और हमेशा आती रहेगी। उनकी जगह मेरी जिंदगी में कोई नहीं ले सकता है।'

भगवान, माता-पिता, भाई-बहन के साथ तमाम रिश्तेदार Sयहां तक की पत्नी भी ऊपर से ही तय करके भेजते हैं। इन रिश्तों की कद्र करो और दोस्त जिन्हें हम खुद चुनते हैं उनकी भी कद्र करो। इसके साथ बिताया हुआ हर एक पल खुशी से जियो, क्योंकि ये पल ही हमें हमेशा याद रहेंगे।

 

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!