Cricketer Salim Durani : जब विजेता बनकर उभरे

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जब इंडियन टीम का किया गया विरोध

साल 1973, भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज खेली जा रही थी। एक मैच कानपुर के ग्रीन पार्क में होना था। इंडियन टीम ने अपने एक खिलाड़ी को टीम से बाहर रखा हुआ था। फिर जो हुआ वो किसी ने सोचा तक नहीं। मैच शुरू होने में थोड़ा वक्त था। स्टेडियम खचाखच भरा था। तभी वहां बैठे दर्शकों ने अपने हाथों में पोस्टर – बैनर लेकर पूरी इंडियन टीम का विरोध कर दिया। इन पोस्टर-बैनर पर लिखा था दुर्रानी नहीं, तो टेस्ट नहीं’ लोगों के इस तरह से विरोध के बाद सेलेक्टर्स को अपना फैसला बदलना पड़ा और मुंबई में खेले गए दूसरे टेस्ट में इस खिलाड़ी को फिर से टीम में मौका देना पड़ा।

'हमारे घर एक क्रिकेटर हुआ है'

सलीम दुर्रानी जो अपने दौर के बेहतरीन ऑलराउंडर माने जाते थे, लेकिन उनके मशहूर होने की वजह इससे भी बढ़ी ये थी जब भी दर्शक उन्हें छक्का लगाने के लिए कहते वो छक्का जड़ दिया करते थे। जितने अच्छे बैट्समैन थे उतने ही बढ़िया बॉलर भी थे। जब ये पैदा हुए थे तो इनके पिता ने ये नहीं कहा कि 'मेरा बेटा हुआ है।' उनके पिता ने ये कहा कि 'हमारे घर एक क्रिकेटर हुआ है।'

उतार और चढ़ाव से भरी जिंदगी

आज कहानी साल 1961 में अर्जुन अवार्ड पाने पहले क्रिकेटर और साल 2011 में सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित सलीम दुर्रानी की। विदेशी धरती में जन्म हुआ, महान क्रिकेटर बने, खूबसूरत और हैंडसम थे इन्होंने फिल्मों में भी काम किया। पर जिंदगी का उतार और चढ़ाव से भरी होती है। इसलिए ये भी जिंदगी के आखिरी वक्त पैसों की तंगी से जूझे।

जब परिवार काबुल से जामनगर बस गया

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के रहने वाले अब्दुल अजीज, एक बेहतरीन विकेटकीपर और बल्लेबाज थे। वो अफगानिस्तान छोड़कर कराची में बसे। एक दिन उनका खेल जामनगर के महाराजा जाम साहब दिग्विजय सिंह जी रणजीत सिंह जी जडेजा ने देखा तो बेहद प्रभावित हुए और बतौर सब-इंस्पेक्टर की नौकरी का ऑफर दे दिया। यही वो वक्त था वो पूरा परिवार लेकर कराची छोड़कर जामनगर रहने लगे। लेकिन जामनगर बसने के पहले जब अब्दुल अजीज अफगानिस्तान में ही रहते थे तभी इन्ही के घर 11 दिसंबर साल 1934 को एक बेटा का जन्म हुआ था जिसका नाम सलीम दुर्रानी रखा गया।

पिता से सीखा क्रिकेट

सलीम दुर्रानी ने पिता अब्दुल अजीज ने ही क्रिकेट सीखा और साल 1953 में सौराष्ट्र की टीम से खेलना शुरू किया। ये जब मैदान में खेलते थे तो महान क्रिकेटर लाला अमरनाथ कहते जब भी मैं सलीम दुर्रानी को बैटिंग करते देखता हूं, तो दिल खुश हो जाता है।कड़ी मेहनत के बाद साल 1960 में इंडियन टीम के लिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला।

जब विजेता बनकर उभरे सलीम दुर्रानी

साल था 1961, जब इंग्लैंड की टीम भारत दौरे पर आई थी। भारत और इंग्लैंड के बीच कुल पांच टेस्ट मैच खेले जाने थे। पहले तीन मैच ड्रॉ हो चुके थे। इससे पहले भारत, इंग्लैंड के खिलाफ कभी भी कोई टेस्ट सीरीज नहीं जीती थी। फिर आखिरी दो मैच खेले गए और ये दोनों मैच भारत ने जीत कर ये सिरिज 2-0 से अपने नाम कर ली। ये पहली बार था जब भारतीय टीम ने इतिहास रचा था। इस जीत के नायक लेफ्ट आर्म स्पिनर सलीम दुर्रानी ने कोलकाता टेस्ट में 08 विकेट और चेन्नई टेस्ट में इंग्लैंड के 10 विकेट लिए।

13 साल रहे टीम का हिस्सा

सलीम दुर्रानी साल 1960 से साल 1973 तक कुल 13 साल भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे। इंडियन टीम के पावर हिटर कहे जाने वाले सलीम दुर्रानी ने अपने करियर में 29 टेस्ट खेले, 1202 बनाए और 75 विकेट लिए है। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 170 मैच में 8545 रन और 484 विकेट है।

जब फिल्मों में आजमाई किस्मत

साल 1973, जब इन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला और इसके बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया। सलीम दुर्रानी को फैंस बहुत पसंद करते। बेहद स्मार्ट और हैंडसम भी थे। नौजवान लड़के-लड़कियां उनको एडमायर करते। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने रंगमंच में भी अपना हाथ आजमाया। फिल्म डायरेक्टर बीआर इशारा ने साल 1973 की फिल्म 'चरित्र' में एक्ट्रेस परवीन बॉबी के साथ बतौर हीरो कास्ट किया।

जब तंगी से जूझे

जिंदगी के आखिरी वक्त जामनगर में रहते। गुजारे के लिए कोट कंट्रोल बोर्ड की पेंशन के अलावा कुछ नहीं था। इसलिए आर्थिक तंगी से जूझे। लंबे वक्त तक उम्र के कारण होने वाली मुश्किलों से जूझते हुए 02 अप्रैल, साल 2023 को 88 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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